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धर्मकोड की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों ने कसी कमर, कोड के ‘नाम’ पर फिलहाल एका नहीं

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  • कोई ‘सरना धर्मकोड’, तो कोई ‘आदिवासी धर्मकोड’ चाह रहा नाम
  • ‘सरना धर्मकोड’ की मांग को लेकर 20 अक्टूबर को झारखंड में महारैली का एलान

Ranchi : धर्मकोड की मांग को लेकर तो राज्य के विभिन्न आदिवासी संगठन एकजुट हैं, लेकिन धर्मकोड के नाम को लेकर उनमें अभी भी सहमति नहीं बन पायी है. इस मुद्दे पर शनिवार को प्रेस क्लब में दो अलग संगठनों ने प्रेसवार्ता की. डॉ करमा उरांव, धर्मगुरु बंधन तिग्गा, नारायण उरांव, शिवा कच्छप, सुशील उरांव सहित अन्य ने कहा कि हम सिर्फ सरना धर्मकोड की मांग से ही संतुष्ट होंगे. कोई और नाम हमें स्वीकार्य नहीं है.

हालांकि, डॉ करमा उरांव ने कहा कि सरना धर्मकोड की मांग को लेकर 20 अक्टूबर को झारखंड में महारैली का आयोजन होगा. इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्मकोड से संबंधित प्रस्ताव पारित करे. अगर मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो विधानसभा का शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया जायेगा. बंधन तिग्गा ने कहा कि फरवरी 2021 में आदिवासी संसद आहूत की गयी है, जबकि 28 फरवरी को रांची में महारैली का आयोजन होगा.

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20 अक्टूबर की महारैली में 32 संगठन होंगे शामिल

डॉ करमा उरांव ने बताया कि 2011 की जनगणना में देश के कुल आदिवासियों में 79.39 लाख लोगों ने अन्य धर्म के कॉलम में अपना धर्म दर्ज किया. जबकि, 49.57 लाख लोगों ने सरना धर्म दर्ज किया है. इस तरह आदिवासी समुदाय में 62 प्रतिशत लोगों ने सरना धर्म पर आस्था जताते हुए अपनी मांगों को बताया है. 20 अक्टूबर की महारैली में राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी छात्र संघ, आदिवासी सेना, झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा सहित 32 संगठन शामिल होंगे.

आदिवासी विकास परिषद ने मांगा ‘आदिवासी धर्मकोड’

अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने आदिवासी धर्मकोड की मांग रखी है. परिषद की प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि आदिवासी पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने पुरखों के पदचिह्नों पर चलते हैं और कस्टमरी लॉ से गाइड होते हैं. अलग जीवनशैली की वजह से ही आदिवासी समाज को ब्रिटिश शासनकाल से आजादी के कुछ वर्षों बाद तक (1871 से लेकर 1951 तक) जनगणना सर्वेक्षण कार्य में स्पष्ट रूप से अलग कॉलम में रखा गया. गीताश्री उरांव ने कहा कि बहुत जल्द देशभर के आदिवासी संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जायेगा.

गीताश्री उरांव ने कहा कि जब तक आदिवासी समाज को उसका मान, सम्मान और अधिकार अलग धर्मकोड के रूप में नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष और आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा. गीताश्री उरांव के साथ प्रेसवार्ता में प्रदेश महासचिव सुशील उरांव प्रदेश सहालकार डॉ अभय सागर मिंज, कुंदरसी मुंडा, बचन उरांव, दुर्गा कच्छप, सहित अन्य मौजूद थे.

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