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झारखंड में सालों से पड़ी है संचरण लाइन योजनाएं, निगम को झेलना पड़ रहा नुकसान

अपनी संचरण लाइन नहीं होने से हर महीने जेबीवीएनएल को 17 करोड़ करना पड़ता है अतिरिक्त भुगतान

Ranchi: झारखंड में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिये समय समय पर निर्देश जारी होते रहते हैं. राज्य में कई ऐसे सुदूर इलाके हैं, जहां अपना ट्रांसमिशन लाइन नहीं है. इन इलाकों में अपना ट्रांसमिशन लाइन बन जाने पर बिजली आपूर्ति बहाल हो सकती है. ऊर्जा विभाग की मानें तो राज्य में विश्व बैंक की कई योजनाएं हैं जो अब तक शुरू नहीं हुई है. सभी योजनाएं संचरण से जुड़ी हैं. वहीं इन योजनाओं की स्वीकृति मिलें भी आठ से दस साल बीत चुके हैं. इसमें 1195 करोड़ की लागत से 25 ग्रिड सब स्टेशन और लाइन बनाने की योजना थी. लेकिन योजना पर काम शुरू नहीं हुआ. अन्य योजना के तहत 2400 करोड़ का विश्व बैंक से कर्ज लेकर 60 संचरण लाइन बनाने का निर्णय लिया. इस योजना पर भी काम शुरू नहीं किया गया.

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पीपीपी मोड में बनने थे 59 ग्रिड सब स्टेशन: पीपीपी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 59 ग्रिड सब स्टेशन बनने थे. योजना साल 2008 की थी. उर्जा संचरण निगम ने इस पर काम शुरू किया. जिसके बाद प्रस्ताव नियामक आयोग भेजा गया. नियामक आयोग ने उर्जा संचरण निगम से कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा. इसके बाद से मामला उर्जा संचरण निगम में पड़ा है. निगम ने आयोग को स्पष्टीकरण नहीं दिया. योजना लगभग चार करोड़ की थी. योजना के पूरा होने से एक लंबा क्षेत्र में संचरण लाइन का निमार्ण संभव होता.

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17 करोड़ अतिरिक्त भुगतान: राज्य में अपना ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने से जेबीवीएनएल को नुकसान झेलना पडता है. ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने से एनटीपीसी और पीजीसीआइएल के लाइन से राज्य में बिजली संचरण किया जाता है. इसके लिये जेबीवीएनएल हर महीने इन कंपनियों को 17 करोड़ का भुगतान करती है. वहीं, निगम की मानें तो निगम सालाना 6000 करोड़ के नुकसान में चल रही है. जो राजस्व से होने वाला नुकसान है.

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