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इस महीने लगेगा झारखंड की राजनीति का सालाना उर्स

सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तैयारी में जुटे सरकार खोलेगी उपलब्धियों का पिटारा तो विपक्ष नाकामियों का

Ranchi : हर वर्ष बड़े ही हर्षौल्लास के साथ राजधानी रांची में उर्स लगता है. लेकिन इस वर्ष दिसंबर महीने में झारखंड में राजनीति का उर्स लगनेवाला है. राजनीति के इस उर्स में जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों के पिटारे को जनता के समक्ष रखेगी, वहीं विपक्ष सरकार की नाकामियों से जनता को रू-ब-रू करायेगा.

झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार के एक वर्ष पूरे होनेवाले हैं. यह ऐसा मौका होता है जब सरकार उपलब्धियां गिनाती है और विपक्ष नाकामियां बताने की कोशिश करता है. साल दर साल इस मौके पर ऐसे ही आरोप प्रत्यारोप लगते हैं जो राजनीति का सालाना उर्स है. एक बार फिर इसके लिए भी मंच तैयार हो रहा है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी विभागों के आला अधिकारियों से पिछले कुछ दिनों में बैठक कर साल भर की उपलब्धियों का रिकार्ड तैयार कर रहे हैं और अगले साल के लिए लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं, दूसरी ओर विपक्ष भी पूरी तरह से तैयार दिख रहा है. प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने इसको लेकर राज्यस्तरीय बैठक भी कर ली है और पार्टी नेताओं को सरकार की नाकामियों को जनता के बीच ले जाने का फरमान जारी कर दिया है.

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कोरोना के कारण गिनाने के लिए कुछ खास नहीं है सरकार के पास

29 दिसंबर को हेमंत सरकार का एक वर्ष पूरा हो रहा है. दो दिसंबर से ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी विभागों के आला अधिकारियों और मंत्रियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक कर रहे हैं. हर विभाग में नयी योजनाओं को शुरू करने का निर्देश दे रहे हैं. चुनाव के समय जनता से जो वादा किया था, उस पर भी काम कर रहे हैं.

विभागीय बैठक के साथ ही मुख्यमंत्री ने डिनर डिप्लोमेसी के तहत यूपीए विधायकों के साथ बैठक कर सालाना उर्स के लिए टास्क भी दिया है. हालांकि सत्ता पक्ष के पास तैयारियों के बावजूद काम दिखाने के लिए कुछ खास नहीं है. सरकार बनने के कुछ दिनों बाद कोरोना का संक्रमण शुरू हो गया और सरकार ने नयी-पुरानी योजनाओं के लिए वित्तीय पाबंदियां लगा दीं. इस कारण तमाम छोटे-बड़े काम रुक गये. विकास योजनाएं पूरी तरह से ठप रहीं और अब लगभग 9 महीने बाद कुछ-कुछ काम शुरू हो रहा है.

प्रवासी मजदूरों को लाने का श्रेय लेकिन उनके फिर से पलायन का जिम्मेदार कौन?

कोरोना संक्रमण काल में सरकार ने अन्य राज्यों में फंसे झारखंड के मजदूरों की वापसी के लिए कई प्रबंध किये. इसका श्रेय वह लगातार ले रही है. इसके साथ ही सरकार ने कहा था कि मजदूरों को दूसरे राज्यों में वापस जाने नहीं देंगे. यहीं पर रोजगार मिलेगा. रोजगार न मिला तो बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. मजदूर वापस चले गये और इस कारण मिले अपयश का भागीदार कोई न कोई तो जरूर होगा.

बाबूलाल के नेतृत्व में भाजपा कर रही है तैयारी

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के नेता सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ने जा रहे हैं. संक्रमण काल में जो भी काम किये गये हैं उसमें से अधिसंख्य मामलों के लिए भाजपा केंद्र सरकार को क्रेडिट देती है और यहां की सरकार को कठघरे में खड़ा करती है. भाजपा रोजगार और किसानों को मुआवजा देने के मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्लान बना रही है. सोशल मीडिया पर तो भाजपा के नेता इस मुहिम को हवा देना शुरू कर चुके हैं.

भाजपा के नेता एक साल में पांच लाख रोजगार को टैग कर लगातार ट्विटर पर सन्देश वायरल कर रहे हैं. 3 दिसंबर को भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी डॉ सुभाष सरकार ने प्रदेश पदाधिकारियों, मंच-मोर्चा के अध्यक्ष्यों और जिला अध्यक्षों के साथ मैराथन बैठक कर सरकार की नाकामियों को जन-जन तक पहुंचाने का टास्क दिया है. भाजपा की एक टीम सरकार की नाकामियों का कार्ड तैयार करने में जुट गयी है. समय के साथ नये मोर्चे भी खुलेंगे. राजनीति पूरे महीने उफान पर होगी.

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