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ऐसा झारखंड में ही संभव है- स्वास्थ्य विभाग के एक आरोपी कर्मचारी को एक माह का मानदेय देकर की गयी संविदा समाप्त

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Ranchi: झारखंड के बोकारो में एक मामला सामने आया है. मामला स्वास्थ्य विभाग का है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पाया है कि बोकारो में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलनेवाली योजना में करीब 7 करोड़ का घोटाला हुआ है.

जांच के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्रथम दृष्टया पाया है कि कसमार प्रखंड के प्रखंड लेखा प्रबंधक रामजय कुमार सिंह की इसमें मिली भगत है. इस मामले में लेखा प्रबंधक के अलावा तत्कालीन सीएस शशि भूषण सिंह समेत 10 लोग शामिल हैं.

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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने छह नवंबर 2018 को ही जांच कर रिपोर्ट विभाग को सौंप दी थी. वहीं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने नौ अगस्त 2019 को प्राथमिकी दर्ज की.

प्राथमिकी दर्ज होने के एक महीना बाद विभाग ने मामले को लेकर कार्रवाई की है. कार्रवाई करते हुए मामले में आरोपी रामजय कुमार सिंह की संविदा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गयी है. लेकिन अब इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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एक महीने के अग्रिम मानदेय को लेकर उठ रहे सवाल

प्रखंड लेखा प्रबंधक रामजय कुमार सिंह पर विभाग ने कार्रवाई तो की, लेकिन रामजय कुमार सिंह को एक महीना का अग्रिम मानदेय भी दिया गया. सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि अगर कोई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में करीब सात करोड़ के सरकारी गबन में शामिल पाया गया हो, उसके खिलाफ साक्ष्य हों,  तो क्या उसे एक महीने का अग्रिम मानदेय देकर उसकी संविदा समाप्त की जानी चाहिए थी.

हालांकि जानकारों का कहना है कि संविदा नियमावली के तहत ही विभाग ने एक महीने का अग्रिम मानदेय दिया है. एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि संविदा समाप्त होना कोई सजा देना नहीं है, बल्कि एक कार्रवाई है. सजा अदालत देगी जब मामले में आरोपी दोषी पाये जायेंगे.

इतने बड़े घोटाले की भनक मीडिया तक को नहीं

इस मामले में सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि बोकारो जिले में स्वास्थ्य विभाग के कर्मी की मिलीभगत से करीब सात करोड़ के घोटाले को अंजाम दिया जाता है. लेकिन इस बात की भनक तक किसी को नहीं लगती है.

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में मामले की शिकायत होती है. मामले की जांच होती है और प्रथम दृष्यता अधिकारियों और कर्मियों के संलिप्तता के साक्ष्य भी मिलते हैं. प्राथमिकी दर्ज होती है. लेकिन लोकल अखबारों से यह खबर गायब है. बोकारो के किसी मीडिया को इतने बड़े घपले की भनक तक नहीं है.

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