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ये है सायकिल मेरी जान!!

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Rajesh Das

बिल्ली के भाग्य से छींका फूटता है. झारखंड की राजधानी रांची में शुरू हो रही साइकिल शेयरिंग योजना इसी कहावत को साकार कर सकती है. लोग इस सिस्टम को अच्छा रिस्पॉन्स देंगे, शहर में ट्रैफिक की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस बात की संभावना अधिक है. जब डिमांड आएगी तो सप्लाई भी होगा. लोग इन सायकिलों में मौजूदा  सड़कों पर चल रही अन्य मोटोराइज्ड गाड़ियों और पैदल राहगीरों के साथ चलेंगे, जो सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही नहीं है. धीरे-धीरे इन्हीं साइकिलों के लिए और सड़क पर पैदल चलनेवालों के लिए अलग और सुरक्षित लेन्स की मांग पहले से ज्यादा पुरजोर तरीके से उठने लगेगी और सरकार को हमारी पूर्व से जारी उन मांगों को पूरा करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.

अभी दुनिया के दूसरे देशों में सायकिल को लेकर क्या हो रहा है

  1. नीदरलैंड में सड़क यातायात का 27% हिस्सा सायकिल के द्वारा तय किया जाता है. उनकी सरकार सायकिल चलाने के लिए लोगों को प्रति किमी के दर से पैसे दे रही है, एम्प्लॉयर्स भी इस पूरे योजना के साथ खड़े हैं, वे भी अपने कर्मियों को $0.2 प्रति किमी के दर से सायकिल से ऑफिस आने के पैसे देंगे. इस प्रकार आपका सफर भी पूरा होगा, आप स्वस्थ भी रहेंगे और पैसे भी कमाएंगे. हां, रांची में अभी आपको चार्टर्ड सायकिल शेयरिंग योजना में पैसे जरूर लगेंगे, पर कोई बात नहीं, भविष्य पर दृष्टि रखिये.
  2. नीदरलैंड की सरकार देश में साइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 345 मिलियन यूरो खर्च कर रही है ताकि अगले 3 वर्षों में 2 लाख नए कंम्यूटर्स को साइक्लिंग से जोड़ा जा सके. यह साइक्लिंग के लिए उनके प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
  3. यूनाइटेड किंगडम अपने देश में कंपनियों को टैक्स ब्रेक दे रही है ताकि वे अपने कर्मियों के लिए सायकिल खरीद सकें और उन्हें अपने कर्मियों को लोन के रूप में दे सकें.
  4. बेल्जियम में 4 लाख सायकिल से चलने वाले लोगों को प्रति किमी के दर से पैसे दिए जा रहे हैं.
  5. लक्जमबर्ग में लोगों को नई इलेक्ट्रिक साइकिलों को खरीदने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स रिबेट दिए जा रहें हैं.
  6. फ्रांस भी सरकारी व्यक्तियों को 230 डॉलर का प्रीमियम दे रही है ताकि वे सायकिल से काम पर आ सकें.

यह सूची लंबी है और इसमें प्रतिदिन परिवर्तन हो रहा है, आप यह मान लीजिए कि सायकिल जो लगभग 400 वर्षों से हमारे जीवन का हिस्सा बना हुआ है, वह अब और भी ज्यादा मजबूत होने जा रहा है, और किसी भी सरकार की यह बिसात नहीं कि उन्हें बढ़ने से रोक सके.

सायकिल पर्यावरण के दृष्टिकोण से बहुत बढ़िया है और 7 किमी सायकिल चलाने पर आप कारों से किये जा रहे 1 kg या उससे भी अधिक कार्बन उत्सर्जन को कम करते हैं. यह आपकी तंदुरुस्ती को बढ़ाता है, स्ट्रेस के स्तर को कम करता है और मानसिक स्वास्थ्य को भी बढ़िया कर देता है.

भारत को भी अपने नागरिकों को सायकिल खरीदने के लिए इंसेंटिव और सब्सिडी देने की जरूरत है, साथ ही देश में पैदल चलने के लिए फुटपाथ, सायकिल चलाने के लिए हर श्रेणी की सड़क पर सिक्योर्ड सायकिल लेन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मल्टी मोडल सुविधाएं जनता को प्राप्त हो, यहीं से न्यू इंडिया को पाने का रास्ता मिलेगा.

श्रेष्ठ भारत के निर्माण के निमित्त और न्यू इंडिया की कामना सहित.

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