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पहाड़ों की रानी नेतरहाट की हसीन वादियों में ट्रैकिंग का है अलग रोमांच…

एडवेंचर में इंटरेस्ट लेनेवाले लोगों ने दो दिनों तक लिया ट्रैकिंग का आनंद

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Praveen munda

Ranchi : अगर आपको प्रकृति से प्यार है. पहाड़ी रास्तों पर चलना पसंद है. ऊंचाई से डर नहीं लगता, जंगलों में भटकना अच्छा लगता है और इन सबसे बढ़कर…जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से हटकर कुछ करना पसंद है, तो फिर ट्रैकिंग आप जैसों के लिए है. इधर, 21 नवंबर को जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नेतरहाट में पर्यटन की संभावनाओं पर बात कर रहे थे उससे कुछ दिन पहले कुछ साहसी लोगों नेतरहाट की उन्हीं वादियों में ऐसे ही एक ट्रैकिंग अभियान में भाग लिया.

रॉक एंड रोप संस्था ने किया आयोजन

रॉक एंड रोप के तत्वावधान में नेतरहाट की पहाड़ियों में दो दिनों की ट्रैकिंग में रांची से 20 लोगों की टीम थी. इसमें संस्था के रवि राज, संतोष सिन्हा, ट्रैकिंग एक्सपर्ट रितेश ठाकुर, सर्वेश कुमार और खुशवंत सिंह जैसे लोग थे. ये पहले भी कई अभियानों में हिस्सा ले चुके थे. इसके अलावा कई ऐसे लोग थे जिन्होंने पहली बार इस तरह की ट्रिप में हिस्सा लिया था. रांची से नेतरहाट पहुंचने के बाद बेस कैंप पहुंचने के बाद सभी लोगों को ट्रैकिंग के नियम समझाये गए.

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मैग्नोलिया प्वाइंट से शुरू हुई ट्रैकिंग

इसके बाद स्टार्टिंग प्वाइंट, जो मैग्नोलिया प्वाइंट था से ट्रैकिंग शुरू हुई. सभी 20 लोगों ने हाथ में छड़ी लेकर पहाड़ी वादियों पर चलना शुरू किया. जाड़े की गुनगुनी धूप में चलते हुए दल ने पहले तीन घंटे में दो पहाड़ियों को पार किया. इस दौरान उन्होंने साल के जंगल, खूबसूरत जंगली झाड़ियां और पहाड़ी झरनों को पार किया. तीन घंटे के बाद पहली बार दल को थोड़ी समतल जमीन मिली.
वहां पर धान के खेत थे. थोड़ी-थोड़ी देर आराम करते हुए शाम तक यह दल अपने कैंप तक पहुंचा. कैंप में टेंट की व्यवस्था थी. इस दौरान जंगल के बीच कैंप फायर के बीच सभी सदस्यों ने एक दूसरे को अपने अनुभवों को साझा किया. वहीं रात का भोजन बनाया गया और फिर सभी टेंट में सो गए.

दूसरे दिन सभी पूर्व निर्धारित ट्रैक से होते हुए बेस कैंप पर वापस लौटे. वापस लौटने पर संगीता सहित कई प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का सबसे अनूठा अनुभव बताया. प्रतिभागियों ने बताया कि प्रकृति को महसूस करने का इससे बेहतर कोई दूसरा जरिया नहीं है.

हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व गोवा सहित अन्य राज्यों में लोग जाते हैं ट्रैकिंग के लिए

बता दें कि झारखंड से हर साल बड़ी संख्या में लोग ट्रैकिंग अभियान में भाग लेने के लिए हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गोवा सहित अन्य राज्यों का रुख करते हैं. कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हैं जो इस तरह के अभियानों को आयोजित करती है. देशभर में कोविड की वजह से ऐसे आयोजन पिछले सात आठ महीने से बंद थे.

अब रॉक एंड रोप जैसी संस्था ने एक बार इस पर पहल की और झारखंड में एक नयी शुरुआत की. संस्था के रवि राज सहित अन्य सदस्य बताते हैं कि राज्य में खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों की भरमार है. जहां इस तरह की गतिविधियों को आयोजित की जा सकती हैं. पिछले कुछ साल से वे लगातार राज्य में ट्रैकिंग सहित एडवेंचर स्पोर्ट्स की गतिविधियों को आयोजित कर रहे हैं अगर सरकार इस पर पहल करे तो ऐसी गतिविधियों को और बढ़ावा मिलेगा.

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