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कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में  हाथियों को मारकर खा रहे हैं बाघ, अध्ययन में आया सामने

राष्ट्रीय उद्यान में  करीब  225 बाघ और 1100 जंगली हाथी हैं.  जबकि रणथम्भौर, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे दूसरे राष्ट्रीय उद्यानों में मुख्यत: बाघ  रहते हैं.

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NewDelhi : कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड) में बाघ हाथियों को मार कर खा  रहे हैं.  एक आधिकारिक अध्ययन में बताया गया कि बाघ खासकर कम उम्र के हाथियों को शिकार बना रहे हैं.   बता दें कि राष्ट्रीय उद्यान में  करीब  225 बाघ और 1100 जंगली हाथी हैं.  जबकि रणथम्भौर, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे दूसरे राष्ट्रीय उद्यानों में मुख्यत: बाघ  रहते हैं.

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि उद्यान के अधिकारियों द्वारा किये गये अध्ययन में यह चिंताजनक रुझान सामने आये हैं,  क्योंकि बाघ सामान्यत: हाथियों को नहीं खाते हैं. अध्ययन के अनुसार 2014 से 31 मई 2019 के बीच जानवरों के बीच लड़ाई में कुल नौ बाघ, 21 हाथी और छह चीते मृत पाये गये.

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बाघों द्वारा हाथियों के खाने की घटना अद्भुत है

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अध्ययन में कहा गया कि तीन प्रजातियों के बीच कुल 36 मामलों में 21 केवल हाथियों के मामले थे.   आश्चर्यजनक पहलू यह था कि लगभग 60 फीसद जंगली हाथियों के मौत के मामले (13 मामले) बाघों के हमले में सामने आये. वह भी खासकर कम उम्र के हाथियों पर बाघों ने हमले किये. रिपोर्ट के अनुसार  हाथी और बाघ के बीच संघर्ष का पहला मामला 23 जनवरी 2014 को सामने आया.  इसमें जिम कॉर्बेट में हाथी और बाघ के बीच संघर्ष के बाद हाथी की मौत हो गयी थी.

दूसरा मामला तीन अप्रैल को कालागढ़ प्रभाग में हुआ था.  इसमें भी हाथी और बाघ के बीच संघर्ष के कारण हाथी मारा गया था. अध्ययन के अनुसार  जब हाथी आपसी लड़ाई में भी मारे जाते हैं तो बाघों को काफी मात्रा में भोजन मिल जाता है,  हालांकि बाघों और हाथियों के संघर्ष के बारे में और विस्तार से अध्ययन की जरूरत बताई गयी.

वरिष्ठ आइएफएस अधिकारी और राष्ट्रीय उद्यान के प्रभारी संजीव चतुर्वेदी ने इस संबंध में कहा कि बाघों द्वारा हाथियों के खाने की घटना अद्भुत है.  इसका एक कारण यह हो सकता है कि सांभर और चीतल जैसे प्रजातियों के शिकार की तुलना में हाथी के शिकार में बाघों को कम ऊर्जा और प्रयास की जरूरत पड़ती है.  हाथी को मारने से उन्हें काफी मात्रा में भोजन मिल जाता है.

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