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पशुपालन विभाग के तीन अधिकारियों पर फाइल मूवमेंट के नाम पर घूस लेने का आरोप, विभागीय सचिव से जांच की मांग  

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Ranchi : पशुपालन विभाग के तीन पदाधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में ईमानदार नहीं हैं. विभागीय संचिकाओं के निष्पादन में भी वे रिश्वत लेते हैं. अवर सचिव सुमन कुमार शाही, सांख्यिकी पदाधिकारी अनूप कुमार प्रसाद और सहायक प्रशाखा पदाधिकारी रंजीत ओझा स्थापना संबंधी संचिकाओं को वर्षों तक लंबित रखते हैं.

सरायकेला खरसावा के जिला गव्य विकास पदाधिकारी अनिल कुमार ने पशुपालन विभाग के सचिव को एक पत्र भेजकर यह आरोप लगाया है औऱ शिकायत की है. उन्होंने सचिव से इन तीनों पदाधिकारियों के कार्यकलापों के जांच करने की भी मांग की है.

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अनूप प्रसाद को मिली अवैध पदोन्नति

पत्र में कहा गया है कि पशुपालन विभाग में अनूप कुमार प्रसाद की नियुक्ति अनुकम्पा पर हुई थी. उस समय सांख्यिकी गणक के पद पर नियुक्त इस पदाधिकारी ने अपने संपर्क का इस्तेमाल कर लगातार पदोन्नति पायी. अवैध तरीके अपनाये गए.

अभी वे सांख्यिकी पदाधिकारी सह निकासी और व्ययन पदाधिकारी के भी पद पर कार्यरत हैं. जबकि उनके साथ योगदान किये कई लोग सांख्यिकी गणक के पद पर रहते ही रिटायर्ड भी हो चुके हैं. वे मूल रूप से एक कार्यालय कर्मी हैं. अगस्त, 2020 में वे रिटायर्ड होंगे. उनकी सेवा पुस्तिका का सहारा लेते हुए नियुक्ति मामले की जांच की जानी चाहिये.

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रंजीत के कारण हाईकोर्ट में पड़ चुकी हैं कई याचिकाएं 

रंजीत ओझा सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर हैं. वे स्थापना सहायक का काम भी करते हैं. कार्यालय रोज लेट आते हैं. एमसीपी, डे वार्षिक वेतन वृद्धि, सेवा संपुष्टि एवं पदोन्नति आदि से संबंधित संचिकाओं को वर्षों तक लटकाकर रखा जाता है. उनके रवैये के कारण हाईकोर्ट में कई रिट पिटिशन फाइल हो चुके हैं. उनके कार्यों की समीक्षा किये जाने की जरूरत है.

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एसटी महिला की अनुकम्पा पर नियुक्ति की फाइल 6 माह से है अटकी

लेटर में कहा गया है कि रंजीत ओझा ने बसंती देवी की अनुकम्पा पर नियुक्ति संबंधी फाइल को 6 माह से रोके रखी है. इस एसटी महिला के सभी कागजात सही होने के बावजूद उसे चपरासी के पद पर नियुक्त नहीं किया गया है. एक टवेरा गाड़ी (कार) का अनधिकृत रूप से 2018 से उपयोग कर रहे हैं. इसके बावजूद वे परिवहन भत्ता ले रहे हैं.

अवर सचिव वसूलते हैं रिश्वत

पत्र में अवर सचिव सुमन कुमार शाही पर रिश्वत लिए जाने का आरोप लगाया गया है. शाही द्वारा राज्यकर्मियों से विभिन्न स्थापना संबंधी कार्यों के लिए नाजायज तौर पर राशि ली जाती है. कई बार पैसे लिए जाने के बावजूद भुक्तभोगियों का काम नहीं किया जाता है.

किसी कर्मी के सेवा संपुष्टि, एमएसीपी, पदोन्नति वगैरह जैसे कार्यों के लिए 25,000 रुपये तक की राशि काम के एवज में वसूली जा चुकी है. बगैर पैसा लिए संचिका प्रारंभ नहीं की जाती है.

गव्य विकास पदाधिकारी ने सचिव से इन तीनों के मामले में जल्दी से जल्दी जांच कराये जाने का आग्रह किया है. उन्हें स्थापना संबंधी कार्यों से हटाये जाने का भी अनुरोध किया है.

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