Opinion

ये सरकार की पॉलिसी का आम आदमी को तमाचा है

Vikas Kumar

आप घरों मे बैठे हैं. क्योंकि करोना से लड़ना हैँ. आप रूटीन काम न करें, क्योंकि करोना का chain  तोड़ना है. और सरकार सब जानते हुए अंजाम दे रही है. शराब बेचने की अनुमति दे रही है. सामान्य दिनों में इतनी बड़ी line लगती है, फिर इसमें कम कैसे होगा. उसपर तुर्रा यह कि social distancing मेंटेन करना होगा.

ये सरासर सरकार की गलती है. ये किसी भी प्रकार से शराब पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है. 40 दिन घर में बैठकर ये अंजाम सरकार देगी. मुद्दा ये है.

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और आप लिख लें प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथ से कई चीजें फिसल चुकी हैं. मिडिल क्लास और enterprenure के लिए सरकार की कोई योजना न थी और न है.

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बड़े-बड़े loan बहुत बड़े लोगों को मिलेगा. उन्हें माफ़ी भी मिलेगी. हम राइट ऑफ व वेभ ऑफ में उलझे रहेंगे. जी हां, सिर्फ बहुत-बहुत बड़े लोगों को. बड़े लोग जो हैं, उनकी चुनौती मिडिल क्लास से बड़ी है. अपने level को मेंटेन करने के लिए. सरकार और हमारी बैंकिंग सेक्टर इसे बखूबी समझती हैं.

कही ऐसा न हो, ध्यान भटकाने के लिए कुछ और ही हो जाये. हमारा ध्यान भटकाने के लिए. पहले भी हुआ है, आगे भी होता रहेगा. और हम लड़ते रहेंगे. पहले समूह में आमने-सामने बहस करते थे. पेड़ के नीचे चबूतरे पर भिड़ते थे. अब छह ईंच स्क्रिन वाले मोबाइल के जरिये सोशल मीडिया पर.

सबसे जरुरी सबके लिए, इंटरनेट वॉरियर्स को छोड़कर सामान्य जीवन है. जिसको सरकार ने अपनी जूती की नोंक पर रख दिया है. बाकि देखते जाइये, 2014 से सुन रहे थे. इकॉनमी में ये होगा और वो होगा. तीर मार लेंगे और तारे तोड़ लायेंगे. अब 2025 और 2030 का राग अलापा जाएगा.

हो सकता है ये हो भी. हमें भी ख़ुशी होगी. पर जो लोग इन पॉलिसी को भी डिफेंड करेंगे उनको दूर से प्रणाम है. भगवान उन्हें सदबुद्धि दें. वह खुश रहें.

डिस्क्लेमर : लेखक कैरियर काउंसलर और साइकोग्राफिक सोसाइटी, रांची के फाउंडर हैं. ये उनके निजी विचार हैं.

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