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आइआइटी धनबाद के टॉप ब्रांच के छात्रों को भी नौकरी मिलने में हो रही दिक्कत, 2018-19 में 24 फीसदी छात्रों का नहीं हुआ प्लेसमेंट

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  • आंकड़ों में आइआइटी(आइएसएम) धनबाद
  • 2018-19 में 24 फीसदी छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हो पाया
  • सिविल इंजीनियरिंग विभाग के 48.65 प्रतिशत विद्यार्थियों का नहीं हुआ प्लेसमेंट
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के 27.27 प्रतिशत छात्रों का नहीं हुआ प्लेसमेंट
  • केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के 41.67 प्रतिशत विद्यार्थियों का नहीं हुआ प्लेसमेंट
  • इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के 24.30 प्रतिशत विद्यार्थियों का नहीं हुआ प्लेसमेंट
  • कंप्यूटर साइंस विभाग के 9.77 प्रतिशत विद्यार्थियों का नहीं हुआ प्लेसमेंट

Rahul Guru

Ranchi: देशभर में 23 आइआइटी हैं, जहां पढ़ना हर छात्र का सपना होता है. यहां पढ़नेवाले हर छात्र को यही उम्मीद होती है कि देश-विदेश की नामी कंपनियों में उन्हें नौकरी मिल जायेगी. लाखों का पैकेज मिलेगा. लेकिन लाखों रुपये खर्च होने के बाद जब उन्हें प्लेसमेंट नहीं मिलता तो उनके सपने दम तोड़ने लगते हैं. प्लेसमेंट देने के मामले में आइआइटी को देश भर में सबसे अच्छा माना जाता था. यहां पढ़ना मतलब नौकरी की गारंटी होती थी. पर अब ऐसा नहीं है. देशभर के आइआइटी के प्लेसमेंट के आंकड़े यह बयां कर रहे हैं कि प्लेसमेंट के मामले में आइआइटी का जो रुतबा था वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और यहां से भी 25 से 40 फीसदी छात्रों को नौकरी नहीं मिल रही है.

एआइसीटीइ सहित अन्य स्रोत के आंकड़ों की मानें तो देश की शीर्ष आइआइटी के शीर्ष ब्रांच से पढ़ कर निकलने वाले औसतन 25 से 40 प्रतिशत छात्र नौकरी से वंचित रहे गये हैं. इस आंकड़े में झारखंड का एकमात्र आइआइटी, आइआइटी(आइएसएम) धनबाद भी शामिल है. आइआइटी धनबाद में बीते वर्ष 24 फीसदी छात्रों को नौकरी नहीं मिली है.

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आइआइटी धनबाद के शीर्ष ब्रांच भी पीछे

विभिन्न स्रोत से मिले आंकड़ों के मुताबिक बीते वर्ष आइआइटी धनबाद के शीर्ष ब्रांच भी नौकरी देने में पीछे रह गये हैं. शीर्ष ब्रांचों में 24 से 48 फीसदी छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हो पाया है. जानकारी के मुताबिक संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के 48.65 प्रतिशत, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के 27.27 प्रतिशत, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के 41.67 प्रतिशत, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के 24.30 प्रतिशत तथा कंप्यूटर साइंस विभाग के 9.77 प्रतिशत छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हो पाया है.

आइआइटी रूड़की, आइआइटी पटना का भी हाल बुरा

प्लेसमेंट देने के मामले में देश के शीर्ष आइआइटी रूड़की सहित अन्य का भी हाल बुरा है. एजुकेशन मैगजीन करियर 360 की रिपोर्ट बताती है कि 2017-18 में आइआइटी रूड़की से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर निकलने वाले 50 फीसदी छात्रों को नौकरी नहीं मिली. यह आंकड़ा अधिकांश आइआइटी के सिविल ब्रांच का देखें तो 30 फीसदी औसतन विद्यार्थियों का प्लेसमेंट नहीं हो पाया है. इसी तरह आइआइटी मद्रास के कंप्यूटर साइंस विभाग के 10 फीसदी छात्रों को नौकरी नहीं मिल पायी है. सिविल ब्रांच में आइआइटी पटना के 46.15 प्रतिशत और आइआइटी रूड़की के 50 प्रतिशत छात्रों को प्लेसमेंट नहीं मिला. मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में भी आइआइटी पटना के 46.34 प्रतिशत, आइआइटी मंडी के 37.50 प्रतिशत और आइआइटी धनबाद के 27.27 प्रतिशत ग्रेजुएट्स का प्लेसमेंट नहीं हो पाया है. केमिकल इंजीनियरिंग विभाग में भी आइआइटी पटना के 42.86 प्रतिशत, आइआइटी धनबाद के 41.67 प्रतिशत छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हो पाया. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में आइआइटी धनबाद के 24.30 प्रतिशत, आइआइटी मंडी के 17.24 प्रतिशत, आइआइटी भुवनेश्वर के 16 प्रतिशत व आइआइटी जोधपुर के 16 प्रतिशत छात्र को नौकरी नहीं मिली. कंप्यूटर साइंस विभाग में आइआइटी मद्रास के 10 प्रतिशत, आइआइटी धनबाद के 9.77 प्रतिशत, आइआइटी जोधपुर में 9 प्रतिशत विद्यार्थियों को प्लेसमेंट नहीं मिला.

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5 लाख है औसत वेतन

प्लेसमेंट में मिलनेवाली सैलेरी की बात करें तो अधिकांश बड़े आइआइटी की औसत सालाना सैलेरी 5 लाख रुपये है. प्लेसमेंट वर्ष 2018-19 के आंकड़ों के अनुसार आइआइटी बीएचयू का न्यूनतम वेतन 3.5 लाख, आइआइटी भुवनेश्वर का न्यूनतम वेतन 4.8 लाख, आइआइटी पटना का न्यूनतम वेतन 5 लाख व आइआइटी मद्रास का न्यूनतम वेतन 5.5 लाख सालाना है. वहीं प्लेसमेंट वर्ष 2017-18 के अनुसार आइआइटी धनबाद का न्यूनतम वेतन 5 लाख, आइआइटी जोधपुर का न्यूनतम वेतन 6 लाख प्रतिवर्ष रहा.

यह भी जानें

15 जुलाई 2019 को मानव संसाधन विकास विभाग मंत्री रमेश पोखरियाल ने संसद में दिये सवाल के जवाब में कहा था कि शैक्षणिक सत्र 2017-18 में इंजीनियरिंग करनेवाले 45.29 प्रतिशत छात्रों को प्लेसमेंट नहीं मिला है. वैसे उनके जवाब के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2018-19 में यह आंकड़ा 22.97 प्रतिशत ही रहा है.

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