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वन मेले के हजार रंग, बोलो क्या-क्या खरीदोगे

महुआ तेल, सांप बिच्छू के लिये महुआ केक, मुजकुंब, साल पत्ते की टोपी 

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लगे है 44 स्टॉल, अलग-अलग जंगली उत्पाद कर रहे हैं लोगों को आकर्षित

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Ranchi : वन विभाग की ओर से वन मेला का आयोजन पलाश भवन परिसर में किया गया है. जिसका शुभारंभ शनिवार को किया गया. तीन दिवसीय मेला में आकर जानकारी होगा कि राज्य की प्राकृतिक संपदा कितनी बहुमूल्य है. यहां न सिर्फ वन उत्पाद बल्कि अन्य कृत्रिम घर सजावटी वस्तुएं, सौंदर्य प्रसाधन, होम डेकोर, शहद, चांदी के आभूषण, टेराकोटा आइटम समेत अन्य सामान भी मिल रहे है. मेला का उद्घान वन विभाग के सचिव इंदू शेखर चतुर्वेदी ने किया.

इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को ये जानकारी नहीं है कि यहां कितने बहुमूल्य उत्पाद पाये जाते है, ग्रामीणों को इसकी जानकारी है, लेकिन शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के नहीं खरीदने से ये वस्तुएं बनाती ही नहीं. इतना ही नहीं जानकारी के आभाव में इन ग्रामीणों का हुनर तो बर्बाद हो ही रहा है, साथ ही इनको आर्थिक लाभ भी नहीं मिल रहा. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीणों को एक पटल मिलेगा. मेला में 44 स्टॉल लगे हैं.

ग्रामीण महिलाओं के लिये अवसर


इस दौरान मीता चतुर्वेदी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के लिए ये अच्छा अवसर है. जहां ये अपने हुनर को एक पटल पर ला सकती हैं. उन्होंने कहा कि मेला में राज्य भर के ही लोग हैं और वो भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को ही यहां लाया गया है. जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण हुनर को सामने लाना, साथ ही इनके उत्पादों से लोगों को रू-ब-रू कराना है. ताकि लोग समझे कि हमारे पास भी ऐसे सामान है, जिसका उपयोग होना चाहिए.

जंगली जड़ी बूटियों के कई स्टॉल

 

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मानदेय से मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है, इच्छाएं पूरी नहीं होती

मेला में जंगली जड़ी बूटियों के कई स्टॉल लगे है. जो लातेहार, दलमा, बोकारो समेत अन्य स्थानों से लगाए गए है. इन स्टॉलों में झारखंड के जंगलों में पाए जाने वाले मुजकुंब फल, मेंदा पत्ता, गुमर पाउडर, लीमा पाउडर, गुड़माड़, महुआ तेल, मच्छर और सांप भगाने के लिए महुआ केक आदि मिल रहे है. जामताड़ा भेलाडीह गांव के गोपीनाथ मंडल ने जानकारी दी कि लोग मुहआ तेल के बारे में जानते ही नहीं है. जबकि इस तेल का प्रयोग मॉश्‍चरायजर के साथ ही खाद्य तेल के रूप में भी किया जाता है. वहीं इस महुआ तेल के अपशिष्ट पदार्थों से ही महुआ केक बनाया जाता है, जो सांप, बिच्छु भागने में काम आता है.

प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन भी मौजूद 

जंगली उत्पादों के सौंदर्य प्रसाधन भी मेला में मिल रहे हैं. जिसमें फुट स्क्रब, फेस पैक, सिंदूर, काजल, हेयर ऑयल, साबून समेत अन्य सभी चीजें मिल रही हैं.जमशेदपुर से आयीं महिलाओं ने जानकारी दी कि वे ये सभी सौंदर्य सामग्री जंगली उत्पादों से बनाती हैं. जिसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है. इन सामानों को बनाने ले लिए नीम, गुलाब, तुलसी, हल्दी, काजल के लिए कपड़ा और करंज तेल समेत अन्य का इस्तेमाल किया जाता है.

गोंदा और सिसल पत्ते के बने चटाई और डोकरा

नदी किनारे पाये जाये वाले गोंदा घास से महिलाओं ने कोस्टर, चटाई, डोकरा, पेपर मैसी, वॉल हैंगिंग आदि का स्टॉल लगाया है. घोड़ाबांध से आयी देवला मुर्मू ने जानकारी दी कि ये सभी उत्पाद महिलाएं हाथ से बनाती है. इसके लिए गोंदा पत्ता लाने के लिये नदी किनारे जाना पड़ता है. वहीं लातेहार से आयी महिलाओं ने बताया कि उन्होंने सीसल पत्ते से चटाई समेत अन्य डेकोर आइटम बनाया है. इस पत्ते को पूर्ण विकसित होने के लिये चार साल का समय लगता है. ऐसे में ये महिलाएं पौधरोपण भी करती हैं.

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