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आज है बॉलीवुड की बेगम जान का जन्मदिन, जानें कैसी रही परिणीता के निखरने की कहानी

नवीन शर्मा

राष्ट्रीय पुरस्कार पाना किसी भी कलाकार का बड़ा सपना होता है. इसके लिए कड़ी मेहनत व प्रतिभा के बावजूद कई कलाकारों को दशकों तक इंतजार करना पड़ता है. अब अमिताभ बच्चन को ही देख लें उन्हें भी ये पुरस्कार अपने कैरियर के करीब बीस साल बाद मिला था. वहीं विद्या बालन को महज सात वर्ष के फिल्मी कैरियर में अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. यह सचमुच काफी रोमांचक और सकून देनेवाली बात है. विद्या मंजी हुई कलाकार हैं, वे खुशी, दुख, झुंझलाहट, प्रेम और आत्मियता जैसे हर तरह के मनोभाव को बखूबी व्यक्त करती हैं.

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हम पांच टीवी सीरियल से शुरू किया करियर

विद्या ने टीवी सीरियल हम पांच से अपनी अभिनय यात्रा महज 16 साल की उम्र में शुरू की थी. इसका उन्हें लाभ भी मिला. वे बहुत कम उम्र में ही एक मेच्योर अभिनेत्री के रूप में सामने आईं.इस टीवी सीरियल में भी उन्हें खासा पसंद किया गया था.

परिणीता फिल्म से बनाई पहचान

सैफ अली खान के साथ विद्या बालन की परिणीता फिल्म में पहली बार मेरा ध्यान उनकी एक्टिंग ने खिंचा था. उससे पहले वे कई टीवी सीरियल में भी काम कर चुकी हैं. परिणीता में उनका अभिनय बहुत स्वभाविक लगा. इसके साथ ही बंगाली युवती के किरदार में वे बेहद खूबसूरत भी नदर आईं थी.

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भूल-भुलैया में शानदार अभिनय

विद्या ने अक्षय कुमार के साथ भुल-भुलैया में लीड रोल किया था. इसमें एक साइकिक युवती की भूमिका में शानदार अभिनय किया. आमी तौमार रक्तों पिबो डायलॉग लाजवाब था. उस फिल्म में उन्होंने अपने सभी सीनियर कलाकारों को पछाड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने कुछ ऐसी फिल्मों में भी काम किया जिनमें उनके लिए करने के लिए कुछ नहीं था. लेकिन इन फिल्मों में भी उन्होंने अपने अभिनय से जाह डाल दी. इसके बाद गुरु फिल्म में भी काफी छोटे से रोल से भी दर्शकों को दिल जीत लिया.

पा से करियर में आया नया मोड़

विद्या के कैरियर में आर बाल्की की पा फिल्म ने नया मोड़ ला दिया. अमिताभ बच्चन की मां के रोल में उन्होंने शानदार अभिनय किया. एक असमान्य बच्चे की मां की परेशानियों व मानसिक स्थित को बखूबी दर्शाया. उसके साथ साथ ऐसे स्थिति में जब उसका पति उसके साथ ना हो. यह फिल्म विद्या के अभिनय यात्रा में काफी महत्वपर्ण पड़ाव था.

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डर्टी पिक्चर में अभिनय को दी नयी ऊंचाई

डर्टी पिक्चर में तो उन्होंने सचमुच कमाल ही कर दिया. खासकर उस मनोदशा के अभिनय में जब शुरू और अन्त में उसे काम नहीं मिलता है दोनों ही स्थितियों में उन्होंने काफी अच्छा अभिनय किया. फिल्म चलने में भले ही ऊ ला ला ऊला ला.. गीत और द्विअर्थी संवादों की भी भूमिका रही हो लेकिन उसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विद्या का अभिनय ही था. विद्या ने अभिनेत्री सिल्क स्मिता के किरदार की बेबाकी और बिंदास अंदाज को जिस सहजता से आत्मसात किया है वो सचमुच काबिले तारीफ है. जब वो मोटी हो जाने पर जिंस पैंट पहनने के लिए जद्दोजहद करती हैं तो उसके चेहरे की बेबसी और उदासी एकदम से दिल को छू जाती है. एकदम बिंदास अंदाज में द्विअर्थी संवाद बोलना और केयरलेस लाइफ स्टाइल को विद्या सहज रूप में पेश करने में कामयाब रही हैं. उनकी इस बेहतरीन एक्टिंग को सराहा भी गया. उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार इस फिल्म के लिए मिला था.

कहानी में गजब का रोमांच

फिल्म निर्देशक सुजीत सरकार फिल्म कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन सस्पेंस थ्रिलर है. फिल्म की कहानी तो स्पेंसर और थ्रिलर क्रिएट करती ही हैं लेकिन उसमें चार चांद तो विद्या बालन का लाजवाब अभिनय लगाता है. विद्या बागची के किरदार में वो खूब जंची हैं. वो फर्जी ढंग से गर्भवती दिखने के रोल को विश्वसनीय ढंग से निभाती हैं. इस फिल्म में भी हम उनके अभिनय को औऱ निखरता हुए देखते हैं. कहानी टू में भी विद्या ने अपना रोल को सही ढंग से निभाया. लेकिन फिल्म की कहानी में दम ना होने के कारण फिल्म चल नहीं सकी.

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इश्किया और डेढ़ इश्किया

विद्या की एक उल्लेखनीय फिल्म है अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी इश्किया. हां जी वही फिल्म जिसका एक बेहतरीन गीत दिल तो बच्चा है जी जिसे गुलजार साहब ने लिखा था और आवाज दी थी राहत फतह अली खान ने. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और अरशद वारसी भी थे. विद्या ने इस फिल्म में भी अपने अभिनय प्रतिभा की छाप छोड़ी. इन्हीं तीनों कलाकारों को लेकर डेढ़ इश्किया भी बनी थी लेकिन इसमें भी पहली फिल्म वाली बात नहीं थी.

तुम्हारी सुल्लू विद्या का एक और कमाल

विद्या बालन की तुम्हारी सुल्लू एक कम पढ़ी लिखी ( 12वीं फेल ) घरेलू महिला की अपने सपनों को पूरा करने की जद्दोजहद की रोचक दास्तां है. अपने ही परिवार के सगी बहनों द्वारा हमेशा उसे नीचा दिखाने की कोशिशों से लड़ती सुल्लू का पति से भी विवाद होता है. पति अशोक भी अपनी नौकरी की परेशानियों से जुझता है. सुल्लू सारी दिक्कतों के बावजूद लेट नाइट लाइव रेडियो प्रोग्राम में आरजे की नौकरी करती. अपने इस काम को वो बखूबी अंजाम भी देती है. लेकिन उसकी बहनों को ये पसंद नहीं आता. पति को भी उसका लेट नाइट आरजे का काम अखरता है. विद्या बालन सुल्लू की इस पूरी जद्दोजहद को बहुत ही सहज और संवेदनशील ढंग से परदे पर उतारती हैं.

बेगम जान में विद्या फिर दिखीं अपने रंग में

इसके बाद आई फिल्मों बॉबी जासूस और हमारी अधूरी कहानी में वे निराश करती हैं. अभिनय के साथ-साथ अपने शरीर के प्रति बेपरवाही में वे मोटी हो गयी हैं. खैर बेगम जान में ये मोटापा उनके कोठेवाली के किरदार को ज्यादा वास्तविक बनाता है. बेगम जान फिल्म देश विभाजन के दौर की कहानी बताती है. बेगम जान के किरदार में विद्या का सहज और शानदार अभिनय जान डालता है.

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