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नर्सिंग होम में डिलीवरी के दौरान दो बच्चों की मौत, पैसे और डिस्चार्ज को लेकर परिजनों ने किया हंगामा

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Giridhi. गिरिडीह के गांवा थाना क्षेत्र के गांवा बाजार स्थित अविनाश सेवा सदन नर्सिंग होम में जमकर हंगामा हुआ. दरअसल, सोमवार को बकाए पैसे को लेकर प्रसूति के परिजनों और नर्सिंग होम संचालक के बीच विवाद हो गया. विवाद बढ़ते देख गांवा थाना की पुलिस नर्सिंग होम पहुंची और मामले को शांत कराया. नर्सिंग होम का संचालन डॉ अविनाश कुमार करते हैं.

बच्चों की मौत

हालांकि विवाद का एक कारण यह भी रहा कि नर्सिंग होम में दो गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए एक ही दिन भर्ती कराया गया. आरोप है कि डिलीवरी के दौरान दोनों महिलाओं के बच्चों की मौत हो गई. इसके बाद दोनों प्रसूति महिलाओं को उनके परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए एक सप्ताह तक नर्सिंग होम में भर्ती रखा. गांवा थाना क्षेत्र के मानपुर गांव निवासी मो आफताब आलम और हरिजन टोला के कृष्णा तूरी ने 14 सितबंर को नर्सिंग होम में अपनी-अपनी गर्भवती पत्नी को भर्ती कराया.

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भर्ती करने के दौरान नर्सिंग होम के स्टॉफ ने परिजनों ने डिलीवरी के लिए अलग-अलग दर तय किया था. कृष्णा तूरी से 25 हजार का डिमांड किया गया तो आफताब आलम से यही रकम देने को कहा गया, लेकिन दोनों ने इतना खर्च उठाने से इंकार कर दिया. जिसके बाद मोलभाव किया गया. कृष्णा तूरी को नर्सिंग होम के स्टॉफ ने 20 हजार देने की बात कह कर भर्ती कर लिया. इस दौरान दोनों के परिजनों ने कुछ पैसों का भुगतान करते हुए डिस्चार्ज के दिन बकाए राशि का भुगतान करने की बात कही.

 

परिजनों के कई आरोप

परिजनों का आरोप है कि जिस दिन भर्ती किया गया. उस दिन ही डिलीवरी हुई और दोनों बच्चों की मौत हो गई. जबकि प्रसूता महिलाओं की स्थिति को देखते हुए कृष्णा तूरी और आफताब आलम ने अपनी-अपनी पत्नी को नर्सिंग होम में इलाजरत रहने दिया. एक सप्ताह बाद सोमवार को जब दोनों अपनी-अपनी पत्नी को ले जाने लगे.

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नर्सिंग होम के स्टॉफ ने इस दौरान दोनों के परिजनों से पूरे बकाए का भुगतान करने को कहा. लेकिन आफताब और कृष्णा तूरी ने यह कहते हुए भुगतान करने से इंकार कर दिया कि डिलीवरी के दौरान उनके बच्चों की मौत हुई फिर पैसे क्यों दें? लेकिन स्टॉफ ने बगैर भुगतान के दोनों के डिस्चार्ज कर ले जाने पर रोक लगा दिया, जिसके बाद नर्सिंग होम में जमकर हंगामा हुआ. गांवा थाना की पुलिस पहुंची, और मामले को शांत कराया. परिजनों ने मांग की है कि इसकी जांच की जाए कि नर्सिंग होम वैध है या फिर अवैध.

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