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राज्यपाल को भरोसा, झारखंड राज्य प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसी और डोमेस्टिक बिल से पलायन और ट्रैफिकिंग की चुनौतियों का निदान

Ranchi : राज्यपाल रमेश बैस ने उम्मीद जतायी है कि राज्य में झारखंड राज्य प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसी और डोमेस्टिक बिल लागू हो जाने से बड़ी राहत मिलेगी. खास कर बड़ी संख्या में होते पलायन और बच्चों की ट्रैफिकिंग की समस्या का निदान हो सकेगा. मंगलवार को उनसे मिलने गये 5 सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने उनसे अपील की थी कि वे इस बिल को जल्द से जल्द झारखंड में पास कराने की पहल करें. प्रतिनिधिमंडल में एचइसी के पूर्व सीएमडी सह बाल कल्याण संघ के सदस्य अभिजित घोष,  संघ के राज्य समन्वयक संजय कुमार मिश्र, एटसेक झारखंड की समन्वयक ज्योति सिंह और झारखंड राज्य बाल अधिकार मंच की अध्यक्ष प्रतिमा कुमारी, सदस्य एंजेला खलखो ने राज्यपाल से मुलाकात के क्रम में उन्हें ज्ञापन भी सौंपा. इस दौरान सभी ने राज्य में बाल श्रम, पलायन संबंधी चुनौतियों पर संक्षिप्त चर्चा की.

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ट्रैफिकिंग का निदान जरूरी

राज्यपाल ने राज्य में बाल अधिकार के संरक्षण के विषय पर चिंता जतायी. साथ ही कहा कि जल्द ही झारखंड राज्य प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसी एवं डोमेस्टिक वर्कर्स बिल को पास किया जाना अहम है. इससे राज्य से हो रहे असुरक्षित पलायन एवं ट्रैफिकिंग को रोका जा सकेगा. देश के विभिन्न महानगरों से ट्रैफ़िकिंग से मुक्त करायी गयी बालिकाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर समाज में स्वाभिमान के साथ जीने के लिए और भी कार्य किये जायें. बच्चों को पुनः ट्रैफिकिंग होने से बचाया जाना आवश्यक है.

बाल श्रमिक आयोग का न होना चिंतनीय

संजय मिश्रा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में श्रम विभाग और एनजीओ की पहल पर प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसी एवं डोमेस्टिक वर्कर्स बिल 2016 बनाया गया. इसे पास कर कानून बनाने की आवश्यकता है. इसके अलावा राज्य में बाल श्रमिक आयोग भंग है. इसके कारण हजारों बाल श्रमिकों को मुक्त कर पुनर्वासित करने और न्याय दिलाने में बाधा आ रही है.

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