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आदिवासी सामाजिक रूप से मजबूत, आर्थिक पृष्ठभूमि में कमजोर: अर्जुन मुंडा

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Ranchi: समाज में दो तबके हैं, एक ग्रामीण सभ्यता जो कृषि आधारित है और दूसरी नगरीय सभ्यता जो उद्योगों पर निर्भर है. ग्रामीण सभ्यता में आदिवासी समाज भी आती है. ये बातें पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने लोकमंथन कार्यक्रम के दूसरे दिन ‘समाज अवलोक’ विषय पर चर्चा करते हुए कहा. इस दौरान आदिवासी पृष्ठभूमि देखने के लिए उन्होंने दो आयाम बताये और कहा कि बात अगर सामाजिक पृष्ठभूमि की है तो वे काफी मजबूत हैं और बात यदि आर्थिक स्थिति की है तो इस मामले में वे कमजोर हैं.

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तीन भागों में बंटा है समाज

लोकमंथन कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर कौशल पंवार ने समाज को तीन भागों में बांटते हुए कहा कि पहला शास्त्रीय समाज होता है जो परंपराओं से चलता है. दूसरा व्यवहारिक समाज होता है जो पारिवारिक अनुभूतियों के सहारे चलता है और तीसरा वैधानिक समाज होता है जो नियम-कानूनों के सहारे चलता है. उन्होंने कहा कि जब वैदिक काल से ‘सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया’ की बात हो रही है तो यह व्यवहार में क्यों नहीं है? हमारे समाज में वर्ण और जाति का भेदभाव का कोई स्थान नहीं है.

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देश में विविधता है

विश्व में भारत का क्या स्थान रहा है इस विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ मीनाक्षी जैन ने कहा कि प्राचीन समय से भारत पर लिखी गई विशाल सामग्री उपलब्ध है. विश्व की दृष्टि में भारत का महत्व स्पष्ट करने के लिए उन्होंने बताया कि विदेशी शासकों द्वारा यहां के शासक को पत्र लिखकर मोर पंख और हाथी दांत के साथ-साथ दार्शनिक भी भेजने का निवेदन किया जाता था. ग्रीक इतिहासकारों ने पोरस की बहादुरी का वर्णन अपनी कृतियों में किया है.

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चार नाटकों का हुआ मंचन

इस दौरान चार नाटकों का मंचन किया गया. अमरनाथ कुमार एवं दल के कलाकारों ने भारत की सभ्यता, संस्कृति और वर्तमान उपलब्धियों पर आधारित लघु नाटक भारत दर्शन का मंचन किया. इस नाटक के माध्यम से भारत के गौरवशाली इतिहास और उपलब्धियों का जीवंत दर्शन दर्शाया गया. इसके अलावे तीन और नाटक कथा रामप्रसाद बिस्मिल की, गौरवशाली झारखंडष्और मातृभूमि का मंचन किया गया. सभी नाटकों का लेखन और निर्देशन अमरनाथ कुमार ने किया है.

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