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रिम्स में भर्ती मरीजों को कड़ाके की ठंड से बचने के लिए कंबल भी मयस्सर नहीं

बेड और चादर के लिए भी करना पड़ता है कई दिनों तक इंतजार

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Ranchi : राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. ठंड से जहां एक ओर लोग परेशान हैं, वहीं ठंड में बीमार पड़नेवालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. ठंड लगने से कई लोगों की मृत्यु भी हो रही है. राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में दिनोंदिनों मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. मेडिसीन विभाग में मरीजों को रखने के लिए बेड तक मुहैया नहीं हो पा रहा है. यहां कड़ाके की ठंड में मरीज फर्श पर सिर्फ एक चादर बिछाकर रहने को विवश हैं. शाम ढलते ही पारा और ज्यादा गिर रहा है. इससे कनकनी बढ़ रही है. लेकिन, बेबस मरीजों के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण वे हाड़ कंपानेवाली ठंड में अव्यवस्था के बीच रिम्स में इलाज कराने को विवश हैं. नये निदेशक के रिम्स में आने के बाद भी इलाज करा रहे मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं देने में प्रबंधन नाकाम साबित हो रहा है. वहीं, सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में भी मरीजों को मिलनेवाली साधारण सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही हैं, जहां मात्र एक चादर बिछाकर ठंड में मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिससे मरीजों की तकलीफ और बढ़ गयी है.

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सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में भी मरीजों को नहीं मिल रहा बेड

रिम्स के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में यूरोलॉजी विभाग शुरू किया गया था. सुपरस्पेशियलिटी होने के बावजूद मरीजों को मिलनेवाली आम सुविधा भी यहां नसीब नहीं हो रही है. यूरोलॉजी विभाग में झारखंड के अलावा बाहर से भी मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन उन्हें लेटने के लिए बेड, गद्दा और चादर भी नहीं मिल रहा है. ऐसे में वे जमीन पर प्लास्टिक या अपने घर से लायी हुई चादर आदि बिछाकर इलाज कराने को मजबूर हैं.

मरीजों को कंबल नसीब नहीं

370 करोड़ रुपये के बजटवाले रिम्स में मरीजों को एक कंबल भी नहीं दिया जा रहा है. हाड़ कंपानेवाली इस ठंड में निरोग व्यक्ति भी परेशान है. मरीजों को इस मौसम में और ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत होती है. लेकिन, रिम्स की कार्यशैली देखकर ऐसा लगता है, जैसे यहां मरीज ठीक होने नहीं, बल्कि और ज्यादा  बीमार होने आ रहे हैं.

क्या कहते हैं मरीज और उनके परिजन

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रिम्स में भर्ती एक मरीज के परिजन सुरेंद्र ने बताया, “मैं अपने ससुर का इलाज कराने आया हूं. रिम्स आने के बाद मुझे बेड उपलब्ध नहीं कराया गया. एक चादर और एक कंबल दिया गया था, लेकिन बेड नहीं होने के कारण फर्श पर ही चादर बिछाकर और कंबल ओढ़कर लेट गये. ठंड काफी ज्यादा है, इसलिए परेशानी तो होगी ही. घर से एक कंबल और मंगवा लूंगा.”

मरीज प्रभाकर टोप्पो ने बताया कि चार दिन से इलाज के लिए यहां भर्ती हैं, लेकिन आज तक न तो बिस्तर मिला है और न ही गद्दा. ठंड में एक कंबल से ही गुजारा हो रहा है. पूछने पर बताया गया कि बेड खाली होने पर दिया जायेगा, लेकिन अभी तक कोई देखने तक नहीं आया.

रिम्स में गद्दे की कोई कमी नहीं है. कंबल और चादर भी यहां पर्याप्त संख्या में हैं. यदि किसी विभाग से गद्दे और चादर की मांग की जाती है, तो सप्लाई तुरंत किया जाता है. मरीजों को कंबल और चादर नहीं मिला है, इसकी हमें फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिली है. अगर जानकारी मिलती है, तो तत्काल मरीजों को गद्दा और कंबल उपलब्ध करा दिये जायेंगे.

-डॉ. रघुनाथ, मेडिकल ऑफिसर, स्टोर, रिम्स

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