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इस बार UPA की बैठक में नहीं चूकेगी कांग्रेस, तय हुई रणनीति, लगा सकती है ऊंची बोली, नेतरहाट फायरिंग रेंज जैसे मुद्दों पर होगी बेबाकी से बात

Akshay Kumar Jha

Ranchi: कांग्रेस और जेएमएम की गठबंधन सरकार में ऑल इज वेल है, ये ठोक कर कभी किसी ने नहीं कहा. सदन से सड़क तक हमेशा कांग्रेस की नाराजगी साफ तौर पर देखने को मिली है. कई बार कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेता सीएम हेमंत सोरेन के सामने अपनी बात रखने की कोशिश भी की. लेकिन बात हमेशा आयी-गयी ही रही. बात विभागीय बोर्ड के बंटवारे, पेट्रोल में सब्सिडी या फिर नेतरहाट फायरिंग रेंज की अवधि विस्तार पर रोक लगाने की हो. कांग्रेस की भवें हमेशा जेएमएम के फैसले पर तनी रही हैं. हद तो यह है कि बड़े फैसलों के बारे में कांग्रेस को पता भी नहीं रहता और फैसला सरकार की तरफ से ले लिया जाता है. अभी दो दिनों पहले सीएम हेमंत सोरेन ने नेतरहाट फायरिंग रेंज की अवधि विस्तार पर रोक लगा दी है. काफी दिनों से ये मांग थी कि फायरिंग रेंज को अवधि विस्तार ना दिया जाए. सीएम हेमंत सोरेन के इस फैसले से कांग्रेस खुश नहीं है. वजह यह कि फैसले से पहले कांग्रेस से पूछा तक नहीं गया कि ऐसा किया जाए या नहीं. कुछ कांग्रेस के दिग्गजों ने कहा कि उन्हें भी मीडिया के माध्यम से फैसले की जानकारी मिली.

 

इस मौके को कांग्रेस चूकना नहीं चाहती

कांग्रेस के विधायक और पदाधिकारी हमेशा से दबी जुबान से जेएमएम की ओर से इग्नोरेंस की बात करते आए हैं. साफ कहते हुए सुना गया है कि वो सरकार में शामिल तो हैं, लेकिन उनकी सुनी नहीं जाती. यहां तक कि यूपीए की बैठक में भी खुद कांग्रेस एक बार शामिल नहीं हुई थी. एक बार फिर से गठबंधन सरकार में शामिल जेएमएम को कांग्रेस की जरूरत पड़ी है. दरअसल निर्वाचन आयोग में सीएम हेमंत सोरने से जुड़े खनन लीज मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद ऐसा माहौल बना है. निर्वाचन आयोग कभी भी अपना फैसला राज्यपाल को सुना सकता है. फैसला निगेटिव होगा या पॉजीटिव कहा नहीं जा सकता. लेकिन फिलहाल सधी हुई राजनीति यही कहती है कि अपने गठबंधन के साथियों को भरोसे में रखो. अब कांग्रेस अपना पूरा भरोसा देने के एवज में अपनी शर्तों पर बात करेगी. अपनी बात रखने या अपनी मांग ना पूरी की जाने की सूरत में आगे की कार्यवाही से जेएमएम को अवगत जरूर कराएगी. अगर कांग्रेस यह मौका चूकती है, तो फिर से कांग्रेस सरकार में शामिल तो रहेगी. लेकिन लेवल बैकफुट का ही लगा रहेगा.

Sanjeevani

 

ऊंची बोली भी लगा सकती है कांग्रेस

झारखंड सरकार में शामिल रहने के बावजूद दबी-कुचली सी कांग्रेस के इस बार तेवर तल्ख हैं. अंदरखाने में उत्साह इतना बढ़ा है कि बहकी-बहकी बाते भी हो रही हैं. कुछ कांग्रेसियों का कहना है कि अगर निर्वाचन आयोग का फैसला पूरी तरह से सोरेन परिवार के लिए निगेटिव आया तो कांग्रेस शर्तों के एवज में ऊंची बोली भी लगा सकती है. क्योंकि मौके पर चौका मारने की राजनीति की दस्तूर कहती है कि सत्ता किसी हाल में ना जाए. सत्ता ना सही उसकी चौखट जरूर हाथ आए.

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