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ह्यूमन ट्रैफिकिंग : 5 साल में 743 गिरफ्तारियां, फिर भी नहीं रुका आदिवासियों लड़कियों को बाहर भेजने का सिलसिला

झारखंड में पिछले 5 साल में 743 मानव तस्कर गिरफ्तार,फिर भी मानव तस्करी पर नहीं लग रहा है लगाम.

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Ranchi: झारखंड में पिछले 5 साल के दौरान 743 ट्रैफिकिंग आरोपी यानी मानव तस्कर गिरफ्तार हुए. इसके बावजूद झारखंड में मानव तस्करी पर लगाम नहीं लगी है. बता दें कि राज्‍य के गठन हुए 18 से साल ज्यादा हो चुके हैं. रांची, खूंटी, गुमला सिमडेगा और पश्चिम सिंहभूम जिलों से बड़ी तादाद में आदिवासी लड़कियां और महिलाएं आज भी बाहर भेजी जा रही हैं. पिछले 5 साल के दौरान जहां मानव तस्करी के 855 मामले झारखंड में दर्ज हुए वहीं 1422 बच्चों का रेस्क्यू भी कराया गया. लेकिन मानव तस्करी झारखंड में रुकने का नाम नहीं ले रही है. पिछले 5 साल के दौरान गुमला सिमडेगा और खूंटी जिले में सबसे अधिक मानव तस्करी के मामले दर्ज किए गये हैं.

 हर साल 30 से 35 हजार युवक-युवतियों की होती है तस्करी 

जानकारी के मुताबिक 30 से 35 हजार युवक-युवतियों की तस्करी हर साला हो रही है. पुलिस की नजर में मानव तस्करी का मामला भले ही कम हुआ है, लेकिन  हकीकत में मानव तस्करी कम नहीं हुई है. अब मानव तस्करी से ज्यादा मामले नवजात की तस्करी के आ रहे हैं. पहले इसका केंद्र दिल्ली था, अब मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, राजस्थान व गुजरात भी ये अपराध हो रहा है.

 ट्रैफिकिंग के कहां कितन मामले दर्ज हुए

रांची 26, लोहरदगा 46 , गुमला 259, सिमडेगा 122, खूंटी 82, चाईबासा 55, सरायकेला 6, जमशेदपुर 11,6 पलामू 13 ,गढ़वा 0, लातेहार 48 , हजारीबाग 5, कोडरमा 0, गिरिडीह 17, चतरा 15, रामगढ़ 0, बोकारो 3, धनबाद 17, दुमका 26 ,गोड्डा 23, साहिबगंज 37 ,पाकुड़ 14, देवघर 2, जामताड़ा 11, रेल धनबाद 4, रेल जमशेदपुर 13 में पिछले 5 वर्ष के दौरान 855 मामले मानव तस्करी के दर्ज हुए.

ट्रैफिकिंग के आरोप में कहां कितने लोगों की हुई गिरफ्तारी 

रांची 15, लोहरदगा 43 , गुमला 92, सिमडेगा 105, खूंटी 70, चाईबासा 49 ,सरायकेला 10, जमशेदपुर 24, पलामू 24, गढ़वा 0, लातेहार 87 ,हजारीबाग 7, कोडरमा 0, गिरिडीह 20, चतरा 30, रामगढ़ 0, बोकारो 11, धनबाद 12 ,दुमका 18, गोड्डा 40, साहिबगंज 125 पाकुड़ 20 देवघर 1 , जामताड़ा 15 , रेल धनबाद 6, रेल जमशेदपुर 30 मैं पिछले 5 वर्ष के दौरान 743 मानव तस्करों की गिरफ्तारी हुई.

 गुमला, सिमडेगा और खूंटी में सबसे ज्यादा मामले  

पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार गुमला, सिमडेगा और खूंटी जिले में सबसे ज्यादा मानव तस्करी के मामले दर्ज हुए हैं. जहां गुमला में 259 और सिमडेगा में 122 तो वहीं खूंटी में 83 मानव तस्करी के मामले पिछले 5 वर्षों के दौरान दर्ज हुए हैं. जो कि झारखंड के अन्य जिलों की तुलना में सबसे अधिक है. हाल के दिनों में खूंटी, सिमडेगा, गुमला जैसे जिलों से बच्चे गायब हो गये थे. मामले की जब जांच की गयी तो पता चला कि प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई के सरंक्षण में बच्चों अपहरण किया गया है. मिली जानकारी के अनुसार पीएलएफआई और मानव तस्करों की मिलीभगत से झारखंड की बेटियों को बाहर भेजा जा रहा है. इसके बदले में पीएलएफआई को मानव तस्करों के द्वारा कमाई का हिस्‍सा दिया जा रहा है.

 बच्चों के पुनर्वास के लिए सरकार के वादे अधूरे

बाल श्रम और मानव तस्करी से मुक्त हुए बच्चों के पुनर्वास के लिए सरकार के वादे अभी तक झूठे साबित हुए हैं. कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग से बाल श्रम और मानव तस्करी से मुक्त हुए पीड़ित बच्चों के पुनर्वास के लिए 20 हजार देने का प्रावधान है. लेकिन रेस्क्यू किया गया बच्चे को अब तक इसका लाभ नहीं मिला है.मानव तस्करी का शिकार हुई लड़कियों के पुनर्वास की भी कोई व्यवस्था नहीं है. इनके लिए बनी तेजस्विनी योजना भी फाइलों में ही बंद है.

पीड़ितों के पुनर्वास की नहीं है व्यवस्था 

पुलिस के अनुसार स्वयं सेवी संस्थाएं जागरूकता व शेल्टर होम के रूप में ही काम कर रही है. उनका काम होर्डिंग तक ही सीमित है. मानव तस्करी के शिकार बच्चों की रेस्क्यू व मानव तस्करों को सजा दिलाने में ऐसी संस्थाएं रूचि नहीं लेती हैं. इसका फायदा मानव तस्कर उठा रहे हैं. मानव तस्करी के शिकार हुए लड़के और लड़कियों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं है. लड़कियों के लिए बनी तेजस्विनी योजना भी फाइलों में ही बंद है. मुक्त करायी गयी लड़कियों के स्किल डेवलपमेंट के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. कुछ लड़कियों का दाखिला कस्तूरबा विद्यालय में करवाया गया है.

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