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झारखंड में तबादलेः स्वागत का गुलदस्ता भी नहीं सूखता कि आ जाती है विदाई की बारी

Akshay Kumar Jha

Ranchi : झारखंड की हेमंत सरकार में दो खबरें काफी चर्चा बटोर रही हैं. पहली सरकार गिराने की साजिश में एफआइआर और दूसरी अधिकारियों का तबादला. कहनेवाले कहते हैं कि सरकार में कुछ हो न हो सरकार गिराने और तबादलों का काम जरूर हो रहा है. हाल में हुए कुछ तबादलों की बात करें तो चौंकानेवाले तथ्य सामने आये हैं. कुछ मामलों में हालात ऐसे हो गये हैं कि स्वागत के लिए दिये गये गुलदस्ते से ही विदाई का भी काम लेने पर विचार हो रहा है. ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं कि महज आठ दिनों में एक आइएएस अधिकारी का तबादला हो जाता है. जाहिर सी बात है इतनी जल्दी तबादला होने से असर सीधा विभाग और उसके काम पर पड़ता है. कई बार तो ऐसा भी देखा जाता है कि अधिकारियों का तबादला होने के बाद भी तबादला रोकने के लिए अधिसूचना जारी होती है. कुछ दिनों के बाद फिर से उनका तबादला कर दिया जाता है. यहां आइएएस अफसरों के कुछ केस दिये जा रहे हैं. लेकिन ऐसा विभिन्न कैडर के अफसरों के साथ भी हो रहा है.

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तबादले के कुछ उदाहरण

आकांक्षा रंजनः 18 अक्टूबर को सरकार की तरफ से अधिसूचना जारी होती है. 2013 बैच की आइएएस अधिकारी आकांक्षा रंजना का तबादला वाणिज्य-कर आयुक्त से झारक्राफ्ट के एमडी के तौर पर कर दिया जाता है. महज सात दिनों के अंतराल में सरकार की तरफ से दोबारा अधिसूचना जारी होती है. इस बार आकांक्षा रंजन का तबादला खनन विभाग में बतौर एमडी झारखंड अन्वेषण एवं खनन निगम लिमिटेड कर दिया जाता है. कहने वाले कह रहे हैं कि अभी तो झारखंडक्राफ्ट के कर्मियों ने जो गुलदस्ता उन्हें स्वागत के वक्त दिया था, उसके फूल भी पूरी तरह से नहीं मुरझाये हैं और एमडी साहिबा का तबादला हो गया.

केके सोनः काफी दिनों तक भू राजस्व विभाग के सचिव के पद बने रहने के बाद 1998 बैच के आइएएस अधिकारी का तबादला 22 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग के सचिव के पद पर कर दिया जाता है. लेकिन महज तीन महीने के बाद ही उनका तबादला परिवहन विभाग में कर दिया जाता है. परविहन विभाग में वो महज दो महीने ही अपनी सेवा दे पाये. 3 अगस्त को उन्हें अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का सचिव बना दिया गया. ऐसी भी बात सामने आयी कि सरकार उन्हें वहां फिट नहीं मान रही थी. लेकिन वापस महज दो महीने में फिर से एक बार उन्हें परिवहन विभाग के सचिव का भी पदभार दे दिया जाता है. इतना ही नहीं 25 अक्टूबर को उन्हें परिवहन आयुक्त का भी जिम्मा दे दिया जाता है.

के श्रीनिवासनः तीन अगस्त को केके सोन के साथ के आइएएस अधिकारी के श्रीनिवासन को खान विभाग से परिवहन विभाग का सचिव बना कर भेज दिया गया. लेकिन 18 अक्टूर को महज एक महीने में ही उन्हें निदेशक एटीआइ बना कर भेज दिया गया.

उमाशंकर सिंहः 2009 बैच के आइएएस अधिकारी उमाशंकर सिंह 14 जुलाई 2020 को धनबाद के डीसी बनाये गये. लेकिन एक साल तक भी वहां टिक नहीं पाये. 5 जुलाई को उन्हें एनएचआरएम का अभियान निदेशक बना कर वापस रांची भेज दिया गया. इस पद पर भी वो महज दो महीने ही टिक पाये. 18 अक्टूबर को उनका तबादला भू-अर्जन, भू-अभिलेख एवं परिमाप विभाग में बतौर निदेशक कर दिया गया.

वरुण रंजनः 2014 बैच के आइएएस वरुण रंजन को 21 अक्टूबर 2019 को साहिबगंज जिले का डीसी बनाया गया था. वह इस पद पर एक साल भी बने नहीं रह पाये. 25 जुलाई 2020 को उन्हें हॉर्टिकल्चर का निदेशक बनाया गया. वहां वह महज 9 महीने ही रह सके. उसके बाद उन्हें 25 अप्रैल 2021 को मनरेगा आयुक्त बना दिया गया. फिर 3 महीने बाद 6 जुलाई 2021 को उन्हें पाकुड़ का डीसी बना कर भेजा गया.

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