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विकास में भागीदारी चाहता है आदिवासी समाज : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने 669 युवा समूहों को कुल एक करोड़ 67 लाख 25 हजार रुपये देने की घोषणा की

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Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि अब कोई भाषणों से आदिवासियों को गुमराह करने कि कोशिश न करे. आदिवासी समाज शिक्षित एवं जागरूक हो चुका है, वह विकास में भागीदारी चाहता है. आदिवासियों के लिए 67 सालों से भाषण की राजनीति के बाद आदिवासियों के जीवन में बदलाव की बुनियाद रखने का काम वर्तमान सरकार कर रही है. सरकार आदिवासियों के सशक्तीकरण और उनके जीवन में बदलाव के लिए कार्य कर रही है. 15वें वित्त आयोग से राज्य के 26 प्रतिशत जनजातीय आबादी के समग्र विकास के लिए हमने अधिक धनराशि की मांग की है. मुख्यमंत्री ने गुरुवार को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में समाज कल्याण विभाग द्वारा झारखंड आदिवासी सशक्तीकरण एवं आजीविका परियोजना के तहत आयोजित युवा समूह सम्मेलन को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं.

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युवा संकल्प लें, तो विकास की सिद्धि अवश्य प्राप्त होगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की 32 प्रतिशत आबादी युवा है. युवाशक्ति अगर बदलाव का संकल्प ले, तो विकास की सिद्धि अवश्य प्राप्त होगी. प्रधानमंत्री ने संकल्प से सिद्धि का नारा दिया है और वह नारा हमारी युवा शक्ति साकार कर सकती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समुदाय के 669 युवा समूहों का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य है युवाओं को संगठित करना और एक सूत्र में पिरोना तथा उनके बीच सीड कैपिटल के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देना. ये समूह सरकारी योजनाओं की जानकारी के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे. मुख्यमंत्री ने अपने विवेकाधीन फंड से 669 युवा समूहों को 25-25 हजार अर्थात एक करोड़ 67 लाख 25 हजार रुपये देने की घोषणा की.

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छोटे-छोटे बदलवों से बड़े बदलाव हो सकते हैं

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समुदाय के सामुदायिक सशक्तीकरण के तहत 1254 गांव के लिए ग्रामसभा परियोजना कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है तथा कुल 1254 समितियों के ग्राम विकास कोष में 17.90 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये गये हैं.  इस परियोजना के तहत 5360 महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया, जिसमें 64332 महिलाएं शामिल हैं. 4999 महिला स्वयं सहायता समूह का बैंक खाता भी खुलवाया गया और उसमें 5.52 करोड़ रुपये सीड कैपिटल उपलब्ध कराया गया है. मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गांव के विकास के लिए हम छोटे-छोटे प्रयास कर सकते हैं, जैसे डेयरी फार्म, मुर्गी पालन के शेड लगा सकते हैं. गांव में एकत्र होनेवाले गोबर से गोबर बैंक तैयार कर सकते हैं और इन सब चीजों से छोटे-छोटे बदलावों से बड़े बदलाव हो सकते हैं.

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जनजातीय समुदाय की आजीविका के अन्य स्रोतों बढ़ावा दे रही सरकार : डॉ लुईस मरांडी

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समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने कहा कि राज्य के 14 टीएसपी जिलों के 32 प्रखंडों की 175 पंचायतों के 1790 गांव के 215839 परिवारों, जिनमें कुल 178 अति कमजोर जनजातीय समूह बहुल गांव हैं, इस परियोजना का कार्य क्षेत्र हैं. वैसे प्रखंडों को ही इसमें प्राथमिकता से सम्मिलित किया गया है, जिनमें अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 50 प्रतिशत या इससे अधिक है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समुदाय के भूमि एवं जल प्रबंधन द्वारा उनके कृषि की पैदावार को बढ़ाने के साथ बाजार केंद्रीय उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा दे रही है. पशुपालन और उसके द्वारा आय में वृद्धि करते हुए आजीविका के अन्य स्रोतों को बढ़ावा दे रही है. स्वागत संबोधन करते हुए समाज कल्याण सचिव हिमानी पांडेय ने कहा कि इस परियोजना की अवधि 2013 से 2021 है, परंतु झारखंड में यह परियोजना अप्रैल 2015 से लागू की गयी है. परियोजना का उद्देश्य सामान्यत: आदिवासी एवं विशेष रूप से आदिम जनजाति परिवारों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना है. इस परियोजना की कुल लागत 635.75 करोड़ है.

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सीएम ने युवा समूहों को दिया 43.60 लाख सीड कैपिटल

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 218 युवा समूहों को 43.60 लाख सीड कैपिटल तथा 40 ग्राम सभा परियोजना क्रियान्वयन समितियों को 1.66 करोड़ रुपये का चेक दिया. साथ ही 10 पशु मित्रों को पशु चिकित्सा किट भी दिया गया. मुख्यमंत्री ने 1.01 करोड़ रुपये की लागत से 12 किसान सेवा केंद्रों का उद्घाटन किया तथा 38.80 करोड़ की लागत से 5983 परिवारों के बीच 2304 बकरी शेड, 2682 मुर्गी शेड, 997 सूकर शेड का उद्घाटन किया. मुख्यमंत्री ने 49.50 लाख रुपये की लागत से 11 गांवों के 11 समूहों के लिए 11 सूकर प्रजनन केंद्रों का भी उद्घाटन किया.

कार्यक्रम में युवा समूहों के प्रतिनिधियों गुमला की अनिता कुजूर एवं सीदीय कयाम, प. सिंहभूम के हिन्दूराम हांसदा, सरायकेला-खरसावां के सुरेश दांगिल, रांची के गंभीर मुंडा तथा गोड्डा सुंदरपहाड़ी की सुनीता मुर्मू ने अपने अनुभव साझा किये. कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, समाज कल्याण सचिव हिमानी पांडेय, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रमेश कुमार पांडेय तथा बड़ी संख्या में जनजातीय युवा समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

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