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गिरिडीह कांग्रेस को ऑक्सीजन देने के लिए प्रदेश नेतृत्व टटोल रहा नये जिलाध्यक्ष के लायक चेहरा

Manoj Kumar Pintu

Giridih: कोरोना काल के कारण गिरिडीह कांग्रेस कमेटी के पुर्नगठन पर ब्रेक लगी हुई है. नए जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं होने से कांग्रेस के वर्करों की नाराजगी भी बढ़ती जा रही है.

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नाराजगी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को लेकर भी है क्योंकि पिछले सात सालों से जिला कमेटी पुराने जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में ही कार्य कर रही है.

लिहाजा, इतने सालों से एक चेहरे के कारण पार्टी के भीतर का संतुलन तो बिगड़ा ही, वहीं जिलाध्यक्ष पर मनमाने रवैये के साथ पद संभालने तक के आरोप कई बार लग चुके है.

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दूसरी तरफ बंद कमरे में हुई कई बार शिकायत के बाद भी फेरबदल को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लेने के कारण कार्यकर्ताओं में प्रदेश नेतृत्व के प्रति भी नाराजगी भी बढ़ती जा रही है.

कार्यकर्ताओं का रुख जिलाध्यक्ष और प्रदेश नेतृत्व के प्रति भी कड़ा तब बना जब पार्टी के नये भवन का शिलान्यास करने प्रदेश से कई नेता पहुंचे थे.

शिलान्यास के दौरान ही पार्टी कार्यालय में जमकर हंगामा हुआ. अल्पसंख्यक मोर्चा के नेताओं ने शिलान्यास समारोह के दौरान जिलाध्यक्ष नरेश वर्मा पर एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाये.

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आरोप पार्टी को हाइजैक करने तक का लग गया. और यह सब हुआ सूबे के वित्त मंत्री सह प्रदेश अध्यक्ष रामेशवर उरांव, गिरिडीह प्रभारी इरफान अंसारी समेत कई नेताओं के सामने. इस हंगामे के बाद यह जाहिर हो गया है कि गिरिडीह कांग्रेस कमेटी में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है.

इसे पहले भी कार्यकर्ता कई बार गिरिडीह में घंटे-दो घंटे प्रवास के लिए रुके. कई प्रदेश नेताओं के सामने बंद कमरे में वर्तमान जिलाध्यक्ष के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. ऐसे में तय माना जा रहा है कि गिरिडीह में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए जल्द ही प्रदेश से कोई निर्देश जारी हो सकता है.

वैसे तय यह भी है कि पार्टी चुनाव कराएं बगैर नये जिलाध्यक्ष की घोषणा कर दे. लिहाजा, प्रदेश नेतृत्व के पास जिलाध्यक्ष के दावेदारों में फिलहाल जितने नाम गये हैं, उनमें उपेन्द्र सिंह, अजय सिन्हा मंटू, वर्तमान जिलाध्यक्ष नरेश वर्मा के नाम शामिल है.

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जबकि प्रदेश नेतृत्व के पास प्रबल दावेदारों में अजय सिन्हा मंटू और उपेन्द्र सिंह की चर्चा सबसे अधिक है.
हालांकि जिलाध्यक्ष की दावेदारी के लिए सतीश केडिया के नाम की भी चर्चा पार्टी के भीतर है. लेकिन प्रदेश नेतृत्व के पास सतीश केडिया का नाम शामिल है या नहीं, इसका कोई संकेत अब तक नहीं मिला है.

बुधवार को न्यूज विंग से बातचीत के क्रम में प्रदेश संगठन प्रभारी आलोक दुबे ने संकेत दिये कि इस बार जिला की कमान सौंपने के लिए पार्टी जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगी. ठोंक बजाकर जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा होगी.

जिला अध्यक्ष किसे बनाना है इसकी घोषणा में विलंब होने का कारण सिर्फ कोरोना है. लेकिन गिरिडीह कमेटी पर पूरी नजर है. कोरोना काल के कारण पार्टी की ओर से घोषणा नहीं हो पा रही.

वैसे यही तर्क जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी ने भी देते हुए कहा कि अब जो भी होगा कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद. लेकिन पार्टी अब अधिक देर नहीं करेगी.

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