Education & CareerJharkhandRanchi

टीआरएल विभाग को नहीं मिल रहे हैं स्टूडेंट्स, ऑनलाइन क्लासेस पर भी आफत

Ranchi : रांची विवि का ट्राइबल एंड रिजनल लैंग्वेज विभाग हमेशा से चर्चा में रहा है. कभी यहां एडमिशन के लिए पैरवी हुआ करती थी, लेकिन आज इसकी हालत यह है कि यहां स्टूडेंट्स एडमिशन लेना नहीं चाहते. इसकी कई वजह है. फिलवक्त इस डिपार्टमेंट का शायद ही कोई विषय है जिसमें सभी सीटों में एडमिशन हुआ हो.

आलम यह है कि दो विषयों में दो या तीन एडमिशन ही वर्तमान सत्र के लिए हो पाया है. नामांकन के आंकड़े बताते हैं कि ट्राइबल एंड रिजनल लैंग्वेज के नौ विषयों में सवा सौ स्टूडेंट्स ही एडमिशन लिए.

advt

खोरठा और हो भाषा की स्थिति काफी खराबः

रांची विवि के ट्राइबल एंड रिजनल लैंग्वेज विभाग में खोरठा और हो भाषा की स्थिति भी काफी खराब है. विवि में हो भाषा का वर्तमान में 4 घंटी आधारित शिक्षक हैं, लेकिन नामांकन सिर्फ 3 विद्यार्थियों ने ही लिया है. वहीं खोरठा में 3 शिक्षक हैं और नामांकन सिर्फ 10 विद्यार्थियों ने लिया है. कुरमाली में 2 शिक्षक हैं और 9 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है. खड़िया में 2 शिक्षक हैं और नामांकन 3 विद्यार्थियों ने लिया है.

इसे भी पढ़ें:बढ़ी परेशानीः कोविन पोर्टल क्रैश,18 प्लस वालों का नहीं हो पा रहा है रेजिस्ट्रेशन

नामांकन की स्थितिः

नागपुरी -30
कुडुख – 50
मुंडारी- 9
खड़िया- 3
संताली- 2
खोरठा- 10
पंच परगनिया -10
कुरमाली -10

घंटी आधारित शिक्षक चला रहे डिपार्टमेंटः

रांची विवि के ट्राइबल एंड रिजनल लैंग्वेज विभाग को घंटी आधारित शिक्षक ही चला रहे हैं. यहां घंटी आधारित 20 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है. जबकि 2 स्थाई शिक्षक हैं. उसके बावजूद भी इस विभाग में नामांकन की स्थिति काफी खराब है. कोरोना काल के दौरान पढ़ाई की बात करें तो यहां पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों तक शत-प्रतिशत ऑनलाइन मटेरियल भी नहीं पहुंच रहा है. शिक्षकों के मुताबिक इस विभाग में अधिकांश स्टूडेंट्स उन क्षेत्रों से आते हैं जहां नेटवर्क की समस्या रहती है. ऐसे में संभव नहीं हो पाता कि सबको ऑन लाइन क्लासेस से जोड़ा जाये.

ऑनलाइन नामांकन के कारण विद्यार्थी हुए प्रभावितः

बात करें एडमिशन की तो साल 2021 में कोरोना महामारी के मद्देनजर रांची विवि के सभी विभाग में नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की गई है. इस वजह से सैकड़ों विद्यार्थी नामांकन से वंचित रह गए. रांची विवि का जनजातीय भाषा विभाग भी इसी वजह से प्रभावित हुआ. इस विभाग में पढ़ने वाले विद्यार्थी जनजातीय क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं. उन क्षेत्रों से ऑन लाइन नामांकन प्रक्रिया पूरा करना संभव नहीं हो पाता है.

इसे भी पढ़ें:LALU YADAV की रिहाई के लिये भरे गये पांच-पांच लाख का बेल बांड, आज ही रिलीज आदेश मिलने की उम्मीद

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: