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भू-अधिग्रहण कानून का पालन नहीं कर रही टिस्को, कंपनी की मनमानी के खिलाफ रैयत पहुंचे आयोग, आयोग बोला- जांच होने तक बनी रहे यथास्थिति

  • टिस्को की वेस्ट बोकारो कोलियरी में रैयतों पर हो रहे अत्याचार का मामला पहुंचा नेशनल एसटी कमीशन
  • घाटोटांड़ में आदिवासियों द्वारा जमीन खाली नहीं किये जाने पर कंपनी बिजली, पानी व सड़क बाधित कर रही है

New Delhi/Ranchi: टिस्को की वेस्ट बोकारो कोलियरी का मामला राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग पहुंच गया है. रैयत विस्थापित मोर्चा रामगढ़ की ओर से की गई शिकायत पर बुधवार को आयोग ने कहा कि मामले को राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सरकार के प्रधान सचिव, सचिव, सचिव भू-राजस्व विभाग एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर सुलझाया जायेगा. आयोग ने टिस्को को निर्देश दिया कि जो लोग वहां रह रहे हैं उन्हें न हटाया जाये.

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नहीं किया गया है पुनर्वास

मामले पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष अनुसूईया उइके की अध्यक्षता सुनवाई की गई.  सुनवाई के दौरान स्थानीय अनुसूचित जनजातीय वर्ग के लोगों और उनके प्रतिनिधियों के द्वारा यह बताया गया कि उनकी भूमि का अधिग्रहण करने के बाद उनका अब तक समुचित पुनर्वास नहीं किया गया है. साथ ही टिस्को के अधिकारियों के द्वारा लगातार शारीरिक एवं आर्थिक रूप से शोषण किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पदाधिकारियों द्वारा समुदाय के लोगों के घरों की बिजली, पानी व सड़क को बाधित कर दिया गया है. साथ ही आवास को अनधिकृत रूप से तोड़ने तथा परिवार के लोगों के साथ मारपीट भी की जा रहा है. इस सुनवाई में आयोग के सचिव एके सिंह व निदेशक डॉ ललित लट्टा के साथ-साथ समुदाय के प्रतिनिधियों के रूप में नीरज कुमार, गीताश्री उरांव, ब्रज किशोर राम, फागु बेसरा उपस्थित थे.

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क्या कहा आयोग के उपाध्यक्ष ने  

इस मामले को आयोग द्वारा बेहद गंभीरता से लिया गया है. उपाध्यक्ष के द्वारा मामले में यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी स्थिति में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता. उपाध्यक्ष ने यह विशेष निर्देश भी ज़ारी किया कि मामले का अन्वेषण आयोग द्वारा गठित समिति करेगी और इसके लिए आयोग की समिति स्थलीय जांच के लिए उक्त स्थल का दौरा करेगी. उन्होंने कहा कि जब तक आयोग द्वारा इस मामले की ठीक प्रकार से जांच न कर ली जाये, तब तक उक्त विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाये रखी जाये और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्यवाही न की जाये. इसके बाद आयोग आवश्यकतानुसार मामले को वरिष्ठ अधिकारियों, विशेष रूप से राज्य सरकार के प्रधान सचिव, सचिव,  सचिव (राजस्व), भारी उद्यम मंत्रालय और अन्य सम्बद्ध अधिकारियों के समक्ष उठाते हुए मामले का निवारण करेगा. साथ ही यह भी अनुशंसा की गयी कि कंपनी को यह निर्देश दिया जाये कि वर्तमान में काबिज़ लोगों को हटाया न जाये.

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