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#SarnaCode को जनगणना फॉर्म में शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों का महाधरना

Ranchi: 2021 के जनगणना फॉर्म में सरना धर्म कोड को लागू करवाने के लिए आदिवासी छात्र मोर्चा सहित विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने राजभवन के समक्ष एक दिवसीय महाधरना दिया.

गौरतलब है कि भारत में भी 1871 की पहली जनगणना में आदिवासियों को एक अलग धर्म कोड के रूप में दर्जा प्राप्त था जिसे1951 में समाप्त कर दिया गया.

मौके पर वक्ताओं ने 2021 की जनगणना में सरना कोड/धरमकोड को शामिल कराने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया. कहा कि आजादी के बाद से ही आदिवासियों ने अपने आप को ठगा हुआ महसूस करती आ रही है.

वर्तमान के केंद्र और राज्य सरकार को चेताया कि आदिवासियों के धार्मिक आस्था को मान्यता नहीं मिलना हम आदिवासियों के साथ अन्याय है.

वक्ताओं ने कहा कि इस अन्याय को हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे. 2021 की जनगणना में सरना धर्म कोड लागू करवा कर ही रहेंगे.

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अपना वादा पूरा करें दल

आदिवासी छात्र मोर्चा के अध्यक्ष अजय टोप्पो ने कहा कि झारखंड सरकार में शामिल राजनीतिक दलों ने अपने घोषणा पत्र में सरना धर्म कोड को सदन में पारित कर केंद्र भेजने की बात कही थी. दल अपनी बात को पूरा करें.

वहीं करमा कमल लिंडा ने कहा कि पूरे भारत के आदिवासी एक हैं और इस जनगणना में वह अपना अधिकार लेकर ही रहेंगे.

इस एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से आदिवासी छात्र मोर्चा, केंद्रीय सरना समिति, बेदिया समाज, झारखंड क्षेत्रीय पड़हा समिति, महानगर प्रार्थना सभा राजी पड़हा प्रार्थना सभा जिला समिति लोहरदगा सहित प्रतिनिधियों में संजय कुजूर, मनु तिग्गा, अमर तिर्की, सुनील मुंडा, सुनीता मुंडा, पार्वती कच्छप आदि मौजूद थे.

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