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झारखंड में बड़े नशा कारोबारी करवा रहे हैं अफीम की खेती

टीपीसी, नक्सली और पीएलएफआई संगठन की सांठगांठ से हो रही है खेती

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Ranchi: झारखंड में नशा के बड़े कारोबारी कई जिलों में अफीम की खेती करवा रहे हैं. अफीम के बड़े कारोबारी झारखंड के टीपीसी, नक्सली और पीएलएफआई संगठन के साथ सांठगांठ कर अफीम की खेती करा रहे हैं. ये राज्‍य के चतरा, हजारीबाग, खूंटी, गढ़वा, पलामू, लातेहार, सिमडेगा और सरायकेला सहित कई जिलों में अफीम की खेती करवा रहे हैं. हाल के दिनों में इसमें और तेजी आयी है. अफीम की खेती को कहीं-न-कहीं से बड़े माफिया का संरक्षण प्राप्त है. एक तरफ जहां पुलिस छोटे-छोटे अफीम तस्कर को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस अफीम की खेती के पीछे शामिल बड़े माफियाओं पर कार्रवाई करने की हिमाकत नहीं कर पा रही है. इसके कारण झारखंड के कई जिलों में धड़ल्ले से अफीम की खेती हो रही है. पहले तो अफीम की खेती वैसी जगहों में होती थी, जो सुनसान होती है. पहाड़ों से घिरे ऐसे अधिकतर गांवों में लोग धड़ल्ले से अफीम की खेती कर रहे हैं.

अफीम की खेती के लिए बाहर से मिलता है पैसा

झारखंड के खूंटी, पलामू, लातेहार, चतरा, सिमडेगा समेत कई जिलों में अफीम की खेती के लिए बाहरी पैसों के इस्तेमाल की जानकारी राज्य सरकार की खुफिया एजेंसियों तक पहुंची है. सितंबर में अफीम की खेती की शुरुआत होती है. मिली जानकारी के अनुसार इसी दौरान खेती के लिए खेत मालिकों से ले लिया जाता है और अफीम की खेती का जिम्मा लेनेवालों को राशि की पहली किस्त दी जाती है. फसल तैयार होने के दौरान दूसरी और फसल पूरी तरह तैयार होने पर राशि की तीसरी किस्त दी जाती है. तीन महीने में इन पौधों में फल-फूल निकल आते हैं. इसके बाद उन फलों में चीरा लगाया जाता है. फिर उससे निकले गाढ़े रस को एकत्र कर अफीम तैयार की जाती है.

क्या कहते हैं आंकड़े

झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018 में अब तक 2160.5 एकड़, 2017 में 2676.5 एकड़, 2016 में 259.19 एकड़, 2015 में 516.69 एकड़, 2014 में 81.26 एकड़, 2013 में 247.53 एकड़, 2012 में 66.6 एकड़ व 2011 में 26.85 एकड़ जमीन से अफीम नष्ट करने की कार्रवाई की गयी है. नारकोटिक्स एक्ट के तहत अब तक 49 केस दर्ज किये गये हैं, 47 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. साल 2017 में झारखंड पुलिस ने रिकॉर्ड 186 केस दर्ज किये थे, जिसमें 165 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. स्पीडी ट्रायल के जरिये प्रतापपुर, लावालौंग व इटखोरी थाने में दर्ज कांड में आरोपियों को सात से 12 साल तक की सजा भी हुई है.

कई राज्यों के अफीम तस्कर हुए गिरफ्तार

झारखंड के अलग-अलग इलाकों से यूपी, राजस्थान और पंजाब के तस्करों की गिरफ्तारी भी हुई है. पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में सक्रिय माओवादी, टीपीसी और पीएलएफआई जैसे संगठन भी अफीम तस्करी से जुड़े रहे हैं. इन सभी संगठनों की सांठगांठ से बड़े माफिया अफीम की खेती कर रहे हैं.

इन इलाकों में होती है अफीम की खेती

खूंटी: मुरहू, खूंटी क्षेत्र, अड़की, सायको, बंदगांव सहित कई अन्य इलाके

सरायकेलाॉ-खरसावां : चौका थाना क्षेत्र

गुमला : कामडारा थाना क्षेत्र

लातेहार : बालूमाथ, हेरहंज व चंदवा थाना क्षेत्र

चतरा : लावालौंग, सदर, प्रतापपुर, राजपुर, कुंदा, विशिष्टनगर

पलामू : पांकी, तरहसी, मनातू

गढ़वा : खरौंदी

हजारीबाग : तातुहरिया, चौपारण

गिरिडीह : पीरटांड़, गनवा, डुमरी, लोकनयानपुर, तिसरी

देवघर : पालाजोरी

दुमका : रामगढ़, शिकारीपाड़ा, रनेश्वर, मसलिया

गोड्डा : माहेरवान

पाकुड़ : हिरणपुर

जामताड़ा : नाला, कुंडीहाट

साहेबगंज : बरहेट, तालीहारी

झारखंड से बाहर भेजी जाती है अफीम

  • हाल के दिनों हुए कुछ लोगों की गिरफ्तारी से पता चला है कि झारखंड से अफीम बाहर के राज्यों में भी भेजी जाती है.
  • 2 जुलाई 2018 को तमाड़ पुलिस ने लालपुर निवासी बबलू लोहरा, जितेंद्र कुमार सोनी और कोकर निवासी आशीष रंजन को गिरफ्तार किया था. ये अफीम का डोडा लेकर भुवनेश्वर जा रहे थे.
  • 2 जुलाई को रनिया पुलिस ने अफीम के साथ सिलवंती कोंगाड़ी, एब्रेसियास कोंगाड़ी समेत सात तस्करों को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार आरोपियों ने तस्करी में पीएलफआई उग्रवादियों के शामिल होने की बात कबूली थी.
  • 21 दिसंबर 2017 को रामगढ़ में पश्चिम बंगाल के तस्कर मो करीमुद्दीन शेख को अफीम देने आये चतरा के तस्कर विशाल और विकास को बस स्टैंड से गिरफ्तार किया गया था.
  • 19 दिसंबर 2017 को हजारीबाग के मुफस्सिल  इलाके से अफीम के साथ यूपी बदायूं के गौरव सिंह, रवि हसन व हजारीबाग के आशीष और राजेश वर्मा को गिरफ्तार किया गया था.
  • 16 जनवरी 2018 को राजस्थान के अफीम तस्करों को चतरा पुलस ने गिरफ्तार किया था.

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