Main SliderRanchi

पलामू, गढ़वा, गिरिडीह और रांची में मनरेगा की हजारों योजनाएं अधूरी, सबसे बेहतर रामगढ़

Akshay Kumar Jha

Ranchi: अनल़ॉक की प्रक्रिया शुरू है. राज्य सरकारों के सामने सबसे अहम मुद्दा बाहर से लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने का है. झारखंड में मनरेगा को बेरोजगारी खत्म करने का सबसे अहम हथियार माना जा रहा है. यहां तक कि मनरेगा की तरह ही मुख्यमंत्री श्रमिक योजना की भी शुरुआत हुई है.

इस योजना के तहत शहरी इलाकों में प्रवासी मजदूरों को काम दिया जाना है. लेकिन जब राज्य में जिलेवार मनरेगा योजना का हाल देखा गया तो जो नतीजा सामने आया वो चौंकाने वाला है. ऐसे कई जिले हैं जहां हजारों की तादाद में योजनाएं अधूरी हैं. इन योजनाओं के पीछे होने की वजह मनरेगा के प्रति डीसी का सुस्त रवैया बताया जा रहा है. जिला प्रशासन का दबाव नहीं होने से जिले में मनरेगा का ये हाल है.

इसे भी पढ़ेंःCoronaUpdate: संक्रमण से झारखंड में 15वीं मौत, रिम्‍स के कोविड वार्ड में 24 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम

पलामू और गढ़वा में मनरेगा की हालत सबसे खराब

राज्य में पलामू और गढ़वा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. जबकि ये दोनों जिले ऐसे हैं जहां रोजगार के लिए ज्यादा कल कारखाने नहीं हैं. सरकारी योजनाओं से ही लोगों को इस जिले में रोजगार मिलता है. बावजूद इसके इन जिलों में मनरेगा की हालत खास्ता है. पलामू की बात करें तो यहां कुल 45,514 योजनाएं अधूरी पड़ी हैं.

4848 ऐसी योजनाएं हैं जिसपर आजतक तक एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया. वहीं 15,317 योजनाओं पर एक साल से खर्च नहीं हुआ है. 2551 ऐसी योजनाएं है जिनपर प्रशासन की तरफ से दो साल में एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ है. वहीं गढ़वा की बात करें तो यहां 41,302 योजनाएं अधूरी हैं. 11,503 योजनाओं पर आजतक एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ. 11,702 योजनाओं पर पिछले एक साल से कोई खर्च नहीं तो वहीं 1576 योजनाओं पर दो साल से एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ है. पलामू में 1912 ही योजनाओं पर प्रशासन की तरफ से 100 फीसदी खर्च किया गया है. वहीं गढ़वा में 605 ऐसी योजनाएं हैं, जिसपर 100 फीसदी खर्च हुआ है.

रामगढ़ की स्थिति बेहतर

हजारीबाग से कट कर रामगढ़ एक छोटा सा जिला बना. लेकिन मनरेगा के मामले में यह जिला सभी जिलों से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है. यहां 5468 योजनाएं ऐसी हैं जो अधूरी हैं. सिर्फ 935 ऐसे मामले हैं जिसपर प्रशासन ने एक रुपए भी खर्च नहीं किये हैं. वहीं 1054 योजनाओं पर पिछले एक साल से खर्च नहीं हुआ है और 187 योजनाओं पर पिछले दो साल से खर्च नहीं हुआ है. 21 ऐसे मामले हैं जिसपर 100 फीसदी खर्च हो चुका है.

इसे भी पढ़ेंःपाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में आत्मघाती हमला, पांच लोगों की मौत

जानें जिलावार मनरेगा योजना का हाल

जिलाअधूरी योजनाएंएक रूपये

भी खर्च नहीं

एक साल से

कोई खर्च नहीं

दो साल से

कोई खर्च नहीं

पलामू455144848153172551
गढ़वा4130211503117021576
गिरिडीह337483472124472117
रांची28517377366101138
देवघर24541252865372065
दुमका24278434266151277
चतरा22934224458152151
साहेबगंज21634419156291210
गोड्डा20965343165731256
बोकारो2004228624422640
धनबाद19799240257751458
गुमला1974120045210825
पश्चिमी सिंहभूम19501380844601276
पूर्वी सिंहभूम1723619603329612
पाकुड़17047260440841258
लातेहार1685224913100804
खूंटी1580713214816238
सरायकेला खरसावां1421919512760501
हजारीबाग1412429201819461
जामताड़ा1390012613071649
सिमडेगा1301914642008215
कोडरमा677518381228319
लोहरदगा676610421884263
रामगढ़54689351054187

इसे भी पढ़ेंःएक दिन के ठहराव के बाद फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें क्या है आज का भाव

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: