न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

“आज मेरे पिता की जान गयी क्या पता कल किसके पिता निशाने पर हों’’

हिंदु-मुस्लिम की नफरत की दीवार खड़ी कर आज मेरे पिता की जान गई है.

166

Faisal Anurag

“मेरे पिता चाहते थे, मैं अच्छा इंसान बनूं. लेकिन नफरत ने मेरे पिता की जान ले ली. हिंदु-मुस्लिम की नफरत की दीवार खड़ी कर आज मेरे पिता की जान गई है, कल क्या पता किसके पिता निशाने पर हों.’’ इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के पुत्र अभिषेक का यह मार्मिक बयान है. सुबोध सिंह की हत्या बुलंदशहर में उस हिंसा में हो गयी, जो एक अफवाह के कारण हुई. एक पुत्र का यह मार्मिक बयान बताता है कि हमारा देश किस दिशा में जा रहा है. क्या हमने अपने देश में ऐसे हालात बना दिए हैं, जिसमें सद्भाव और शांति की बात करना मुश्किल हो गया है. एक अच्छा इंसान बनने की प्रक्रिया भी इससे प्रभावित होती जा रही है. दरअसल ध्रवीकरण की राजनीति ने भारतीय समाज के कुछ तबकों में ऐसा असहिष्णुता के हालात पैदा कर दिए हैं, जिसमें कोई भी तार्किक बात का महत्व घटता जा रहा है. धार्मिक भीड़ बनाकर हर उस आवाज को हाशिए पर धकेला जा रहा है, जो कि इंसानी रिश्तों की बात करता है. ऐसी अनेक वारदातें पिछले कुछ सालों से हो रही हैं और धार्मिक भीड़ का राजनीतिक संरक्षण हत्यारों को बचा ले जा रहा है. यह कोई स्वत:स्फूर्त भीड़ नहीं है. बल्कि खासतरह की विचारधारा ने इसे प्रायोजित किया है. इन लोगों ने इतिहास को तोड़मरोड़ कर इस नफरत को गहरायी तक उतारा है. किसी भी देश की प्रगति और विकास की राह इस तरह से प्रभावित होती है और आधुनिकता के तमाम विचार को अप्रासंगिक बना दिया जाता है. दुनियाभर के जिन देशों ने भी इस तरह की नफरत की राजनीति को परवान चढ़ाया है, उनका बुरा हश्र हुआ है. उन देशों की तबाही का इतिहास भी सामने है.

उस समय भारत विचित्र किस्म के विरोधाभासों के शिकार हैं. इन विरोधाभासों को न केवल सामाजिक विघटनकारी प्रक्रियाओं में महसूस किया जा सकता है, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी इसकी गरमाहट महसूस की जा सकती है. जिस भारत ने आधुनिक और वैज्ञानिक चेतना के आधार पर अपनी विकास की यात्रा का फैसला किया था, उसी में आज इतिहास की गलत धाराणाओं से पैदा किए गए माहौल का दंश है. जाहिर होता है कि भारत का पूंजीवादी विकास जबरदसत गतिरोध का शिकार है और वह अपने को बचाए रखने के लिए इस तरह की राजनीतिक विचारधारा को प्रश्रय दे रहा है, जो कि किसी भी समाज के भविष्य को कुंद कर सकता है. क्रोनी पूंजीवाद का मकसद यह है कि लोकतांत्रिक चेतना के विकास के रास्ते में बाधा पहुंचाया जाए, ताकि वंचित जनसंपत्ति पर अधिकार की अपनी मांग को छोड़कर धार्मिक उन्माद में फंसे रहे. संपत्ति पर क्रोनी कैपिटल्स्टि घरानों का बढ़ता केंद्रीकरण को संरक्षण देती राजनीति दरअसल इस तरह के नफरत को बढ़ाती रहती है ताकि लोकतंत्र के उपरी चेहरे को बनाए रखते हुए वह असमानता के तमाम कारकों को विकसित कर तानाशाही रवैये को जनसमर्थन का जामा पहना दे. याद रखना चाहिए कि जर्मनी में हिटलर भी जनतंत्र और समाजवाद की दुहायी देता हुआ नाजीवाद की क्रूर अमानवीयता को स्थापित करने में सफल हुआ था और दुनिया पर उसने दूसरे विश्व जंग को थोप दिया था.

पूंजीवादी संकट से पूरी दुनिया जूझ रही है और इस दौर में दुनिया के अनेक देशों में दंक्षिणपंथी ताकतों ने सत्ता तक अपनी पहुंच बना ली है. हालांकि उन सभी को अपने देशों में मेहनतकश तबकों  से भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है और आर्थिक,सामाजिक और राजनीतिक इंसाफ के लिए प्रतिरोध भी तीखा होता जा रहा है. ब्राजील में हुए चुनाव में एक घनघोर दक्षिणपंथी की जीत और  अमरीका में ट्रंप की राजनीति इसी का परिचायक है. अमेरिका एक बार फिर तमाम तानाशाही और धार्मिक उन्मादग्रसत राजनीतिक नेताओं को संरक्षण भी दे रहा है. उदारीकारण की विफलता के बीच अमेरिका तनावग्रस्त दुनिया के लिए तमाम कूटनीतिक प्रयास करते हुए नए तरह के शीतयुद्ध की पीठिका का पोषण कर रहा है.

लेकिन मेहनतकश तबकों का उभार भी दिख रहा है, जो इस दौर को बदलने की ताकत रखता है. फ्रांस में जिस तरह पिछले सप्ताहभर से प्रतिरोध हो रहे हैं और लातिनी अमरीकी देशों में वामपंथ थ का उभार दिख रहा है वह पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के खिलाफ जनउभार है. दुनिया के अनेक इकोनॉमिस्ट अब मान रहे हैं कि ग्लोबलाइजेशन की पूरी राजनीति विफल हो चुकी है और इसका विकल्प जल्द खड़ा करने की जरूरत है.

(लेखक न्यूज विंग के वरिष्ठ संपादक हैं)

इसे भी पढ़ें – 29,500 होमगार्ड से वादा कर भूले सीएम, न भत्ता बढ़ा, न मिली ट्रैफिक ड्यूटी

इसे भी पढ़ें – हाइकोर्ट भवन निर्माण मामलाः 15 दिनों से सीएमओ में दबी है 697.32 करोड़ के इस्टीमेट को रद्द करने व अफसरों- इंजीनियरों पर कार्रवाई की फाइल

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: