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लोगों से करोड़ों की ठगी कर फरार हुई कोलकाता की वेयर कंपनी के दो निदेशकों को सीबीआई ने किया गिरफ्तार

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Ranchi : लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर फरार हुई कोलकाता की वेयर कंपनी के दो निदेशकों शहजादा खान और शम्सुल आलम खान को सीबीआई ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है. ये दोनों दिल्ली में अपना नाम बदलकर रह रहे थे. मिली जानकारी के मुताबिक, कोलकाता की वेयर कंपनी पर आरोप है कि यह कंपनी धनबाद के गोविंदपुर इलाके से आम लोगों से लगभग दो करोड़ रुपये की ठगी करके फरार हो गयी थी. सीबीआई रांची की आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों के मुताबिक, चिटफंड कंपनी के निदेशकों को दिल्ली स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया. कंपनी के खिलाफ करोड़ों रुपये की ठगी के साक्ष्य सीबीआई को मिले हैं.

झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद की गयी थी एफआईआर

झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी थी. जांच के बाद सीबीआई ने कंपनी के निदेशक शहजादा खान, शम्सुल आलम खान, रामकृष्ण मंडल समेत अन्य को आरोपी बनाया था. आरोपियों ने गिरफ्तारी के डर से अपना पता भी बदल लिया था.

कोर्ट में किया गया पेश

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई उन्हें धनबाद लायी, जिसके बाद दोनों को धनबाद में विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया. सीबीआई ने दोनों को रिमांड पर लिया है. सीबीआई अधिकारियों के मतुाबिक, चिटफंड कंपनी के निदेशकों के खिलाफ सीबीआई कोलकाता, सीआईडी पश्चिम बंगाल में भी मामले दर्ज हैं.

झारखंड में किस कंपनी ने कितना किया गबन

झारखंड में विभिन्न नॉन बैंकिंग चिटफंड कंपनियां लोगों को अपने जाल में फंसाकर करीब पांच हजार करोड़ रुपये की ठगी करके फरार हो गयी हैं. इनमें ये प्रमुख हैं-

कंपनीराशि (रुपये में)
कोलकाता वेयर हाउस300 करोड़
वारिस ग्रुप ऑफ कंपनीज150 करोड़
साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज124 करोड़
त्रिभुवन एग्रो प्रोजेक्ट लिमिटेड50 करोड़
ग्रीन रे इंटरनेशनल कंपनी5 करोड़
रियल विजन इंटरनेशनल कंपनी15 करोड़
विनायका होम्स एंड रियल एस्टेट50 लाख
फैलकन इंडिया इंडस्ट्रीज2.67 करोड़
आईकोर इंडिया लिमिटेड30 करोड़
वियर्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड2 करोड़
मल्टीनेशनल इंडस्ट्रीज लिमिटेड70 करोड़
डॉलफिन ग्रुप ऑफ कंपनीज100 करोड़
प्रिज्म इन्फ्राकॉन लिमिटेड15 करोड़
आईनोवा ग्रुप ऑफ कंपनीज लिमिटेड40 करोड़
मिलन एंड मिलन कंपनीज35 करोड़

इन स्थानों के लोग ठगे गये थे

रांची, खूंटी, तोरपा, बसिया, सिमडेगा, गुमला, रामगढ़, हजारीबाग, बरही, कोडरमा, चतरा, डालटनगंज, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, धनबाद, अदित्यपुर, गम्हरीया, कांडरा, नोवामुंडी.

जानिये कब-कब क्या हुआ

  • 11 मई 2015 को हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. 28 चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जांच का आदेश.
  • 26 मई 2015 को आरबीआई गवर्नर ने चिटफंड कंपनियों के मामले में सयुक्त कार्रवाई करने का फैसला किया.
  • 31 जून 2015 को कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज लिमिटेड एवं वारिस ग्रुप के खिलाफ सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की.
  • 20 जुलाई 2015 को झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा.
  • 4 अगस्त 2015 को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सभी जिलों के डीसी को जालसाज कंपनियों की संपत्ति नीलाम करने का अधिकार दिया.
  • 26 अक्टूबर 2015 को रांची के डेली मार्केट थाना में कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज लिमिटेड एवं वारिस ग्रुप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई.
  • 12 मई 2016 को मुख्य सचिव ने आरबीआई एवं सेबी के अफसरों के साथ बैठक कर चिटफंड कंपनियों पर शिकंजा कसने एवं ठोस कार्रवाई करने का फैसला किया.
  • 21 सितंबर 2016 को कोलकाता वेयर इंडस्ट्रीज लिमिटेड एवं वारिस ग्रुप के खिलाफ ईडी ने एफआईआर की.

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