JharkhandLead NewsRanchi

होल्डिंग टैक्स में बढ़ोतरी से व्यापारी परेशान, लोगों को सता रही चिंता

Ranchi : 2017 में वह जिस एरिया में व्यापारी अपना कारोबार कर रहे थे वहां का टैक्स 50 हजार रुपये जमा कराते थे. टैक्स बढ़ोतरी के बाद उन्होंने ढाई लाख रुपये जमा कराना शुरू किया. अब होल्डिंग टैक्स की नयी दर लागू होने के बाद जब असेस्मेंट कराया तो उसी जगह के लिए सवा छह लाख रुपये जमा करने को कहा गया. जिससे समझा जा सकता है कि होल्डिंग टैक्स में बढ़ोतरी से शहर के व्यापारी किस तरह परेशान हैं. कई दुकानदार तो अब बढ़े हुए टैक्स के कारण अपना कारोबार समेटने का मन बना रहे हैं. वहीं आम पब्लिक भी टैक्स के एक्सट्रा बोझ को लेकर चिंतित है.

बताते चलें कि झारखंड सरकार ने होल्डिंग टैक्स नियमावली में बदलाव करते हुए इसमें भारी बढ़ोतरी कर दी है. वहीं सर्किल रेट के अनुसार टैक्स वसूलने का आदेश भी जारी कर दिया गया है.

इसे भी पढ़ें:CM हेमंत लीज प्रकरण और शेल कंपनी मामले पर 19 मई को होगी सुनवाई

ram janam hospital
Catalyst IAS

टैक्स को लेकर कंफ्यूजन में चेंबर

The Royal’s
Pitambara
Pushpanjali
Sanjeevani

होल्डिंग टैक्स में बढ़ोतरी को लेकर फेडरेशन आफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एफजेसीसीआइ) भी कंफ्यूजन में है. इस मामले में चेंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा का कहना है कि टैक्स में बढ़ोतरी तो हुई है. अब तक यह क्लियर नहीं है कि टैक्स का बोझ कितना बढ़ेगा.

जब तक निगम की ओर से स्पष्ट नहीं बताया जाता कि टैक्स किस आधार पर और कितना देना होगा कुछ भी बता पाना मुश्किल है. इसे लेकर हम लोगों ने डिप्टी मेयर से भी मुलाकात की है और इस पर पुनः विचार करने की मांग की है.

इसे भी पढ़ें:वजन कम कराने के लिए एक्ट्रेस चेतना राज ने कराई प्लास्टिक सर्जरी, 21 की उम्र में मौत, पेरेंट्स ने डॉक्टर्स पर लगाया लापरवाही का आरोप

सुविधाएं देने में निगम फिसड्डी

लोगों से होल्डिंग टैक्स के अलावा पानी और कचरा उठाने का भी चार्ज निगम वसूलता है. लेकिन सफाई की स्थिति पूरे शहर में खराब है. वहीं गार्बेज कलेक्शन भी प्रॉपर तरीके से नहीं होता. ऐसे में लोगों का सवाल यह है कि क्या गारंटी है कि बढ़ा हुआ होल्डिंग टैक्स वसूलने के बाद शहर में व्यवस्था बदलेगी और बेसिक सुविधाओं में सुधार होगा.

ढाई गुना तक की हुई बढ़ोतरी

नगर निगम ने 6 साल पहले होल्डिंग टैक्स में बढ़ोतरी की थी. तब पांच गुना से अधिक टैक्स बढ़ाया गया था. जिससे शहर में लोगों पर अचानक से बोझ बढ़ गया था. सरकार ने इस बार सभी स्ट्रक्चर को अलग-अलग कैटेगरी में बांट दिया है. जिसमें रेसीडेंशियल, पार्सियल रेसीडेंशियल, कामर्शियल एरिया होगा. इसके अलावा राज्य सरकार ने होटल, बार, क्लब, जिम, मैरेज हॉल से तीन गुना अधिक टैक्स लेने का निर्णय लिया है.

जबकि दुकान, शोरूम, मॉल, सिनेमा हाल, रेस्टोरेंट और गेस्ट हाउस से 2.5 गुना टैक्स की वसूली होगी. पेट्रोल पंप और अन्य कामर्शियल एरिया में जहां भूमिगत क्षेत्र का यूज हो रहा है वहां भूमिगत क्षेत्रफल को कारपेट एरिया में जोड़ा जायेगा.

इसे भी पढ़ें:EX MLA ताला मरांडी और EX MLC प्रवीण सिंह की BJP में वापसी, दीपक प्रकाश ने जतायी पार्टी के मजबूत होने की उम्मीद

डिप्टी मेयर ने भी उठायी आवाज

झारखंड सरकार के होल्डिंग टैक्स में बढ़ोतरी को डिप्टी मेयर ने तुगलकी फरमान बताया है. उन्होंने सरकार से इस पर अविलंब रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि 2016 में ही होल्डिंग टैक्स में भारी बढ़ोतरी की गयी थी. उसके बाद बढ़ी हुई दर से सर्किल रेट के आधार पर होल्डिंग टैक्स की वसूली शुरू कर दी गयी है. यह किसी भी तरीके से सही नहीं है. केवल आवासीय भवनों का टैक्स 15-25 प्रतिशत तक बढ़ जायेगा. वहीं व्यावसायिक भवनों का टैक्स तो तेजी से बढ़ जायेगा. इससे शहर के दो लाख लोग प्रभावित होंगे.

वहीं सर्किल रेट के आधार पर होल्डिंग टैक्स लिये जाने से लोगों पर बोझ बढ़ जायेगा. साथ ही उन्होंने माना कि साफ-सफाई के अलावा हम शहर के लोगों को बेहतर सेवा नहीं दे पा रहे हैं तो टैक्स में बढ़ोतरी करना कहीं न कहीं जनता के लिए अव्यावहारिक है.

पार्षदों ने भी खोला मोर्चा

पार्षद भी होल्डिंग टैक्स के विरोध में हैं. उन्होंने भी मांग की है कि इस पर चर्चा करने के बाद इसे लागू किया जाये. चूंकि लोगों से टैक्स तो वसूला जा रहा है, लेकिन उन्हें सफाई से लेकर अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. ऐसे में टैक्स को बढ़ाया जाना कहीं से भी सही नहीं है.

वार्ड 26 के पार्षद अरुण कुमार झा का कहना है कि नगर निगम बोर्ड की अनुमति के बिना मनमाने ढंग से होल्डिंग टैक्स बढ़ा दिया गया है. यह सरकार का शहरवासियों के साथ धोखा है. इस पर अविलंब रोक लगाने की जरूरत है.
वार्ड 25 के पार्षद अर्जुन राम इस टैक्स बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार मनमानी कर रही है.

पहले इसे बोर्ड में पार्षदों से पास कराना था. इसके बाद सरकार को विचार विमर्श करना चाहिए था. इस पर नगर विकास को भी सोचने की जरूरत है.

इसे भी पढ़ें:कर्नाटक में छात्रों को ‘एयरगन ट्रेनिंग’ देने पर मचा बवाल, बजरंग दल ने दी सफ़ाई

Related Articles

Back to top button