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दो भाइयों का नसीब,  मुकेश अंबानी एशिया के टॉप अमीर, अनिल अंबानी अर्श से फर्श पर

जानकारों का मानना है कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस कम्यूनिकेशंस जल्द ही दिवालिया हो सकती है. बता दें कि कई देनदार अपने कर्ज के लिए अनिल अंबानी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके है

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 NewDelhi : टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार अनिल अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस ग्रुप की कंपनियों की मार्केट वैल्यू पिछले एक  साल के दौरान 68 प्रतिशत  तक गिर चुकी है. एक अनुमान के अनुसार ग्रुप पर लगभग 47,000 करोड़ रुपए का कर्ज है.  जानकारों का मानना है कि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस कम्यूनिकेशंस जल्द ही दिवालिया हो सकती है. बता दें कि कई देनदार अपने कर्ज के लिए अनिल अंबानी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके है.  मुश्किलों से निकलने के लिए अनिल अंबानी की निगाहें रक्षा क्षेत्र की कंपनी रिलायंस डिफेंस पर टिकी थीं, लेकिन राजनैतिक कारणों से यहां भी वे परेशानी में पड़ गये है. बता दें कि जब रिलायंस ग्रुप की संपत्ति का  बंटवारा हुआ था,  उस समय पेट्रोलियम और गैस का बिजनेस बड़े भाई मुकेश अंबानी के हिस्से में, वहीं भविष्य का क्षेत्र माने जाने वाला टेलीकॉम बिजनेस छोटे भाई अनिल अंबानी के खाते में गया था. अब बंटवारे के लगभग 15 साल बाद मुकेश अंबानी जहां ना सिर्फ भारत बल्कि एशिया के टॉप अमीर बन चुके हैं,उनके छोटे भाई अनिल अंबानी अर्श से फर्श पर आ चुके हैं.

अनिल अंबानी बाजार से कदमताल बनाकर नहीं रख सके

अनिल अंबानी के डूबने के कारणों पर नजर डालें तो वे खुद  टेलीकॉम सेक्टर की सफलता को लेकर आशान्वित थे और यही वजह थी कि उन्होंने इस सेक्टर में खूब निवेश भी किया. लेकिन दिनों-दिन बढ़ते निवेश और दूसरी तरफ टेलीकॉम सेक्टर की गला-काट प्रतिस्पर्धा के माहौल में अनिल अंबानी कदमताल बनाकर नहीं  रख सके और उनकी कंपनी कर्ज के बोझ तले डूबती चली गयी.  टेलीकॉम सेक्टर को भविष्य में सफलता का फील्ड माना जाता है. लेकिन इस फील्ड में मौजूदा समय में खासकर भारत में भारी निवेश की जरुरत है.  यही वजह रही कि अनिल अंबानी ने टेलीकॉम सेक्टर में भारी निवेश किया;  भारत में 2जी वॉइस सेवाओं से 3जी और 4जी में शिफ्ट करने के लिए रिलायंस कम्यूनिकेशंस ने समुद्र के नीचे केबल बिछाने और स्पेक्ट्रम खरीदने में खासा निवेश किया. इसका नतीजा ये रहा अनिल अंबानी पर काफी कर्ज हो गया. जिससे अनिल अंबानी अभी तक नहीं उबर सके हैं.

टेलीकॉम सेक्टर में भारी प्रतिस्पर्धा

भारतीय बाजार में इस समय टेलीकॉम सेक्टर में भारी प्रतिस्पर्धा है.  ग्राहकों को अपने साथ जोड़ने के लिए कंपनियां कई तरह की स्कीम और सुविधाएं दे रहीं हैं.  अनिल अंबानी को अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी की आक्रामक बिजनेस नीतियों के कारण भी नुकसान उठाना पड़ा.  दरअसल 2016 में मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो के साथ टेलीकॉम सेक्टर में धमाकेदार एंट्री की और एक ही झटके में भारत के टेलीकॉम सेक्टर पर अपना प्रभाव जमा लिया.  रिलायंस जियो की इस आक्रामक बिजनेस नीति से बड़ी-बड़ी टेलीकॉम कंपनियां परेशान हो गयीं. ऐसे में निवेश की कमी और कर्ज के बोझ तले दबी अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशंस के लिए इसका सामना करना काफी मुश्किल हो गया.  अनिल अंबानी को मुश्किल हालात में रिलायंस जियो के साथ हुई स्पेक्ट्रम डील से भी काफी उम्मीदें थीं.  लेकिन यह डील भी नहीं हो सकी. जान लें कि मंगलवार को अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया कि उनकी यह अहम डील अटक गयी है.

दरअसल 23000 रुपए की इस डील से अनिल अंबानी को काफी उम्मीदें थीं. अनिल अंबानी की असफलता में उनके द्वारा की गयी कई डील्स का फेल होना भी एक कारण रहा.  इन फेल डील्स में साल 2010 में रिलायंस कम्यूनिकेशंस और GTL Infra के साथ होने वाली 50,000 करोड़ की डील भी शामिल है. इसके अलावा साल 2017 में Aircel का मर्जर करने वाली डील भी कानूनी कारणों से सफल नहीं हो सकी थी

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