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वात्सल्यधाम से भागे दो बच्चे, 9 दिनों तक अधिकारी रहे अनजान, खुलासा होने के बाद जारी किया नोटिस

Ramgarh:  झारखंड सरकार द्वारा संचालित बाल गृह वात्सल्य धाम से दो बच्चों के भागने का मामला रामगढ़ में फैल चुका है. 5 जून की संध्या वात्सल्यधाम से 2 बच्चे भाग गये. भागने वाले बच्चों के नाम चंदन कुमार, उम्र 13 वर्ष, पिता सुकुमार मल्हार, ग्राम चरणवा, पोस्ट गोजुडीह थाना चैनपुर, जिला पलामू तथा सुनील विश्वकर्मा, उम्र 12 वर्ष ,पिता अरुण कुमार विश्वकर्मा, बलरामपुर, छत्तीसगढ़ है.

इस संबंध में वात्सल्यधाम के अधीक्षक राकेश कुमार द्वारा रामगढ़ थाना में 6 जून को बच्चों के भागने के लिखित सूचना दी गई थी. मगर इतनी बड़ी घटना की जानकारी बाल संरक्षण पदाधिकारी व जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष को शुक्रवार 14 जून तक नहीं थी.

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बाल संरक्षण पदाधिकारी मामले से अंजान

इस बाबत जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी शांति बागे एवं बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मुन्ना कुमार पांडे  ने इस घटना पर अपनी अनभिज्ञता जाहिर की. साथ ही यह भी पता चला कि जिस भवन में बालगृह संचालित हो रहा है वह जेजे एक्ट के अनुरूप नहीं है. सवाल यह उठता है कि अगर बाल गृह का भवन जेजे एक्ट के अनुकूल नहीं था तो उस भवन में बाल गृह की मान्यता किसने दी?

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प्रशासन आया हरकत में

बहरहाल, बच्चों के भागने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया. इसके उपरांत बाल संरक्षण पदाधिकारी शांति बागे ने विभाग को कार्रवाई की जानकारी दी. जिसमें बताया गया कि वात्सल्यधाम एनजीओ को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है साथ ही रामगढ़ थाना एवं बाल कल्याण पदाधिकारी को सूचित किया गया है.

भटके हुए बच्चों के लिए बने हैं बाल गृह

आगे की पड़ताल में एक मामला और प्रकाश में आया. बाल कल्याण समिति के एक सदस्य (आकाश शर्मा ) का नाम महिला थाना सहित जिले के अन्य थानों की दीवारों पर छपवाया गया. और तो और नाम के नीचे  फर्स्ट क्लास न्यायिक मजिस्ट्रेट भी छापा गया था. इस बात की सत्यता जांच करने हेतु डीएसपी मुख्यालय प्रकाश सोए अपनी अनभिज्ञता जाहिर की और कहा कि दीवार पर नाम लिखना गलत है.

इस बाबत पुलिस अधीक्षक निधि त्रिवेदी से पूछने पर उन्होंने बताया कि कोई भी समिति का सदस्य जुडिशियल मजिस्ट्रेट नहीं हो सकता है. अगर ऐसा हुआ है तो यह गलत है और आज सभी थानों से यह बोर्ड हटवाये जायेंगे. वैसे शनिवार की शाम तक जिले के कई थानों के दीवारों पर छपे नामों को मिटा भी दिया गया है.

किसी भी जिले की बाल कल्याण समिति जिले में शोषित बच्चों का संरक्षण करती है और जो बच्चे अन्य स्थानों से भटक कर जिले में आ जाते हैं तो उन्हें सही सलामत अपने मां-बाप के पास या फिर जेजे एक्ट के तहत संचालित बाल गृह आश्रम में रखा जाता है.

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