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त्रिस्तरीय पंचायत: अवधि विस्तार के गिफ्ट से गदगद हैं झारखंड के मुखिया

कार्यकाल समाप्त होने को एक साल बीता, एक्सटेंशन में चल रहा काम, चुनाव पर अब तक फैसला नहीं

Nikhil Kumar

Ranchi: झारखंड के मुखिया-प्रमुख, उपप्रमुख, जिला परिषद अध्यक्ष सहित अन्य पंचायत के जनप्रतिनिधि पिछले एक साल से कार्यकाल में अवधि विस्तार में मिले गिफ्ट का लुत्फ उठा रहे. पांच साल के इनके कार्यकाल के बदले इन्हें सरकार की ओर से एक साल से अधिक कार्य करने का गिफ्ट मिला हुआ है. यह गिफ्ट त्रिस्तरीय पंचायतों में ग्राम पंचायतों, पंचायत समिति व जिला परिषद में भी दिया गया है. दरअसल, झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल 2015- 2020 दिसंबर में ही समाप्त हो गया था. अगर दिसंबर को देखकर चुनाव होता तो इससे एक-डेढ़ माह पहले ही आचार संहिता लग जाती है. लेकिन समय पर पंचायत चुनाव नहीं होने की वजह से इन्हें दिसंबर में ही छह माह का एक्सटेंशन दिया गया.

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सरकार ने उस वक्त यह तय किया था कि अप्रैल-मई माह में चुनाव करा दिए जायेंगे, लेकिन कोरोना की वजह उस वक्त भी चुनाव टल गया. इसके बाद फिर पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर दोबारा त्रिस्तरीय पंचायतों में गठित कार्यकारी समिति को छह माह का एक्सटेंशन दिया गया. इस संशोधन में यह भी इंगित किया गया कि कार्यकारी समिति चुनाव होने तक कार्य करती रहेगी. ऐसे में लगभग छह माह दूसरे एक्सटेंशन का कार्यकाल भी पूरा हो गया पर सरकार अभी तक पंचायतों में इलेक्शन कराने पर कोई निर्णय नहीं ले सकी है.

 

बीते एक-दो माह से विभागीय मंत्री आलमगीर आलम की ओर से घोषणाएं की जा रही थी कि राज्य में दिसंबर तक पंचायत चुनाव करा दिए जायेंगे पर अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है. अब उम्मीद जतायी जा रही है कि 2022 में ही गर्मी के मौसम में चुनाव हो पायेगा. इसमें भी कोरोना से उठे स्थिति पर नजर रखी जायेगी. ऐसे में जब तक चुनाव नहीं होगा तब तक सभी जनप्रतिनिधि गदगद हैं. ऐसा इसलिए भी इनमें कई ऐसे हैं जिन्हें दोबारा चुनकर वापस लौटने की उम्मीद कम हैं. कई जगह परिसीमन व आरक्षण में बदलाव की वजह से भी चुनाव लड़ने से वंचित होंगे.

 

लगे हैं आपके अधिकार-आपकी सरकार,आपकी द्वार कार्यक्रम को सफल बनाने में

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने 16 नवंबर से 29 दिसंबर तक आपके अधिकार-आपकी सरकार,आपकी द्वार कार्यक्रम चला रही है. ऐसे में इसके तहत चलाये जा रहे कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राज्यभर के 4 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के मुखिया लगे हुए हैं. राशन कार्ड, आधार कार्ड बनवा रहे हैं. पेंशन योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए दिन-रात लगे हुए हैं. कुछ मुखियाओं का कहना है कि इन कार्यो का खर्चा वे स्वयं ही वहन कर रहे हैं,सरकार ने कुछ खास फंड नहीं दिया है. बावजूद इसके दो एक्सटेंशन का जो गिफ्ट मिला है उसके कारण कुछ बोल नहीं पा रहे हैं.

 

2300 करोड़ से अधिक राशि मिली हुई है

त्रिस्तरीय ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2020-21 और वित्तीय वर्ष 2021-22 को मिलाकर लगभग 2313.500 करोड़ रुपये आवंटित किए गये हैं. 15वें वित्त आयोग से अनटाइड व टाइड ग्रांट से यह राशि दी गयी है. इसमें 1200 करोड़ तक की राशि खर्च की गयी है. सबसे दिलचस्प बात यह भी है कि इसमें अधिकांश राशि इसी वित्तीय वर्ष में खर्च हुई वह भी कार्यकारी समिति के जरिये. अगर समय पर चुनाव होता तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने का अवसर नये चुनकर आये जनप्रतिनिधियों के पास होता.

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