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राहत पैकेज के तहत लोन के लिए 31 जुलाई तक का समय, राज्य सरकार बैंकों के साथ करे समन्वय: चेंबर

  • बिजली फिक्स्ड चार्ज, बैंक ब्याज समेत अन्य पर निर्णय ले राज्य सरकार

Ranchi: राज्य में औद्योगिक गतिविधि शुरू करने के लिये एक्शन प्लान बनाना होगा. अन्य राज्य अपने-अपने स्तर से इस पर पहल कर रहे हैं. झारखंड भी अब लॉकडाउन के बाद छूट की तरफ आगे बढ़ रहा है. उक्त बातें चेंबर अध्यक्ष कुणाल आजमानी ने कहीं.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को चेंबर की ओर से फिर से पत्र लिखा गया जिसमें पहले की ही मांगों का जिक्र किया गया. उन्होंने कहा की केंद्र की ओर से राहत पैकेज की घोषणा तो की गयी लेकिन लोन के लिये 31 जुलाई तक ही समय तय किया गया है.

जबकि बैंकों से लोन लेने में व्यवसायियों को परेशानी हो रही है. ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी के साथ मिल कर बैठक करें और जल्द से जल्द लोन उपलब्ध करायें.

राज्य सरकार की औद्योगिक गतिविधि शुरू करने में विशेष रूचि नहीं दिखा रही है जिसका अर्थव्यवस्था और रोजगार पर प्रतिकूल असर होने वाला है.

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फिक्स्ड चार्जेस पर अब तक निर्णय नहीं ले पायी सरकार

लॉकडाउन के बाद से ही बिजली के फिक्सड चार्ज में रियायत की मांग की जा रही है. लेकिन अब तक सरकार इस पर निर्णय नहीं ले पायी. इतना ही नहीं, इस दौरान बैंक ब्याज, सहित अन्य फिक्स्ड एक्सपेंसेस में भी छूट दी जानी चाहिये.

स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर अर्थव्यवस्था को विकसित करने की पहल की जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि सरकार को समझना होगा कि उद्योगों को पुरानी स्थिति में आने के लिए लंबा समय लगेगा.

केंद्र सरकार के स्तर से घोषित राहत को धरातल पर उतारने में न तो राज्य के स्तर से प्रयास हो रहे हैं न ही बैंकों की ओर से कोई कोशिश. यह समय व्यवसायियों के लिए दूरगामी प्रभाव वाला हो सकता है.

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कुछ व्यवसाय पर ध्यान नहीं दे रही सरकार

आजमानी ने कहा कि व्यवसायियों में इच्छाशक्ति की कमी नहीं है. सुदूर गांवों में इतना श्रम है कि काम लिया जा सकता है. लेकिन राज्य सरकार पहल तो करें.

व्यवसाय सही से शुरू हो जायें तो हर स्तर पर कारोबार, रोजगार और आमदनी के अवसर होंगे. केंद्र सरकार के निर्देश से दुकान, प्रतिष्ठान, औद्योगिक इकाइयां तो खुली हैं लेकिन अब तक संक्रमण काल से निपटने के लिए व्यवसायियों-उद्यमियों को राज्य सरकार की ओर से किसी तरह की राहत नहीं दी गयी है.

सरकार ने कोरोना महामारी के लिए प्लान तो अच्छा बनाया. लेकिन आर्थिक गतिविधि को पटरी पर लाने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखा रही. उन्होंने कहा कि 72 दिनों के लॉकडाउन के बाद सरकार कोई पहल नहीं कर रही जिससे राजस्व का नुकसान भी है.

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