न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

तुपुदाना इंडस्ट्रीयल एरिया : बचे 100 कारखाने भी बंदी की कगार पर, सिर्फ पांच फीसदी ही हो रहा काम

392

Chhaya/ Sweta

Ranchi : एक ओर जहां तुपुदाना इंडस्ट्रियल एरिया में 50 लघु कारखाने बंद हो गये हैं. वहीं एक सौ कारखाने बंदी की कगार पर पहुंच गये है. ये बात खुद इस क्षेत्र के कारखाना संचालकों का कहना है.

जब न्यूज विंग की टीम ने कारखाना संचालकों से बात की तो पता चला कि क्षेत्र में जो सौ कारखाने वर्तमान में चल रहे हैं. वहां लगभग पांच प्रतिशत ही काम हो रहा है. क्योंकि बाजार में न ही मांग है और न ही मदर कंपनियां मेकॉन, एचईसी ऑर्डर दे रही है.

इनमें से कुछ ऐसी भी कंपनियां हैं, जो दस से पंद्रह दिनों के ड्रॉप आउट पर काम कर रहे हैं. मतलब यहां दस से पंद्रह दिनों के लिये काम बंद कर दिया जा रहा है. जानकारी ये भी मिली है कि क्षेत्र के लगभग सभी कारखाने कर्ज में है.

कुछ कारखानों के संचालक इतने कर्ज में हैं कि वे बिजली का बिल तक नहीं दे पा रहे हैं. ऐसे में जब कारखाना में बिजली ही नहीं होगी तो काम कैसे होगा.

Whmart 3/3 – 2/4

वहीं बाजार में मंदी होने से लोगों को काम भी नहीं मिल रहा और न ही मदर कंपनियां इन लघु उद्योगों को ऑर्डर दे रही हैं. क्षेत्र में 150 लघु उद्योगों का कारखाना है. वर्तमान में सौ आंशिक रूप से ही संचालित हैं.

इसे भी पढ़ें –तुपुदाना इंडस्ट्रियल एरिया : सिर्फ दो महीने में 50 कारखाने हुए बंद, चार हजार लोगों की गयी नौकरी

जहां 70 काम करते थे, वहां अब दो मजदूर नजर आ रहे

तुपुदाना इंडस्ट्रीयल एरिया : बचे 100 कारखाने भी बंदी की कगार पर, सिर्फ पांच फीसदी ही हो रहा काम
कारखाना के अंदर की तस्वीर

अलग-अलग कारखानों का मुआयना करने पर पता लगा कि जहां पहले 70-80 लोग काम करते थे, अब वहां दो मजदूरों को ही काम करते हुए देखा जा रहा है. मशीन ऑफ फेब्रिकेशन के कारखानों में पांच मजदूरों को काम करते देखा गया. जबकि सिर्फ एक कर्मचारी को ही ऑफिस में काम करकते देखा गया.

संचालक प्रकाश सिंह से जानकारी मिली की पहले यहां 70-80 लोग काम करते थे. लेकिन अब सिर्फ सात-आठ लोग ही काम करते हैं. मशीन ऑफ कास्टिंग स्मॉल फेब्रिकेशन के शशिभूषण सिंह ने बताया कि उनके यहां 30 लोग काम करते थे, लेकिन सिर्फ अब छह लोग काम करते हैं. ऐसे ही हर कारखाने से मजदूरों और कर्मचारियों को हटाया गया.

Related Posts

तबलीगी जमात के 25,500 से ज्यादा सदस्य आइसोलेशेन वार्ड में रखे गये, हरियाणा के पांच गांव सील : स्वास्थय मंत्रालय

कुल 4067 मरीजों में से 35 प्रतिशत का तबलीगी जमात से संबंध, पिछले 24 घंटे में 693 नये मामले मिले

जिन कारखानों में स्थायी कर्मचारियों को रखा गया है, वे कर्मचारी कारखाने की हालत देखकर खुद की खेती के अलावा पारिवारिक कार्य कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब कारखाना में काम ही नहीं तो वहां बैठकर क्या करेंगे.

