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लॉकडाउन में हजारों अप्रवासी मजदूर झारखंड आये, उनके बच्चों का छूट गया स्कूल

Uday Chandra

New Delhi : लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से झारखंड लौटे अप्रवासी मजदूरों के साथ आये 32,980 से अधिक बच्चों की शिक्षा अधर में है. लॉकडाउन से पहले ये सभी बच्चे स्थानीय स्कूलों में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान उत्पन्न स्थिति के कारण इन बच्चों को अपने माता-पिता के कारण वापस अपने प्रदेश झारखंड लौटना पड़ा था. ऑनलाइन शिक्षा से दूर इन बच्चों को फिर से स्कूलों में दाखिला कराने को लेकर झारखंड सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हुई है. झारखंड सरकार के पास इस बात की भी कोई जानकारी नहीं है कि ये बच्चे अपनी आगे की पढ़ाई कैसे कर रहे हैं.

इसका खुलासा मंगलवार को शिक्षा, महिला, बाल व खेल पर बनी संसद की स्थायी समिति की बैठक में हुआ. बैठक में सभी राज्यों के अप्रवासी मजदूरों के बच्चों की शिक्षा पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में ऑनलाइन शिक्षा की समीक्षा के साथ स्कूलों को दोबारा खोलने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गयी.

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बैठक में कई ऐसे राज्यों के आंकड़े भी पेश किये गये जहां अप्रवासी मजदूरों के बच्चो को स्थानीय स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो. मसलन मध्य प्रदेश में 206,417 स्कूली बच्चों में से 81,563 बच्चों ने फिर से कहीं न कहीं दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई शुरू कर दी है. बंगाल की स्थिति इस मामले में बेहद खराब है. बंगाल में अप्रवासी मजदूरों के 38,682 बच्चों की

पहचान की गयी जिनकी पढ़ाई लॉकडाउन के दौरान बंगाल वापस लौटने के कारण छूट गयी है. इनमें से एक भी बच्चे को दाखिला नहीं दिलाया गया है. बिहार में ऐसे बच्चों की संख्या 58,256 और कर्नाटक में 28,901 है. इन दोनों राज्यों का दावा है कि बच्चों को स्थानीय स्कूलों में एडमिशन दिलाने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इस दिशा में क्या प्रगति हुई है, इसे लेकर दोनों राज्य सरकारों के पास कोई

जानकारी नहीं है. इस मामले में दिल्ली सरकार का रिकार्ड ठीक है, जहां 208 बच्चों की पहचान की गयी थी और इन सभी बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है. तमिलनाडु ने भी प्रशंसनीय कार्य किया है. वहां 5971 बच्चों की पहचान की गयी थी, उनमें 5863 बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसी माह एक दिशा निर्देश जारी कर प्राथमिकता के आधार पर सभी अप्रवासी मजदूरों के बच्चों की पहचान कर उनकी शिक्षा की व्यवस्था करने को कहा है. दिशा निर्देश में साफ कहा गया है कि 6 साल से 18 साल के ऐसे सभी बच्चों की पहचान करें, जिनके माता-पिता को लॉकडाउन के दौरान अपना कार्यस्थल बदल कर वापस अपने गांव लौटना पड़ा है.

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