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ट्रेड यूनियनों की हड़ताल में पहली बार किसान भी होंगे शामिल

8-9 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल

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  • राज्य में लगभग 2 लाख किसान दे रहे समर्थन
  • 8-9 जनवरी को गांव रहेंगे बंद

Ranchi:  ट्रेड यूनियनों की ओर से 8-9 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल आयोजित की जा रही है. ये पहला अवसर है जब ट्रेड यूनियनों की हड़ताल में किसान शामिल  हो रहे हैं. संगठित-असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी और मजदूर 12 सूत्री मांग को लेकर हड़ताल करेंगे. किसान तीन मांगों को लेकर इस हड़ताल में शामिल होंगे. देश  भर में इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है. यूनियनों के साथ किसान संघों की भी रणनीति तैयार हो चुकी है. सरकार के लगातार मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल की जा रही है.

गांव में भी कामकाज रहेंगे बंद

देशभर के 203 किसान संघों को मिलाकर किसान समन्वय समीति का गठन किया गया है. समन्वय समीति की ओर से देश भर के गांवों को 8 और 9 जनवरी को बंद रखने कहा गया है. इसका अर्थ ये है कि गांव में भी इन दोनों दिन किसी तरह के काम नहीं होंगे. समन्वय समीति में स्वामी अग्निवेश , मेघा पाटकर, योगेंद्र यादव जैसे किसान नेता हैं. जो किसानों की आत्महत्या बंद करने, उपज का डेढ़ गुणा भुगतान किसानों को मिलने, ऋण माफी की मांग को लेकर गांव बंद करेंगे. दो दिनों में किसान रेलवे, राष्ट्रीय और राज्य मार्ग को बाधित करेंगे.

राज्य के दो लाख किसान दे रहे समर्थन

सीटू के राज्य महासचिव प्रकाश विप्लव ने जानकारी दी कि ट्रेड यूनियनों की हड़ताल में राज्यभर के दो लाख किसान समर्थन दे रहे हैं. जो राज्य के विभिन्न हिस्सों में रेलवे समेत प्रमुख मार्गों को बंद करेंगे. कहा कि  देश की वर्तमान स्थिति बदलने में आंदोलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. आनेवाले चुनाव में इसका व्यापक असर दिखेगा. वर्तमान समय में देश को नेता की नहीं सही नीतियों की जरूरत है.

हर वर्ग के मजदूर हो रहे शामिल

हड़ताल में हर वर्ग के मजदूर शामिल  हो रहे हैं. राज्य से लगभग एक करोड़ लोग हड़ताल पर रहेंगे. जिसमें तांबा उद्योग, लौ अयस्क,  चूना-पत्थर, डाक, दूरसंचार, बैंक, बीमा, ग्रामीण डाक, मनरेगा कर्मी, मिड डे मील, चावल, दाल, तेल मिलों में काम करने वाले मजदूर और कर्मचारी समेत अन्य क्षेत्रों में कार्यरत मजदूर और कर्मचारी भी शामिल होंगे.

2018 में हुए प्रमुख किसान आंदोलनः

  •  9 अगस्त को देश  भर के 400 ब्लॉक में किसानों ने सत्याग्रह किया था. इसमें मजदूर भी शामिल थे.
  •  5 सितंबर को दिल्ली में किसानों ने संघर्ष रैली निकाली, जिसमें लगभग तीन लाख किसान शामिल हुए.
  •  30 नवंबर और एक दिसंबर को लगभग साढ़े तीन लाख किसानों ने संसद मार्च किया था. कई स्थानों से पदयात्रा कर इस दौरान किसान राजमार्ग पहुंचे थे.

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