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झारखंड के वो दो ऐसे परिवार: जिसने खुद, फिर पत्नी और इस बार अपनी लाडली को बनाया है उम्मीदवार

Akshay Kumar Jha

Ranchi: अपनी राजनीतिक विरासत सहेज कर रखने की परंपरा राजनीति में पुरानी है. भले ही परिवारवाद हमेशा से राजनीति का अहम मुद्दा बनता रहा है. लेकिन इसपर गौर सिर्फ चुनावी मौसम के भाषणों में ही होता है. झारखंड की 81 में से इस बार दो सीट ऐसी है, जहां से नेता जी खुद विधायक बने, फिर मंत्री बने और समीकरण बिगड़ने पर अपनी पत्नी को मैदान में उतारा. लेकिन अब इसबार दोनों परिवार घर की बेटियों पर 2019 के चुनाव में दांव खेला जा रहा है.

एक परिवार बड़कागांव से योगेंद्र साव का है, वहीं दूसरा परिवार कोलेबिरा विधानसभा के एनोस एक्का का है. दोनों ही उम्मीदवार अपने पिता के राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए चुनाव की तैयारी में जोरों से जुटी हुई हैं. दोनों सिंगल हैं.

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योगेंद्र साव की बेटी अंबा प्रसाद ने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है तो एनोस की बेटी आईरिन एक्का ने अमेटी यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई पूरी की है.

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क्या योगेंद्र की एलएलबी बेटी हैट्रिक लगाकर विधानसभा का इतिहास दोहरायेगी

हजारीबाग जिले के बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में हैट्रिक लगाने का इतिहास पुराना रहा है. महेश राम ने जनसंघ के दीपक छाप पर चुनाव लड़ते हुए 1964 से 1974 तक लगातार तीन बार विधायक बने. इसके बाद सीपीआई से चुनाव लड़ते हुए रमेंद्र कुमार 1979 से 1989 तक लगातार तीन बार जीत कर हैट्रिक लगायी.

1994 में बीजेपी ने वहां के लोकनाथ महतो को टिकट दिया, उन्होंने भी विधायकी में हैट्रिक लगायी. लेकिन उनका जीत का पहिया 2009 में योगेंद्र साव ने रोक दिया. पहली बार जीतने के बाद योगेंद्र साव सरकार में मंत्री भी बने. लेकिन कई विवादों में पड़ने के बाद 2014 में उनकी पत्नी निर्मला देवी ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा और जीतीं.

2019 में फिर से एक बार कांग्रेस ने योगेंद्र साव के परिवार पर ही भरोसा जताया है. योगेंद्र साव की वकील बेटी अंबा प्रसाद चुनावी मैदान में हैं. उनमें सामने बीजेपी से जीत की हैट्रिक लगाने वाले लोकनाथ महतो तो आजसू से सांसद सीपी चौधरी के भाई रोशन लाल चौधरी मैदान में हैं. देखने वाली बात होगी कि अंबा प्रसाद परिवार की जीत की हैट्रिक लगा पाती है, या विधानसभा के इतिहास को नहीं दोहरा पाती हैं.

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क्या एनोस की एमबीए बेटी लौटा पाएगी पापा की राजनीतिक विरासत

कोलेबिरा से एनोस एक्का ने जीत की हैट्रिक पहले ही लगा रखी है. लेकिन पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या के आरोप में उन्हें उम्र कैद की सजा हुई और उनकी विधायकी चली गयी. 2005 में एनोस एक्का ने जनक्रांति पार्टी से विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे, तो 2009 और 2014 में झारखंड पार्टी से चुनाव लड़कर उन्होंने जीत दर्ज की.

सजा होने के बाद 2018 के उपचुनाव में एनोस की पत्नी ने पति के विरासत को संभालने की कोशिश की. लेकिन वो कांग्रेस के प्रत्याशी विक्सल कोंगाड़ी से हार गयीं. ठीक एक साल बाद फिर से एनोस एक्का जमानत पर बाहर हैं. उन्होंने परिवार की राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए अपनी बेटी आईरिन एक्का को मौदान में उतारा है.

कहा जाए तो कोलेबिरा सीट पर यूथ आपस में भिड़ रहे हैं. कांग्रेस के विक्सल कोंगाड़ी को एक युवा नेता के तौर पर देखे जाते हैं, तो बीजेपी के सुजन जोजो सिर्फ 36 साल के हैं. वहीं झारखंड पार्टी से आईरिन एक्का, जो सिर्फ 25 साल की हैं, मैदान में हैं. देखना दिलचस्प होगा कि पापा की दोनों लाडली आखिर क्या करती है.

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