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कोल कारोबार में TPC कनेक्शनः HC का जांच कमेटी बनाने का निर्देश जबकि CM की अनुमति के लिए 2.5 साल से लंबित है SIT का प्रस्ताव

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  • सवालः क्या HC निर्देश को भी दरकिनार करेगी सरकार ?

Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट में शुक्रवार को कोयला खनन और ट्रांसपोर्टिंग में नक्सलियों द्वारा लेवी वसूली को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बीवी मंगलमूर्ति की खंडपीठ में सुनवाई करते हुए सीसीएल-बीसीसीएल के खदानों से कोयला के ट्रांसपोर्टिंग में नक्सलियों के लेवी वसूली किए जाने के मामले को गंभीरता से लिया. सभी पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार को उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर इन गतिविधियों में कहीं भी पुलिस शामिल है तो, उसे बंद कराया जाए. कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब सीधी ऊंगली सरकार पर उठ रही है. क्योंकि ढाई साल से मामले को लेकर एसआईटी बनाने का प्रस्ताव सीएम की अनुमति के लिए लटका हुआ है. इतने हाई प्रोफाइल मामले को लेकर सीएम की अनदेखी समझ से परे है. लेकिन, इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं.

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हाईकोर्ट के निर्देश से अब कैसे बचेगी सरकार ?

टंडवा में लेवी वसूली मामले को देखा जाए, तो साफ जाहिर है कि सरकार पूरे मामले की जांच से बचती रही है. ऐसा नहीं है कि एसपी, डीआईजी, आईजी, एडीजी, डीजीपी और गृह विभाग के हवाले से एसआईटी का गठन नहीं हो सकता है. अक्सर देखा जाता है कि संगीन मामलों में अधिकारी अपने स्तर से एसआईटी का गठन करते हैं, और जांच होती है. लेकिन इस मामले में देखा जाता रहा है कि हर बार जांच समिति बनाने को लेकर अधिकारी अपने सीनियर अधिकारी को समिति बनाने का प्रस्ताव भेजते हैं. प्रस्ताव एसपी लेवल से होते हुए अब सीएम की अनुमति के लिए ढाई साल से धूल फांक रहा है.
अनुमति ना मिलने की वजह से किसी तरह की कोई समिति फिलवक्त नहीं बनी है. जबकि एनआईए ने मामले में कार्रवाई करते हुए कई छापेमारी की और कई गिरफ्तारियां हुईं. ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार अब कैसे बचेगी. कोर्ट ने मामले को लेकर एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्देश सरकार को दिया है.

जानें कब और कौन करता रहा जांच  की वकालत

30 सितंबर 2015: पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित तत्कालीन आईजी मुख्यालय आशीष बत्रा ने गृह विभाग को एक पत्र लिखा. जिसमें उन्होंने लिखा कि लोडिंग के नाम पर डीओ होल्डर, ट्रांसपोर्टर, हाईवा आदि से मजदूरों के नाम पर वसूली की जाती है. यही अवैध वसूली का जरिया है. चतरा में स्थापित सीसीएल के सभी प्रोजेक्ट पर टीपीसी के उग्रवादियों का वर्चस्व है. उनके पत्र में इस बात का भी जिक्र था कि 25 अगस्त 2015 को पुलिस मुख्यालय के स्तर से एसआईटी गठन का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है.

21 दिसंबर 2015: तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव गौबा ने गृह सचिव को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि टंडवा के आम्रपाली व पिपरवार कोल प्रोजेक्ट से संचालित लोकल सेल्स संचालन कमेटी द्वारा की जाती है. उक्त कोल प्रोजेक्ट के सेल्स संचालन कमेटी द्वारा प्रत्येक माह करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जाती है. संचालन कमेटी के कुछ सदस्यों द्वारा पूरे कमेटी पर वर्चस्व बनाकर अवैध कमाई से अकूत संपत्ति बनाने की बात प्रकाश में आयी है. इसलिए आपराधिक सांठगांठ से भयादोहन कर रुपये वसूली करने वाले के विरुद्ध जांच के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करें. अगर आवश्यकता हो तो आर्थिक अपराध पर नियंत्रण के लिए वरीय पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठन का प्रस्ताव भी दें.

27 जनवरी 2016: चतरा के तत्कालीन एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने पुलिस मुख्यालय को एक पत्र लिखा था. पत्र में उन्होंने कहा था कि आम्रपाली कोल परियोजना में ओवर बर्डन हटाने का काम करने वाली बीजीआर कंपनी के रघुराम रेड्डी का टीपीसी के उग्रवादियों से संबंध है. उन्होंने पुलिस मुख्यालय व झारखंड सरकार के स्तर से पूरे मामले में प्रभावकारी कार्रवाई की अनुशंसा की थी.

20 सितंबर 2016: जांच की अनुशंसा से संबंधित एक संचिका पर गृह विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव शेखर जमुआर ने अपनी टिप्पणी में लिखा था कि पुलिस मुख्यालय के पत्र के आलोक में चतरा के आम्रपाली व अशोका परियोजना में हो रही अवैध वसूली की जांच के लिए एसआईटी गठन का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है. संचिका में उन्होंने कोयला क्षेत्र बोकारो के डीआईजी के नेतृत्व में एक एसआईटी के गठन की बात लिखी है. जिसमें खनन विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, वन विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, वाणिज्य कर विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, परिवहन विभाग के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी एसआईटी के सदस्य होंगे. इस एसआईटी के गठन पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त किया जा सकता है.

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