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यह है आरबीआई से केंद्र सरकार के विवाद की वजह : 3.6 लाख करोड़ कर्ज चाहती थी सरकार, RBI ने किया नामंजूर

New Delhi : वित्त मंत्रालय के एक प्रस्ताव ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच तनातनी की स्थिती बना दी है. दरअसल वित्त मंत्रालय की ओर से आरबीआई को एक प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें केंद्रीय बैंक के पास रखे 9.59 लाख करोड़ रुपये से 3.6 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस रकम को केंद्र सरकार को ट्रांसफर करने की बात कही गयी थी. साथ ही मंत्रालय की ओर से यह सुझाव भी दिया गया था कि जो सरप्लस रकम है, उसकी देखरेख आरबीआई और सरकार मिलकर कर सकते हैं. इसके अलावा इस मामले में मंत्रालय का ये भी मानना है कि आरबीआई के भंडार से जो पूंजी के ट्रांसफर सिस्टम जुड़ा हुआ है और इससे संबंधित शर्तें बैंक की आर्थिक खतरों को लेकर बेहद ‘रुढ़िवादी’ आकलन पर आधारित है. द इंडियन एक्सप्रेस ने अपने सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टी की है आरबीआई का मानना है कि यदि सरकार के द्वारा बैंक के भंडार से पूंजी लेने की कोशिश होती है तो इसका देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. साथ ही लिखा है कि यही वजह है कि आरबीआई ने मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया.

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आरबीआई ने  2017 में एकतरफा मंजूरी दे दी थी

वहीं जहां तक वित्त मंत्रालय का सवाल है तो उसने इसपर अपनी दलील दी है कि सरप्लस ट्रांसफर से जो वर्तमान सिस्टम जुड़ा हुआ है, उसे आरबीआई ने साल 2017 के जुलाई में ही एकतरफा मंजूरी दे दी थी, चूंकि बोर्ड की मीटिंग में सरकार की ओर से भेजे गये नामों में से दो सदस्य उपस्थित नहीं थे. वहीं सरकार की ओर से इस व्यवस्था पर सहमती नहीं है, जिससे इस मामले पर आरबीआई से लगातार सरकार बातचीत करना चाहती है. वहीं इसपर सरकार की भी राय है कि कैपिटल रिजर्व को लेकर आरबीआई का अनुमान जरूरत से ज्यादा है और इसी वजह से उसके पास 3.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि, इसके पीछे भी यही वजह भी है कि सरकार चाहती है कि पहले आरबीआई से सलाह किया जाये, जिससे कि इस रकम का इस्तेमाल किया जा सके. उदाहरण के लिये इस रकम का इस्तेमाल पब्लिक सेक्टर बैंकों को दोबारा पूंजी देने, बैंकों को ज्यादा कर्ज देने के लिये मदद के रूप में किया जा सकता है.

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मामले पर भी सरकार और केंद्रीय बैंक की अपनी अलग-अलग राय है

सूत्रों के हवाले से खबर तो यह भी है कि ,  वित्त मंत्रालय ने पूंजीगत जरूरतों के मद्देनजर ये प्रस्ताव भी दिया था कि 2017-18 से आरबीआई को पूरा सरप्लस सरकार को ट्रांसफर कर देना चाहिए. जबकि इस मामले पर भी सरकार और केंद्रीय बैंक की अपनी अलग-अलग राय है. मालूम हो कि 2017-18 में आरबीआई ने सरकार को 50,000 करोड़ रुपये का सरप्लस दिया था. जबकि 2016-17 में बैंक की ओर से 30,659 करोड़ रुपये ही सरकार को ट्रांसफर किया गया था. इसपर सरकार का मानना है कि  विश्व के दूसरे केंद्रीय बैंकों की तुलना में आरबीआई अपने कुल संपत्ती की तुलना में ज्यादा कैपिटल खुद के पास रखता है. और जहां तक आरबीआई का सवाल है तो वह अपना सरप्लस मुद्रा भंडार किसी भी तरह के बाजार जोखिम हो या फिर अन्य किसी तरह का आर्थिक खतरा हो , उससे निपटने के लिए रखता है.

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