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भेलवाघाटी नरसंहार की 15वीं बरसी आज: उस खूनी रात को याद कर अब भी भयभीत हो जाते हैं ग्रामीण

  • 15 सालों में हुए सिर्फ तीन काम पूरे, सड़क निर्माण के साथ थाना खुला, तो अब हो रहा है स्कूल निर्माण
  • गिरिडीह के इस चर्चित नक्सली नरसंहार में मारे गये ग्रामीणों के परिजनों की सुध लेने वाला अब कोई नहीं

Manoj Kumar Pintu

Giridih: 15 साल पुरानी उस खूनी रात को याद कर आज भी भेलवाघाटी गांव के ग्रामीण भयभीत हो जाते हैं, जब प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हथियार बंद दस्ते ने 11 सितबंर 2005 को गिरिडीह के भेलवाघाटी गांव में ग्राम रक्षा दल के 17 सदस्यों की नृशंस हत्या कर दी थी.

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वैसे इसी भेलवाघाटी गांव में ही 2 फरवरी 2017 को भी माओवादियों के दस्ते ने भेलवाघाटी पंचायत के मुखिया पुत्र सुभाष बरनवाल और उसके सहयोगी श्यामसुंदर पंडित की हत्या गोली मारकर कर दी थी. लेकिन बहुचर्चित भेलवाघाटी नरसंहार को याद कर अब भी ग्रामीण भयभीत हो जाते हैं. उस घटना में माओवादियों ने कई ग्रामीणों के घर विस्फोट कर उड़ा दिये थे.

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वादे नहीं हुए पूरे

राज्य के इस नक्सली नरसंहार की 15वीं बरसी शुक्रवार को है. हालांकि 15 साल बाद नरसंहार में मारे गये ग्राम रक्षा दल के सदस्यों के परिजनों की सुध लेने वाला ना तो कोई राजनीतिक दल ही है और ना ही किसी सरकार से परिजनों को कोई सरकारी लाभ ही मिल पाया है.

जबकि घटना के दूसरे दिन सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री के अलावे राज्य के कई बड़े मंत्री, विपक्षी दलों के नेता और अधिकारियों का काफिला भेलवाघाटी गांव पहुंचा था जहां कई बड़ी घोषनाएं हुईं थीं. इनमें मृतक के आश्रितों को नौकरी, पांच लाख का मुआवजा, मृतक के वृद्ध परिजनों को पेंशन, बच्चों को मुफ्त शिक्षा, पूरे गांव को एक आदर्श गांव बनाने जैसी घोषणाएं शामिल थीं.

इन घोषणाओं में 15 सालों के दौरान चंद वादे ही पूरे हो पाये हैं जिसमें भेलवाघाटी में थाना खुला तो भेलवाघाटी में सुविधानुसार आवागमन के लिए फतेहपुर मोड़ से लेकर भेलवाघाटी तक सड़क निर्माण किया जा रहा है. वहीं गांव के बच्चों की शिक्षा के लिए आश्रम का भवन भी तैयार किया जा रहा है जबकि कई नौकरी, मुआवजा और पेंशन की घोषणा आज भी अधूरी पड़ी हुई है.

15 साल पहले ग्राम रक्षा दल के जिन 17 सदस्यों की हत्या माओवादियों ने जनअदालत लगाकर की थी उनमें भेलवाघाटी निवासी मजीद अंसारी, मकसूद अंसारी, मंसूर अंसारी, रज्जाक अंसारी, सिराज अंसारी, रामचन्द्र हाजरा, गणेश साव, अशोक हाजरा, जेनस मुर्मू, मुंशी मियां और उनके बेटे जमाल अंसारी, कलीम मियां, हमीद मियां, चेतन सिंह, दिलमुहम्मद अंसारी, युसूफ अंसारी समेत 17 लोग शामिल हैं.

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क्या हुआ था

गौरतलब है कि भेलवाघाटी इलाके में माओवादियों को पनपते देख गांव के ग्रामीणों ने माओवादियों से लोहा लेने के लिए ग्राम रक्षा दल का गठन किया था. ग्राम रक्षा दल के इन सदस्यों को माओवादियों से लोहा लेने के लिए टार्च, लाठी समेत कई हथियार भी उपलब्ध कराये गये थे.

गठन के बाद दल के सदस्यों ने गांव में माओवादियों की इंट्री पर रोक लगा दी थी. इससे बौखलाए माओवादियों के दस्ते ने 11 सितबंर 2005 की रात भेलवाघाटी पर धावा बोला और पूरे गांव को अपने कब्जे में कर लिया. इस दौरान माओवादियों ने गांव के मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर से पूरे गांव में जनअदालत लगाने का एलान किया था.

एलान के बाद दल के कुछ सदस्य पहुंचे और जो नहीं आये उनमें से एक-एक सदस्य को खोज कर जनअदालत लाया गया. जनअदालत में माओवादियों ने दल के एक-एक सदस्य की पहले पिटाई की. फिर उनके हाथ-पांव बांधकर नृशंस तरीके से हत्या कर दी थी.

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