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इसी वर्ष आधा दर्जन से अधिक कंपनियों को बेचने की तैयारी में केंद्र, जानियें कौन सी कंपनियां बिकने वाली हैं  

New Delhi :  एअर इंडिया को बेचने के बाद कंद्र सरकार अब निजीकरण और विनिवेश लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी में है. इस वित्त वर्ष 2021-22 में यानी मार्च 2022 तक मोदी सरकार की योजना आधा दर्जन से अधिक कंपनियों के निजीकरण या विनिवेश की तैयारी में है. बता दें कि मोदी सरकार अपने आरंभ से ही निजीकरण की हिमायती रही है.

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मोदी की केंद्र सरकार ने शुरू से ही सुधार उन्मुख और निजीकरण समर्थक की छवि बनाई है. सरकार का मानना है कि कई सेक्टर ऐसे हैं जिनमें सरकारी कंपनी की जरूरत नहीं है. सरकार को कारोबार में नहीं रहना चाहिए. इसी तरह लगातार घाटे में चल रही कंपनियों का निजीकरण या विनिवेश कर देना ही अच्छा होगा. हालांकि इस नीति का विरोध भी हो रहा है.

बता दें कि केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. लेकिन अभी तक सरकार को Axis Bank, एनएमडीसी, हुडको आदि में हिस्सेदारी की बिक्री से सिर्फ 8,369 करोड़ रुपये और हाल में एअर इंडिया की बिक्री से करीब 18 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. अभी तक करीब 26,369 हजार करोड़ रुपये ही जुटाया जा सका है. आइये देखते हैं, इस कतार में और कौन सी कंपनियां हैं.

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IDBI Bank

IDBI Bank के विनिवेश प्रक्रिया को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इस वित्त वर्ष के अंत तक इसे भी कर देने का लक्ष्य है. पिछले छह साल में सरकार सरकारी कंपनियों के विनिवेश से करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस वित्त वर्ष के अंत तक सरकार एलआईसी का कुछ हिस्सा बेचने के लिए आईपीओ लेकर आएगी. सरकार ने Container Corporation of India (Concor) को भी बजट के दौरान आईपीओ यानी लिस्टिंग की सूची में रखा था.

एलआईसी का विनिवेश इसी वर्ष

सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का विनिवेश इस वित्त वर्ष के अंत यानी मार्च 2022 तक कर लेने का लक्ष्य है. ऐसा अनुमान है कि सरकार इसकी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 80 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. यह भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है. इसका वैल्यूशन 8 से 10 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है. यानी अगर सरकार ने इसकी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेची और वैल्यूएशन उच्च स्तर पर रहा तो अकेले एलआईसी से ही एक लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं.

BPCL का निजीकरण होगा

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) का सरकार पूरी तरह से निजीकरण करने जा रही है. इसके लिए दिसंबर तक फाइनेंश‍ियल बिड आमंत्रित किए जा सकते हैं. इसके लिए वेदांता, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और थ‍िंक गैस जैसी कंपनियों ने रुचि दिखाई है. इसमें केंद्र सरकार अपनी पूरी 52.98% हिस्सेदारी बेच सकती है जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 52,200 करोड़ रुपये है. (फाइल फोटो)

CELकी बिक्री के लिए कोशिशें तेज

एअर इंडिया के सफल निजीकरण के बाद अब मोदी सरकार ने एक और सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) की बिक्री के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं. सरकार को इस कंपनी की बिक्री के लिए फाइनेंशियल बिड हासिल हो गए हैं. वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी है कि सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) की 100 फीसदी हिस्सेदारी और मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर करने के लिए सरकार को  बिड हासिल हो गया है.

आईडीबीआई बैंक का निजीकरण

कैबिनेट ने IDBI बैंक में रणनीतिक विनिवेश और मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर के लिए मंजूरी दे दी है. इस बैंक में केंद्र सरकार और एलआईसी की कुल मिलाकर 94 फीसदी हिस्सेदारी है. एलआईसी की 49.24 फीसदी और सरकार की 45.48 फीसदी. इसके अलावा 5.29 फीसदी हिस्सेदारी अन्य की है. वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करते हुए कहा था कि IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया मौजूदा वित्त वर्ष में ही पूरी होगी.

SCI का निजीकरण होगा

Shipping Corp of India (SCI) का भी मार्च 2022 से पहले निजीकरण किया जाना है. इसमें भी सरकार अपनी पूरी 63.75 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है. तुहीन कांत पांडे ने बताया था कि इसके लिए भी कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है. इसमें तीन कंपनियों का नाम फाइनल किया गया है जिनके बीच प्रतिस्पर्धा होगी. ये कंपनियां हैं-अमेरिका की Safesea, हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर और रवि मल्होत्रा के नेतृत्व वाला एक कंसोर्टियम. रवि मल्होत्रा SCI में काम कर चुके हैं.

Pawan Hans का निजीकरण

सरकार पिछले कई साल से हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी पवन हंस (Pawan Hans Limited) से बाहर जाना चाहती है, लेकिन इसका निजीकरण कायमाब नहीं हो पा रहा. अब सरकार ने मार्च 2022 से पहले इसकी बिक्री का लक्ष्य रखा है. पवन हंस के निजीकरण के लिए भी सरकार को कई कंपनियों से बिड मिला है.

नीलांचल इस्पात निगम का भी निजीकरण

इस वित्त वर्ष के अंत तक नीलांचल इस्पात निगम का भी निजीकरण किया जाना है. Neelachal Ispat Nigam Ltd (NINL) के निजीकरण के लिए भी सरकार को कई कंपनियों से ईओआई मिला है. इसका भी मार्च 2022 से पहले निजीकरण किया जाना है. यह असल  में केंद्र सरकार की कई  कंपनियों MMTC, NMDC, BHEL, MECON और ओडिशा सरकार की दो कंपनियों OMC और IPICOL के बीच संयुक्त उद्यम है.

BEML का होगा विनिवेश

इस वित्त वर्ष के अंत तक सरकार ने BEML के भी विनिवेश का लक्ष्य रखा है, जिसे पहले भारत अर्थ मूवर्स के नाम से जाना जाता था. 1964 में स्थापित यह कंपनी रेल के कोच और स्पेयर पार्ट्स तथा माइनिंग इक्विपमेंट बनाती है. सरकार की इसमें करीब 54.03% हिस्सेदारी है जिसमें से वह सिर्फ 26% हिस्सेदारी बेचेगी. इसके लिए कई निजी कंपनियों ने रुचि दिखाई है.

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