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कभी पंक्चर लगाने वाले यह शख्स दोबारा बने कैबिनेट मंत्री

डॉ संतोष मानव

BHOPAL: अमर सिंह खटीक की मध्य प्रदेश के सागर में साइकिल पंक्चर की दुकान थी. वे दिन भर पंक्चर बनाते. उनकी छोटी-सी दुकान थी. बालक वीरेंद्र स्कूल से आता तो बस्ता पटक दुकान पहुंचता. वह भी पिता के साथ पंक्चर बनाता. उसका मन पढ़ाई में भी लगता था. वह पढ़ता गया, आगे बढ़ता गया.और अब इतना आगे बढ़ गया है कि शहर-राज्य के लोग उस पर गर्व करते हैं. कहते हैं-अपना वीरेंद्र. बात हो रही है बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने डॉक्टर वीरेंद्र कुमार खटीक की. यही पूरा नाम है उनका. वीरेंद्र कुमार खटीक 1996 से लगातार यानी 25 साल से लोकसभा सदस्य हैं. पहले सागर से थे. सागर ओपन सीट हो गया तो टीकमगढ़ से हैं. मोदी की पिछली सरकार में भी मंत्री थे. अब फिर मंत्री बने हैं. पर आज भी प्रिय सवारी है 25 साल पुरानी स्कूटर. उन्हें देखा जा सकता है, सागर या टीकमगढ़ में स्कूटर की सवारी करते हुए. कभी किसी विवाद में नहीं पड़ते. बयान देने से बचते हैं. अखबारों में छपने से बचते हैं. न अहंकार, न दिखावा. कह सकते हैं अजूबा मंत्री.

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वीरेंद्र खटीक जब पंक्चर बना रहे थे, तब से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा के नियमित स्वयंसेवक हैं.  नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे —— का गान करने वाले. और आज 67 साल की उम्र में भी नमस्ते सदा वत्सले का गान जारी है. वीरेंद्र खटीक सागर के डा. हरि सिंह गौर  यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एम. ए,  पीएचडी हैं. 1982 से पूर्णकालिक  राजनीतिक हैं. हेड मास्टर हो गए थे. इस्तीफा देकर पूर्णकालिक राजनीतिक बने थे. 1975  में मीसा बंदी के रूप में 16 माह सागर और जबलपुर की  जेल में रहे. अभाविप, भाजयुमो और बजरंग दल में विभिन्न पदों पर काम किया. डा. वीरेंद्र कुमार खटीक की सफलता बताती है कि पंक्चर की दुकान पर भी कमल खिलता है. डा. वीरेंद्र की सफलता  लोकतंत्र की खूबसूरती  है, विचारधारा के प्रति निष्ठा का परिणाम भी है और मेहनत के बूते सपने का साकार होना भी. अमर सिंह खटीक और उनकी पत्नी  सपना देखती थी कि बेटे की  सरकारी नौकरी हो जाए, अब देखिए कि बेटा ही सरकार हो गया.

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