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रिम्स के 46 कोरोना कोविड मरीजों पर यूनानी दवाइयों का ट्रायल सफल, अब 100 मरीजों पर होगा रिसर्च

  • 110 दिनों तक रिम्स में चला ट्रायल, एलोपैथिक के साथ दी जा रही थीं यूनानी दवाइयां
  • अब रिम्स और आयुष मंत्रालय की टीम करेगी रिसर्च

Anita Gupta

Ranchi: सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन की ओर से रिम्स में 110 दिनों तक कोरोना मरीजों पर एलोपैथिक मेडिसिन के साथ यूनानी दवाइयों का चला ट्रायल सफल रहा. 110 दिनों के ट्रायल के दौरान यूनानी दवाओं के उपयोग से किसी भी मरीज में किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला.

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बल्कि देखा गया कि एलोपैथिक दवाओं के साथ यूनानी दवाओं के उपयोग से संक्रमित मरीज पहले की अपेक्षा जल्दी रिकवर हुए. पहले जहां मरीजों की नेगेटिव रिपोर्ट 14-15 दिनों के बाद आया करती थी, वे लोग 8-10 दिनों में ही रिकवर होने लगे.

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अब रिम्स और आयुष मंत्रालय की टीम अब 100 संक्रमितों पर करेगी ट्रायल

रिम्स में 46 संक्रमित मरीजों पर सफल ट्रायल के बाद रिम्स और आयुष मंत्रालय की टीम अब 100 संक्रमित मरीजों पर ट्रायल करेगी, जिसकी अनुमति सेंटल काउंसिल फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन, दिल्ली ने दे दी है.

ये टीमें कर रही थी रिसर्च

रिम्स के कार्डियोथोरेसिक सर्जन सह सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ अंशुल कुमार के नेतृत्व में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ मोहम्मद सैफ, डॉ जेयुएल हक (एमडी ऑफ यूनानी), डॉ गुलाम रंबानी (मेडिकल ऑफिसर ऑफ सीएससी कर्रा) ने 12 जनवरी से 2 मई 2021 तक कोरोना के मरीजों पर ट्रायल किया.

डॉ अंशुल कुमार

इसकी अनुमति सीसीआरयूएम दिल्ली ने नवंबर 2020 में दे दी थी. इस रिसर्च की मांग डॉ अंशुल कुमार ने आयुष मंत्रालय से की थी.

डॉ मोहम्मद सैफ

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किन संक्रमित मरीजों पर किया गया रिसर्च

110 दिनों के ट्रायल के दौरान डॉ अंशुल एंड टीम ने कोविड के एसिंपटोमेटिक मरीज से लेकर ऑक्सीजन सपोर्टेड 46 मरीजों पर यूनानी दवाओं का ट्रॉयल किया. इनमे 36 माइल्ड पेशेंट के साथ 10 ऑक्सीजन सपोर्टेड मरीज भी शामिल थे.

कौन-कौन सी दी जा रही दवाइयां

1. तिरयाक वबाई
2. अर्क अजीब
3. हब्बे ए लोबान

मरीजों को कौन सी दवा कैसे पहुंचा रही थी लाभ

1.तिरयाक वबाई – तिरयाक वबाई इम्फ्लेमेट्री, इम्यूनोमोडू मॉड्यूलेट्री री और एंटी- ऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है, जो शरीर की बीमारियों से लड़ता है और बॉडी में एंटी सेल बनाता है.

2. अर्क अजीब – एंटीवायरल,एंटी-एलर्जी, एंटी अस्थमा,एंटी-इंफ्लेमेटरी और श्वसन रोग से ग्रसित मरीजों को दिन में 2-5 बूंद की खुराक दी जा रही थी.

3. हब्बे ए लोबान – हब्बे ए लोबान एंटी -इंफ्लेमेटरी, कफ निस्सारक औषधि है. इसका उपयोग सूखी खांसी, निमोनिया जैसे लक्षणों के निवारण के लिए किया जाता है.

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इन मरीजों पर यूनानी दवाओं का किया गया रिसर्च

क्या कहा मरीजों ने

केस-1

जब रिम्स में भर्ती हुआ तो ऑक्सीजन लेबल 80 पर था, लेकिन एलोपैथिक दवाओं के साथ यूनानी दवाओं के सेवन से जल्द आराम मिला. 2 मार्च को मैं रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुआ. इस दौरान मेरा ऑक्सीजन लेबल 80 था. मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. मेरे फेफड़े में भी संक्रमण पहुंच गया था. ऐसे में मेरी स्थिति काफी गंभीर थी.

मैं बहुत डरा हुआ था की मैं बच पाऊंगा या नहीं. लेकिन चिकित्सकों के प्रयास से मैं जल्द ही ठीक हो गया. मुझे एलोपैथिक दवाओं के साथ डॉ जेया उल हक तीन तरह की दवाएं रोजाना देते थे, जिससे काफी आराम मिला और अगले 10 दिनों में ही ठीक हो गया. ठीक होने के बाद मुझे पता चला कि वो तीनों दवाएं यूनानी दवाएं थी.

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  • शिवा महतो, खेलगांव

केस-2

11 मार्च को मेरे साथ मेरी पत्नी और बेटे की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. उस समय मुझे छोड़ कर मेरी पत्नी और बेटे को काफी तेज बुखार था. ऐसी स्थिति में बहुत मुश्किल से रात 9:30बजे रिम्स पहुंचे और भर्ती हुए.

भर्ती होने 8 दिन बाद हम तीनों की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई. ऐसा शायद इसलिए हुआ,क्योंकि की हम लोगों को एलोपैथिक के साथ यूनानी दवाएं भी दी जा रही थी,जो काफी फायदेमंद रही.

  • उषा प्रसाद गुप्ता, बूटी मोड़, रांची

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