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पेयजल और स्वच्छता विभाग : मोटर पंप खरीद में दो कंपनियों को ही तरजीह

अलग राज्य बनने के बाद से ज्योति पंप्स और किर्लोस्कर के ही पंप खरीदे गये. 180 करोड़ से अधिक के पंप खरीदे गये हैं. राज्य में 20 से अधिक जलापूर्ति योजनाएं हुई हैं पूरी.

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Deepak 

Ranchi : पेयजल और स्वच्छता विभाग में जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने के लिए दो कंपनियों से ही मोटर पंप खरीदे जाने का मामला सामने आया है. इसके लिए प्रत्येक वर्ष रांची प्रमंडल और दुमका प्रमंडल में 2000 से लेकर 2017-18 तक वीटी पंप और सेंट्रीफ्युगल पंप के नाम से आठ से 10 करोड़ रुपये के पंप खरीदे गये. यानी 180 करोड़ से अधिक के पंप अलग राज्य बनने के बाद सिर्फ बदले गये हैं. इससे अधिक राशि के पंप 20 से अधिक शहरी जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने में खरीदा गया. इस दौरान ज्योति पंप्स लिमिटेड पटना और किर्लोस्कर पंप के 80 से 90 फीसदी पंप विभाग ने खरीदे हैं. इतना ही नहीं विशेष योजनाओं के लिए अलग से पंप खरीदे गये. पंप और मोटर समेत ट्रांसफारमर की खरीद विभाग के यांत्रिक प्रमंडल की तरफ से किया जाता रहा है.

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अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से मोटर पंप खरीदी जाती रही है, जिस पर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया है. हां रांची अरबन प्रमंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अमरेंद्र मोहन चौधरी और कार्यपालक अभियंता प्रदीप भगत को सरकार ने अनियमितता बरतने के आरोप में निलंबित भी कर दिया था. निलंबन मुक्त होने के बाद ये सीडीओ में पदस्थापित हैं.

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एक योजना के लिए खरीदे जाते रहे हैं 10 करोड़ के पंप

एक योजना को पूरा करने के लिए प्रमंडल की तरफ से आठ से दस करोड़ रुपये के पंप, मोटर, ट्रांसफार्मर खरीदे जाते हैं. झुमरीतिलैया, चाकुलिया और देवघर जलापूर्ति योजना इनमें से अपवाद हैं, जहां फ्लोमोर लिमिटेड का पंप लगाया गया है. अन्य योजनाएं जैसे चास, हजारीबाग, चक्रधरपुर, गुमला, रांची फेज-1, रांची के मिसिंग लिंक योजना, रांची के शहरी जलापूर्ति योजना के पुराने पंप को बदलने, मानगो, आदित्यपुर, चाकुलिया, गिरिडीह, देवघर फेज-1 और फेज-2, धनबाद फेज-1 और फेज-2, पलामू प्रमुख हैं. इन सभी योजनाओं के लिए यांत्रिक प्रमंडल की तरफ से उपरोक्त दोनों कंपनियों के ही मोचर पंप की खरीद की गयी है.

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यांत्रिक प्रमंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता रहे हैं जिम्मेवार

यांत्रिक प्रमंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शंकर दास इसके लिए पूरी तरह जिम्मेवार हैं. उन्होंने ज्योति पंप्स और डब्ल्यूपीआइएल को अपने स्तर से काफी मदद की. वर्तमान अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार झा भी पुराने ढर्रे पर चल रही हैं. इन्होंने काफी साफगोई से दूसरी कंपनी का नाम ही वेंडर लिस्ट से गायब करा दिया गया. वेंडर लिस्ट में चौथी कंपनी का नाम ये लोग शामिल नहीं होने देना चाहते हैं. कोलकाता के राजा बाबू नामक व्यक्ति किर्लोस्कर, मैथर और प्लैट की लायजनिंग करते हैं. उधर ट्रेड वेल नामक कंपनी की तरफ से ज्योति पंप्स की लायजनिंग करते हैं. शुरू से ही विभाग में बगैर वेंडर लिस्ट के ही ज्योति और किर्लोस्कर के पंप खरीदे जाते रहे. यह भी परंपरा के आधार पर की गयी.

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तीसरी कंपनी को नहीं लाने देना चाहते हैं अभियंताओं की लॉबी

विभागीय सूत्रों का कहना है कि यांत्रिक प्रमंडल के अभियंताओं की लॉबी ही किर्लोस्कर और ज्योति पंप्स के अलावा तीसरी कंपनी को आने नहीं देना चाहती है. चुंकि इन दोनों कंपनियों से लेन-देन के रिश्ते अभियंताओं के ठीक हैं. इसलिए विभाग के स्तर पर ही दूसरी कंपनियों का नाम ही कटवा दिया जाता है. रांची अरबन यांत्रिक प्रमंडल के वर्तमान और पूर्व अधीक्षण अभियंता ही मोटर पंप की खरीद में मुख्य भूमिका निभाते हैं. मुख्यालय स्तर पर इनकी सेटिंग बढ़िया रहने से कोई इस लॉबी के विरुद्ध नहीं जाता है.

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