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टोक्यो ओलंपिक-2020 : डिस्कस थ्रो में फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय बनीं कमलप्रीत, मेडल की उम्मीद जगाई

चार बार की ओलंपियन सीमा पुनिया 64 मीटर के क्वालिफिकेशन मार्क को नहीं छू सकीं

New Delhi : टोक्यो ओलंपिक-2020 में भारत के स्टार खिलाड़ियों की हार की खबरों के बीच एक सुखद खबर भी आयी है. महिला डिस्कस थ्रो इवेंट में कमलप्रीत कौर शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में पहुंच गई हैं, लेकिन सीमा पुनिया को बाहर का रास्ता देखना पड़ा है. कमलप्रीत ओलंपिक डिस्कस थ्रो इवेंट के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय हैं.

65 मीटर का मार्क हासिल करने वाली एकमात्र भारतीय

इस साल मार्च में पटियाला में आयोजित फेडरेशन कप के दौरान 65 मीटर का मार्क हासिल करने वाली एकमात्र भारतीय कमलप्रीत ने शनिवार को क्वालिफिकेशन ग्रुप-बी में अपने तीसरे प्रयास में 64 मीटर का ऑटोमेटिक क्वालीफाईंग मार्क हासिल कर फाइनल का टिकट हासिल किया. वहीं सीमा क्वालिफिकेशन ग्रुप-ए में तमाम प्रयासों के बावजूद 60.57 मीटर के साथ छठा स्थान हासिल कर सकीं.

क्वालीफाईंग ग्रुप-ए में 15 बी में 16 एथलीट शामिल थीं. इन दोनों ग्रुपों से कुल 12 टॉप एथलीट फाइनल में पहुंचेंगी. जिन्होंने ऑटोमेटिक क्वालीफाई किया है, उनके अलावा श्रेष्ठ दूरी तय करने वाली एथलीट वरीयता क्रम में आ जाएंगी.

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ग्रुप-बी से कमलप्रीत के अलावा अमेरिका की वेराले अलामान (66.42) ऑटोमेटिक क्वालीफाईंग मार्क हासिल कर सकीं. मापी गई दूरी के लिबाज से ग्रुप-ए से तीन ग्रुप-बी से नौ एथलीटों ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है.

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सीमा का प्रदर्शन

2014 इंचियोन एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता सीमा की अगर बात करें तो उनके लिए शुरूआत अच्छी नहीं हुई थी. सीमा ने सबसे पहले थ्रो किया, लेकिन वह अपने पहले प्रयास में फाउल करार दी गईं. हालांकि दूसरे प्रयास में उन्होंने 60.57 मीटर का थ्रो किया.

अपने तीसरे प्रयास में भी चार बार की ओलंपियन सीमा 64 मीटर के क्वालिफिकेशन मार्क को नहीं छू सकीं. उन्होंने 58.93 मीटर का खराब थ्रो किया. सीमा के ग्रुप में सबसे बेहतर थ्रो क्रोएशिया की सेंड्रा पेरकोविच का रहा. पेरकोविच ने 63.75 मीटर का थ्रो लिया.

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तीसरे प्रयास में कमलप्रीत ने 64 मीटर की दूरी नापी

ग्रुप-बी में शामिल कमलप्रीत ने पहले प्रयास में 60.29 मीटर की दूरी नापी. इसके बाद दूसरे प्रयास में वह 63.97 तक पहुंच गईं. इस दूरी के साथ भी वह फाइनल के लिए क्वालीफाई करती दिख रही थी लेकिन उनकी कोशिश ऑटोमेटिक क्वालीफाईंग मार्क हासिल करना था तीसरे प्रयास में वह 64 मीटर के साथ वहां पहुंच ही गईं.

कमलप्रीत से पहले साल 2012 के लंदन ओलंपिक में कृष्णा पूनिया ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था लेकिन वह पदक तक नहीं पहुंच सकी थीं.

क्वालीफाईंग में जो स्टैंडिंग रही, उसे अगर कमलप्रीत बरकरार रखती हैं तो वह पदक जीत सकती हैं. एनआईएस में आयोजित इंडियन ग्रां प्रि-4 में कमलप्रीत ने 66.59 की दूरी नापी थी लेकिन इसे अभी राष्ट्रीय रिकार्ड का दर्जा नहीं मिला है. कमल अगर इस प्रदर्शन को दोहरा सकीं तो भारत को महान सफलता मिल सकती है.

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