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रांची के वो नेता, जो लोकसभा चुनाव 2019 में नहीं हैं सक्रिय

दर्जनों नेताओं की गतिविधियां इस बार के चुनावों में नहीं दिख रहीं

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Ranchi: लोकसभा चुनाव 2019 में रांची के कई नेता सक्रिय नहीं हैं. 2014 में इनकी सक्रियता काफी अधिक थी. अब न तो ये कहीं रैलियों में दिख रहे हैं और न ही चुनावी सभा में.

ऐसे दर्जन भर नेता चुनाव की गहमागहमी से बिल्कुल अलग हो गये हैं. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी, समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोहर यादव, जदयू नेता अभय सिंह, पूर्व राजद नेता जय सिंह यादव, कांग्रेस के नेता रौशन केरकेट्टा, राजद के मनोज पांडेय, राजद के प्रदेश प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार, राजद के ही रामकुमार यादव, अफरोज आलम, झारखंड पार्टी के नेता, पूर्व विधायक केशव महतो कमलेश, गीताश्री उरांव, आरपी राजा, और अन्य प्रमुख हैं.

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इस बार इन नेताओं की किसी प्रकार की गतिविधियां चुनाव के दौरान नहीं दिख रही हैं. 2014 में इन नेताओं के पास काफी काम था.

2009 में निर्दलीय के रूप में विजयी रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी इस बार खामोश हैं. न तो मीडिया और न ही सोशल मीडिया कहीं उनका बयान तक नहीं आ रहा है.

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समाजवादी पार्टी की प्राथमिकता उत्तर प्रदेश में अधिक होने से झारखंड में उनके बड़े नेता नहीं आ रहे हैं. इसलिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मनोहर यादव भी कहीं नजर नहीं आ रहे हैं. मनोहर यादव ने राष्ट्रीय जनता दल छोड़ सपा का दामन थामा था.

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राजद प्रदेश अध्यक्ष और बड़े नेता के भाजपा में शामिल होने से हो रही परेशानी

राजद की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी और वरिष्ठ नेता गिरिनाथ सिंह के भाजपा में शामिल होने से राजद का कुनबा भी बिखरा है. इसकी वजह से पार्टी के मनोज पांडेय, प्रदेश प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार, रामकुमार सिंह यादव सरीखे नेता कहीं नजर ही नहीं आ रहे हैं.

पार्टी के नये प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा ही अभी चुनाव में अपने करीबियों के साथ सक्रिय हैं. पार्टी की तरफ से चतरा और पलामू में उम्मीदवार दिया गया है. इसलिए सबका फोकस इन्हीं दो संसदीय सीटों पर है.

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पार्टी आलाकमान लालू प्रसाद के केंद्रीय कारा में बंद होने की वजह से भी अब पटना से ही अधिकतर गतिविधियां हो रही हैं.

जदयू नेता भी नहीं हैं चुनावी समर में

राजग के सहयोगी दल होने की वजह से जदयू की गतिविधियां भी रांची समेत राज्य भर में सीमित हो गयी हैं. जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो काफी तामझाम से कांग्रेस में शामिल हुए थे.
उनकी जगह दूसरे को मिली.

पार्टी के एक बड़े नेता अभय सिंह और 2014 में राजद की सीट से चुनाव लड़नेवाले कैंडिडेट इस बार अपने में ही व्यस्त हैं. वहीं पार्टी के कई अन्य नेताओं का बयान तक चुनाव के दौरान नहीं आ रहा है.

कांग्रेसी भी पीछे नहीं

कांग्रेस के कई पूर्व विधायक लोकसभा चुनाव में अपनी भागीदारी नहीं निभा रहे. पूर्व मंत्री रहीं गीताश्री उरांव भी इनमें से एक हैं. उनके पति अरुण उरांव पार्टी की ओर से छत्तीसगढ़ में प्रभारी की भूमिका में हैं.

पूर्व विधायक केशव महतो कमलेश भी चुनावी समर में नहीं हैं. उनकी पकड़ ग्रामीण इलाकों मे अधिक है. इसी तरह प्रदीप तुलस्यान और अन्य नेताओं को कम तरजीह मिल रही है.

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