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जनजातीय महोत्सव तो बहाना, ट्राइबल क्लास के भरोसे को साधने पर है निशाना

RAJESH TIWARI
Ranchi: झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है. यह समाज राजनीतिक दृष्टिकोण से भी काफी मजबूत माना जाता रहा है. अहम बात कि झारखंड की राजनीति भी आदिवासी केंद्रित रही है. क्योंकि राज्य की 81 विधानसभा सीटों में 28 सीटें जनजातियों के लिए सुरक्षित हैं जो सत्ता तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है. आदिवासी दिवस पर दो दिवसीय जनजातीय महोत्सव के जरिये हेमंत सोरेन ने अपनी इसी मंशा को फिर से अप्रत्यक्ष तौर पर स्थापित किया है. मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के खिलाफ जनजातीय समाज को अपने पक्ष में गोलबंद करने की मुहिम शुरू की है. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी सुरक्षित सीटों पर खराब प्रदर्शन के कारण ही भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा था. मात्र दो जनजाति सुरक्षित सीटों पर भाजपा काबिज हो सकी. ऐसे में कहा जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में झामुमो जनजातीय समाज का शत-प्रतिशत भरोसा हासिल करने की कोशिश में लग गया है.

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भाजपा की चाल पर झामुमो की नजर

कहा यह भी जा रहा है कि भाजपा की हर चाल पर झामुमो नजरें टिकाये हुए है. पांच जून को भाजपा ने जनजातीय गौरव सम्मेलन का आयोजन कर जनजातीय समाज को अपने पक्ष में करने की कवायद शुरू की. ठीक उसी तरह झामुमो ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय मूलवासी दिवस के मौके पर दो दिवसीय जनजातीय महोत्सव के आयोजन को भाजपा की राजनीतिक काट के तौर पर देखा जा रहा है.

आदिवासी वोट बैंक पर सबकी नजर

वर्ष 2024 में देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होना है. झारखंड में 14 लोकसभा सीटें और 81 विधानसभा सीटें हैं. इन सीटों में अधिकतर पर जीत तभी संभव है, जब आदिवासी वोटर भी बढ़चढ़कर किसी का साथ दें. विपक्ष औऱ सत्ताधारी दल अपने-अपने स्तर से आदिवासी समाज के बीच पकड़ मजबूत बनाने में जुट गये हैं.

Sanjeevani

द्रौपदी मुर्मू को वोट देकर झामुमो ने भी दिखा दिया आदिवासी प्रेम

पिछले दिनों हुए राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाकर आदिवासी समाज के प्रति अपनेपन का परिचय दिया. इसे आजादी के बाद केंद्र सरकार का सबसे बेहतर और ऐतिहासिक मास्टर प्लान बताया. झामुमो शुरूआत में द्रौपदी और दूसरे कैंडिडेट यशवंत सिन्हा के नाम पर उलझन में रहा. पर अंततः कांग्रेस और राजद की परवाह किये बगैर द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देकर कर आदिवासी समाज के प्रति अपनी मंशा जाहिर कर दी.

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