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टीवीएनएल : 2005 में बिना पद स्वीकृति के लेखा निदेशक बननेवाले प्रसाद अब वित्त नियंत्रक पद पर सेवा विस्तार की तैयारी में

मई में होंगे सेवानिवृत्त लेकिन 21 फरवरी को प्रस्तावित बोर्ड मीटिंग में एक्सटेंशन का बिंदु हो सकता है शामिल

Ranchi : झारखंड सरकार का उपक्रम तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड यानी टीवीएनएल अनियमितताओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है. यहां अधिकारी इतने खुदमुख्तार हैं कि खुद से ही अपना पद, वेतन, प्रोन्नति तय कर लेते हैं. यहां तक कि रिटायरमेंट के बाद भी कुछ अधिकारी किसी न किसी जोड़तोड़ से यहां बने रहने का हर जुगाड़ भिड़ाते रहते हैं. ताजा मामला टीवीएनएल के वित्त नियंत्रक एमके प्रसाद से जुड़ा है. वित्त नियंत्रक का पद टीवीएनएल में एमडी के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद है. एमके प्रसाद तीन माह बाद मई महीने में रिटायर करनेवाले हैं, लेकिन इस जुगाड़ में हैं कि उनका एक्सटेंशन हो जाये.

सूत्रों के अनुसार बोर्ड की सोमवार को होनेवाली बैठक के एजेंडा में एमके प्रसाद के एक्सटेंशन के बिंदु को भी शामिल किया जा सकता है. सूत्रों ने बताया कि बैठक में कुछ पदों के सृजन की स्वीकृति भी ली जानी है.

ऐसा इसलिए ताकि वित्त नियंत्रक पद पर सेवा विस्तार नहीं मिलने की स्थिति में श्री प्रसाद को उक्त पद पर समायोजित किया जा सके.

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टीवीएनएल बोर्ड की बैठक पिछले मंगलवार को ही होनी थी, लेकिन वित्त सचिव के उपलब्ध नहीं होने के कारण यह बैठक अब सोमवार को प्रस्तावित है. ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अविनाश कुमार टीवीएनएल के चैयरमैन भी हैं.

सूत्रों के अनुसार एमके प्रसाद बिहार राज्य विद्युत बोर्ड में लेखा विभाग में अधिकारी के रूप में टीवीएनएल में पदस्थापित थे. 2005 में एमके प्रसाद ने पैरवी और पहुंच के बल पर लेखा निदेशक का पद हासिल कर लिया.

जबकि उस समय टीवीएनएल में लेखा निदेशक का पद न तो रिक्त था और न ही स्वीकृत. 2006 में टीवीएलएल झारखंड सरकार के अंतर्गत आ गया और यहां काम कर रहे सभी कर्मचारी झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड से टीवीएनएल में समायोजित हो गये.

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जानकारी के अनुसार निगम में लेखा निदेशक का पद 2012 में स्वीकृत हुआ. इस तरह एमके प्रसाद 2005 से 2012 तक, यानी सात साल तक गलत तरीके प्रोन्नति हासिल कर लेखा निदेशक के पद पर रहे. इस अवधि में उनका वेतनमान और इंक्रीमेंट भी गलत था, क्योंकि वे एक ऐसे पद पर थे, जो स्वीकृत ही नहीं था.

दिलचस्प बात यह है कि एजी ने भी इस गड़बड़ी को नहीं पकड़ा. 2012 में एमके प्रसाद प्रोन्नत होकर वित्त नियंत्रक बन गये और यानी 2005 से लेकर इन 17 सालों की अवधि में एमके प्रसाद द्वारा जो वेतन, भत्ते तथा अन्य वित्तीय लाभ लिये गये. अब फिर से वे सेवा विस्तार लेने की तैयारी में जुटे हैं.

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मामले में क्या कहा एमके प्रसाद ने

एमके प्रसाद ने कहा कि फाइनेंस कंट्रोलर का पद 2012 में सृजित हुआ. वर्तमान में वे फाइनेंस निदेशक पद पर कार्यरत हैं. वो पद कंपनी गठन के समय से ही है और मैं सृजित पद पर कार्यरत हूं.

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