इसे भी पढ़ें – मोदी सरकार में मंदी के साथ विदेशी निवेश भी 14 साल में सबसे कम

बेरोजगार हो सकते हैं लगभग 2500 लोग

तुपुदाना इंडस्ट्रीयल एरिया : बचे 100 कारखाने भी बंदी की कगार पर, सिर्फ पांच फीसदी ही हो रहा काम
कारखाना में काम करता अकेला मजदूर

लघु उद्योग के भरोसे रोजी-रोटी चलाने वाले की संख्या देखें तो पांच-छह कारखानों को छोड़ सभी में लगभग 20-25 लोग काम करते हैं. ऐसे में लगभग दो हजार लोगों की नौकरी इन लघु कारखानों के बंद होने से चली जायेगी.

जबकि बाकी बचे छह कारखानों में एक सौ से 110 के लगभग लोग काम करते हैं. इन कारखानों में दस से पंद्रह की संख्या में स्थायी कर्मचारी भी हैं. जिनकी कुल संख्या लगभग पांच सौ होगी.

वर्तमान में भले ही इन कारखानों में काम आंशिक हो रहा हो, लेकिन निकट भविष्य में अगर कारखाने पूरी तरह बंद होते हैं, तो लगभग 2500 लोग बेरोजगार हो जायेंगे.

इन कारखाना संचालकों का कहना है कि दो माह में अगर सरकार आर्थिक मदद नहीं करती है तो कारखानों का बंद होना स्वाभाविक है.

कच्चा माल भी परेशानी का सबब

सिर्फ बाजार में मंदी ही लघु उद्योगों के खत्म होने का कारण नहीं है. यहां कच्चा माल सही समय पर नहीं मिलना भी एक प्रमुख समस्या है. क्षेत्र में फेब्रिकेशन, इंजीनियरिंग, माइनिंग, स्टील प्लांट आदि के स्पेयर पार्टस बनाये जाते हैं. जिसे बनाने वाले कुछ कारखाने बंद हो चुके हैं. इन स्पेयर पार्ट्स को बनाने के लिए कोयला, स्पंज आयरन, पेट्रोलियम कोक आदि की जरूरत होती है.

सुरेंद्र सिंह नाम के कारखाना संचालक ने बताया कि खदानों से कोयला निकाले जाने के बाद जगह- जगह डंप किया जाता है. अलग-अलग जगहों से होते हुए कोयला कारखानों तक पहुंचता है.

ऐसे में कोयला में पत्थर और ईंट की मात्रा अधिक होने के कारण वे जलते नहीं हैं. कोयला नहीं जलने के कारण बाकी कच्चा माल भी बर्बाद हो जाता है. जिससे मजदूरों को बैठना पड़ जाता है, इससे उन्हें भी पेमेंट तो करना ही होता है. तो ऐसे में पैसों का अलग से ही नुकसान होता है.

साथ ही उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम कोक भी पारादीप से लाने का आदेश दिया गया है. लेकिन वहां से पेट्रोलियम कोक लाने पर रेट का बहुत अंतर हो जाता है. जिससे पारादीप से खरीदना महंगा हो जाता है.

जबकि पानीपत से पेट्रोलियम कोक लाना मेरी बजट में होता है. न्यूज विंग को यह भी जानकारी मिली कि लौह उत्पाद बनाने के लिए अधिकांश लघु उद्योगों को आयरन स्पंज की जरूरत होती है. साथ ही सुरेंद्र सिंह का कहना है कि टाटा में काम प्रभावित होने की वजह से भी लघु उद्योगों को आयरन डस्ट  नहीं मिल पा रहा.

इसे भी पढ़ें – मोमेंटम झारखंड तो याद ही होगा…सीएम आवास के पास लगा चेंबर का होर्डिंग्स उसी का फाइनल रिजल्ट है

 

न्यूज विंग की अपील


देश में कोरोना वायरस का संकट गहराता जा रहा है. ऐसे में जरूरी है कि तमाम नागरिक संयम से काम लें. इस महामारी को हराने के लिए जरूरी है कि सभी नागरिक उन निर्देशों का अवश्य पालन करें जो सरकार और प्रशासन के द्वारा दिये जा रहे हैं. इसमें सबसे अहम खुद को सुरक्षित रखना है. न्यूज विंग की आपसे अपील है कि आप घर पर रहें. इससे आप तो सुरक्षित रहेंगे ही दूसरे भी सुरक्षित रहेंगे.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like