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श्रद्धांजलि: क्राइम सिटी रांची में अमन चैन लौटाने वाले कड़क एसएसपी के रूप में याद रहेंगे अमिताभ चौधरी

कुख्यात सुरेंद्र बंगाली व अनिल शर्मा को सलाखों के पीछे डालकर जनमानस के दिलों में बनाया था बसेरा

Ranchi: अमिताभ चौधरी का व्यक्तित्व उपलब्धियों से भरा रहा है. मूलरूप से बिहार के दरभंगा जिले के बाथे गांव के रहने वाले अमिताभ चौधरी 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी थे. आईपीएस अमिताभ चौधरी जहां भी रहें, वहां अपने काम से अलग पहचान बनाई. लोहरदगा, पलामू, जमशेदपुर और रांची में उन्होंने एसपी/एसएसपी के पद पर रहते हुए माफिया और संगठित अपराध के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की. कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा. जनशिकायतों के निस्तारण और पुलिस कर्मियों की समस्याओं के निवारण में उल्लेखनीय काम किए. कई अपराधियों का एनकाउंटर भी किया. उन्होंने फोर्स को अनुशासित बनाए रखा.

 

उन दिनों रांची में दिनदहाड़े मर्डर, लूट, गैंगवार आदि की घटनाओं पर नकेल कसने के लिए आईपीएस अमिताभ चौधरी को रांची की कमान 23 अप्रैल 1997 को सौपी गयी. कई चुनौतियां के बाबजूद एक-एक कर अपराधी और उनके गुर्गो को पकड़कर जेल में डालना शुरू किया. अमिताभ चौधरी ने सुरेंद्र सिंह बंगाली उर्फ रौतेला और अनिल शर्मा जैसे अपराधियों को सलाखों के पीछे डालकर गैंगवार को खत्म कर दिया था. अमिताभ चौधरी ने सबसे पहले पुलिस का खुफिया नेटवर्क मजबूत किया और दर्जनों हत्या, लूट, रंगदारी में वांछित गैंगस्टर सुरेंद्र बंगाली को कोलकाता से गिरफ्तार किया. इसके कुछ ही महीनों बाद अनिल शर्मा को नोएडा से गिरफ्तार किया गया.

 

यही वजह है कि आज भी अमिताभ चौधरी लोगों के दिलों में एक अमिट छाप बनाकर रखे हुए हैं. 7 जनवरी 2000 तक करीब लगभग तीन साल तक का रांची में अपना टर्म पूरा किया. इसके बाद इन्हें डीआईजी के पद पर प्रमोट किया गया. बिहार से आने के बाद वह झारखंड में ही रह गए. 2013 में स्पेशल ब्रांच के एडीजी पद पर रहते हुए अमिताभ चौधरी ने वॉलंटियरी रिटायरमेंट ले लिया और झारखंड क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के प्रेसिडेंट बने.

 

वर्ष 1997 में जब रांची एसएसपी के तौर पर उनकी पोस्टिंग हुई थी, तब इस शहर की पहचान क्राइम सिटी के रूप में थी. हत्या, लूट, रंगदारी, छिनतई जैसे अपराध चरम पर थे. शहर में मेन रोड तक की दुकानें शाम सात-साढ़े सात बजे बंद हो जाया करती थीं. अंधेरा घिरते ही सड़कों पर ऑटो तक नहीं मिलता था. अमिताभ चौधरी ने शहर में क्राइम कंट्रोल की चुनौती स्वीकारी और वह कर दिखाया, जो इसके पहले रांची के किसी दूसरे एसएसपी ने नहीं किया था.

 

इन दोनों गैंगस्टर की गिरफ्तारी से अमिताभ चौधरी रांची में जन-जन के बीच चर्चित हो उठे. इसके पहले एक दशक से दोनों दक्षिण बिहार की पुलिस के लिए चुनौती बने हुए थे. वर्ष 1997 में उनकी अगुवाई वाली पुलिस ने रांची के अपर बाजार में रंगदारी वसूलने पहुंचे तीन गैंगस्टर्स को कार्टसराय रोड में मुठभेड़ में मार गिराया था. छोटे-बड़े कई अपराधियों की गिरफ्तारी उनके कार्यकाल में हुई और रांची का अमन-चैन लौट आया था. बता दें कि अमिताभ चौधरी 1985 बैच के आईपीएस रहे हैं. उनकी पत्नी निर्मला अमिताभ चौधरी भी आईपीएस रही हैं, जो पुलिस सेवा में उनसे पांच साल सीनियर हैं.

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