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दो लाख स्कूली बच्चों के दूध पर आफत, झारखंड मिल्क फेडरेशन का करोड़ों रुपये है बकाया

  • सरकार ने दिया है आश्वासन, स्कूल खुलने तक फेडरेशन करेगा इंतजार

Anuj tiwari

Ranchi: राज्य में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को स्कूलों में मिलने वाले दूध पर आफत हो गई है. दूध वितरण की जिम्मेदारी सरकार ने झारखंड मिल्क फेडरेशन को दी है जो चार जिले बोकारो, लातेहार, हजारीबाग और रांची के करीब दो लाख बच्चों को फोर्टिफाइड दूध देता है.

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लेकिन अभी तक फेडरेशन का करीब तीन करोड़ रुपये बकाया है जिसका भुगतान कृषि-पशुपालन विभाग नहीं किया है. फेडरेशन के एमडी सुधीर कुमार बताते हैं कि 2018-19 का 2.86 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है.

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बकाया का भुगतान नहीं हुआ तो दूध देना संभव नहीं : फेडरेशन

अब फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनके बकाया रकम का भुगतान नहीं हो जाता है तब तक वो बच्चों को दूध उपलब्ध नहीं करा सकेगा. हालांकि लॉकडाउन के बाद से स्कूल बंद है जिस कारण बच्चों को दूध भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.

फेडरेशन का कहना है कि बंदी के दौरान बच्चों के घर तक दूध पहुंचाने का किसी प्रकार का कोई निर्देश पारित नहीं किया गया था. लेकिन स्कूल खुलने तक सरकार को बकाए रकम का पेमेंट करना होगा ताकि किसानों से लिए गए दूध का पैसा उन्हें दिया जा सके.

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इधर विभाग का दावा जल्द चुकाया जाएगा बकाया

फेडरेशन के हाथ खड़े कर देने के बाद विभाग अब रेस हो गया है. विभागीय सचिव को पिछले फरवरी माह में ही फेडरेशन ने पत्र लिखा था. लेकिन लॉकडाउन की वजह से कोई ठोस पहल नहीं की जा सकी. लेकिन अब विभाग ने आश्वासन दिया है कि उनका सारा बकाया जल्द ही पूरा दे दिया जाएगा.

मालूम हो कि शारीरिक व मानसिक विकास के लिए सरकार पौष्टिकता अभियान के तहत गिफ्ट मिल्क योजना की पहल करते हुए पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को प्रतिदिन 200 एमएल दूध उपलब्ध कराया जाता है. इस दूध को विटामिन ए और डी से फोर्टिफाइड किया जाता है.

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आठ जिलों में शुरू करनी थी योजना, आज तक चार में शुरू भी नहीं हुई

आठ जिलों के स्कूलों में फोर्टिफाइड दूध देने की तैयारी थी. लेकिन सिर्फ चार जिलों में ही योजना की शुरुआत की जा सकी. अन्य चार जिलों में दूध के प्लांट ही नहीं लग सके जिसके कारण यहां के बच्चों को दूध का इंतजार करना पड़ रहा है.

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